26/08/2026
, यह मामला इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई मौतों से जुड़ा है और अभी काफी महत्वपूर्ण मोड़ पर है।
🚨 मामला क्या है?
दिसंबर 2025 के आखिर में भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े। लोगों को उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियों के कारण अस्पतालों में भर्ती कराया गया। बाद में 36 मौतों का आंकड़ा सामने आया।
💧 पानी दूषित कैसे हुआ?
जांच में मुख्य आशंका पेयजल पाइपलाइन में सीवेज/गंदे पानी के प्रवेश की रही। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी पानी की पाइपलाइन, सीवेज मिलावट और जल गुणवत्ता से जुड़े गंभीर सवाल दर्ज हैं।
⚖️ हाईकोर्ट ने क्या किया?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग बनाया था। आयोग को यह देखने की जिम्मेदारी दी गई कि:
पानी दूषित क्यों हुआ?
वास्तविक मौतों की संख्या कितनी थी?
प्रशासनिक/तकनीकी लापरवाही हुई या नहीं?
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या थी?
भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए क्या कदम जरूरी हैं?
प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे के संबंध में क्या सुझाव होने चाहिए?
📄 अब क्या हुआ?
आयोग ने 600 से अधिक पन्नों की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में जमा कर दी है। 25 अगस्त की सुनवाई में रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी उठी, लेकिन फिलहाल इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल है—जांच रिपोर्ट में किसे जिम्मेदार ठहराया गया है और क्या अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?