30/08/2026
सावन आयो रे… बदरा छायो रे… 🌧️❤️
बारिश की रिमझिम, कच्ची माटी की खुशबू, नीम की डाली पर पड़ा झूला और दूर गए सजन की याद…
“सावन आयो रे” एक मौलिक बुंदेली सावन गीत है, जिसमें बुंदेलखंड की मिट्टी, गाँव की सादगी और अपने प्रिय से बिछड़ने की कसक को महसूस करने की कोशिश की गई है।
सावन हर साल आता है,
बादल हर साल बरसते हैं,
लेकिन जब अपना सजन दूर हो…
तो वही सावन भी अधूरा सा लगता है। ❤️
“तोरे बिना सूना लागे, मनवा को हर त्यौहार…”
और यही इस गीत की सबसे बड़ी भावना है—
सावन की बारिश बाहर जितनी बरसती है, उतनी ही यादें मन के भीतर भी बरसाती हैं।
🎵 Song: सावन आयो रे, बदरा छायो रे
📍 Genre: Bundeli / Folk / Sawan / Virah
यह मेरा Original Song है।
अगर आपको बुंदेलखंड की मिट्टी, गाँव की खुशबू और दिल को छू जाने वाले लोकगीत पसंद हैं, तो ❤️ Like, Comment और Subscribe जरूर करें।
💬 कमेंट में बताइए—
इस गीत की कौन-सी लाइन आपके दिल को सबसे ज्यादा छू गई?
“तू लौट आ रे सजनवा, तेरे बिन अधूरी बरसाती…” ❤️
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