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जीवन से जुड़ी गहरी बातें 😊💫🌟
11/02/2026

जीवन से जुड़ी गहरी बातें 😊💫🌟

सही बात 😊👍💯
09/02/2026

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कृष्ण बाणी 🌊💫🌴🎉😊
09/02/2026

कृष्ण बाणी 🌊💫🌴🎉😊

*🌿 श्री कृष्ण कहते हैं 🌿*  ✨ "जब लगे कि अब कुछ नहीं हो सकता..!!  तभी *चमत्कार* होगा..!!  बस कभी *उम्मीद* मत छोड़ना..!!" ...
02/02/2026

*🌿 श्री कृष्ण कहते हैं 🌿*
✨ "जब लगे कि अब कुछ नहीं हो सकता..!!
तभी *चमत्कार* होगा..!!
बस कभी *उम्मीद* मत छोड़ना..!!" 🌸

Happy Republic Day To All 🎉🇮🇳💕👏
26/01/2026

Happy Republic Day To All 🎉🇮🇳💕👏

*🌳आज की कहानी🦚*💐ईमानदारी की बही और स्वर्ग का हिसाब💐चौबे जी पुलिस विभाग में कार्यरत एक ऐसे सज्जन थे, जिनकी पहचान उनकी सच्...
25/01/2026

*🌳आज की कहानी🦚*💐ईमानदारी की बही और स्वर्ग का हिसाब💐

चौबे जी पुलिस विभाग में कार्यरत एक ऐसे सज्जन थे, जिनकी पहचान उनकी सच्चाई, स्पष्टवादिता और ईमानदारी से होती थी। वे जब भी हमारी दुकान से कपड़ा 🧥🥼🦺 उधार लेते, समय से पहले ही पूरे रुपए चुका देते। उनके व्यवहार में न कोई चालाकी थी, न ही लेन–देन में कोई अस्पष्टता।

एक बार वे फिर कपड़ा उधार लेकर अपने गाँव 🏘️ चले गए। उन्हें क्या पता था कि यह उनकी जीवन-यात्रा का अंतिम पड़ाव होगा। गाँव पहुँचते ही वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए और स्वयं ही समझ गए कि अब बचना कठिन है।

यह समाचार जब उनके इकलौते पुत्र रामदेव को मिला,
तो वह तुरंत ग्वालियर से गाँव आ पहुँचा। अंतिम समय में चौबे जी ने बेटे का हाथ थामकर अत्यंत गंभीर स्वर में कहा—
“रामदेव… एक बात कभी मत भूलना। मैं ग्वालियर में
भूरा सेठ की दुकान से कपड़ा उधार लाया था। मेरे जाने के बाद उनके पूरे रुपए जरूर चुका देना।”

कुछ ही दिनों बाद चौबे जी की जीवन-लीला
समाप्त हो गई।
रामदेव को अपनी सर्विस ज्वाइन करनी थी,
इसलिए वह ग्वालियर लौट आया।

इधर हमें जब चौबे जी के स्वर्गवास का समाचार मिला,
तो मन भारी हो गया। हमने सोचा—
“चौबे जी तो बड़े सच्चे और ईमानदार थे। यदि उनके खाते में हमारे रुपए बाकी हैं, तो भगवान की बही 📒 में भी जरूर बाकी निकल रही होगी। कहीं उन्हें इसका दंड न मिल जाए।”

बस, यही सोचकर हमने अपनी जेब से पैसे निकालकर दुकान के गल्ले में रख दिए और खाते में जमा कर दिए।

करीब पाँच–सात दिन बाद रामदेव हमारी दुकान
पर आए और सीधे बोले—
“पिताजी की तरफ कितने रुपए बाकी हैं?”

हमने सहजता से कहा—
“कुछ भी नहीं।”

वे चौंक गए। बोले—
“पिताजी ने तो मरने से पहले मुझे साफ कहा था
कि रुपए देकर आना।”

हम दोनों के बीच काफी बहस हुई। अंततः उन्होंने कहा—
“खाता निकालकर दिखाइए।”

हमने खाता निकाल दिया।
उन्होंने जमा की तारीख देखी और हल्के से मुस्कराकर बोले—
“मेरे पिताजी तो इस तारीख से दस दिन पहले ही स्वर्ग सिधार चुके थे। फिर ये रुपए कौन जमा कर गया? क्या वे स्वर्ग से आकर हिसाब चुकाने आए थे?”

हमने कहा—
“खाते में जमा है, इसलिए हम रुपए नहीं लेंगे।”

वे हँसते हुए बोले—
“तो फिर आप झूठे हैं और आपका खाता भी झूठा है।”

उस क्षण हमें लगा—
“ये सचमुच अपने पिता जैसे ही सच्चे और स्पष्टवादी पुत्र हैं।”

आख़िरकार हमने पूरी सच्चाई उन्हें बता दी और निवेदन किया—
“भाई, चौबे जी हमारे मित्र थे, हमारे लिए आदरणीय थे। कृपा करके…”

लेकिन वे नहीं माने।
हठपूर्वक उन्होंने पूरे रुपए हमें देकर ही दम लिया।

*शिक्षा*
आज के इस घोर कलयुग में भी ऐसी मिसालें मिल जाती हैं, जो मन को श्रद्धा से भर देती हैं।
धन्य हैं ऐसे पिता, जिन्होंने जीवनभर सच्चाई का मार्ग अपनाया,
और धन्य है वह पुत्र, जिसने पितृ-आज्ञा को धर्म समझकर निभाया।

*✨ कृष्ण नीति: जीवन और सफलता के सूत्र ✨*🔱 1. अपने धर्म और कर्म पर अडिग रहो। 🕉️⚖️🔱 2. ज्ञान को सबसे बड़ा हथियार मानो। 📚⚔️...
24/01/2026

*✨ कृष्ण नीति: जीवन और सफलता के सूत्र ✨*

🔱 1. अपने धर्म और कर्म पर अडिग रहो। 🕉️⚖️
🔱 2. ज्ञान को सबसे बड़ा हथियार मानो। 📚⚔️
🔱 3. संकट में धैर्य और बुद्धिमत्ता से काम लो। 🌀🧠
🔱 4. मित्रों-संपर्कों में विवेक से चुनो। 🤝🔎
🔱 5. हमेशा अधिकारों के साथ कर्त्तव्यों को निभाओ। 🎯🎗️
🔱 6. अहंकार त्यागो, विनम्र बनो। 🙏🕊️
🔱 7. हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखो। ⚖️🌿
🔱 8. अपनी बुद्धि और योग्यता से दुनिया को जीतो। 🌏🧘‍♂️
🔱 9. अपना उद्देश्य स्पष्ट रखो, विचलित मत हो। 🎯🚀
🔱 10. प्रेम और करुणा के साथ जीवन जियो। ❤️🌺

कालाम चार कि गेहरी बात 🌟💫🔥😊👏
24/01/2026

कालाम चार कि गेहरी बात 🌟💫🔥😊👏

ध्यान में रखना 🤔💭👀💫😊
24/01/2026

ध्यान में रखना 🤔💭👀💫😊

*🌳🦚आज की कहानी🦚सहयोग की गुल्लक💐💐रिटायर हुए उन्हें अभी अधिक समय नहीं हुआ था । 65 बरस के बाबूजी रिटायर्ड शिक्षक थे । उनकी ...
16/01/2026

*🌳🦚आज की कहानी🦚सहयोग की गुल्लक💐💐
रिटायर हुए उन्हें अभी अधिक समय नहीं हुआ था । 65 बरस के बाबूजी रिटायर्ड शिक्षक थे । उनकी बातचीत व आवाज़ में अलग ही रौब दिखता था।

मांजी तो आठ साल पहले गुजर गयीं थीं। परिवार में तीन बेटे बहुएं व कुल सात पोते पोती थे। संयुक्त परिवार था । बाबूजी घर के मुखिया थे , सब उनका कहा मानतें थे ।

बाबूजी अपने पास एक बड़ी सी गुल्लक रखा करते थे । सभी को सख्त हिदायत थी कि अपनीं बचत के पैसे गुल्लक में अवश्य डाला करें ।

जब गुल्लक पूरी तरह से भर जाती तो उसे तोड़कर बाबूजी सबसे जरूरतें पूछते , आकलन कर तय करते कि राशि किसे देनी है। बाबूजी के निर्णय पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगाता . अगली बार फिर नई गुल्लक रख दी जाती।

इस बार जब गुल्लक तोड़ी गयी तो सबने अपनीं जरूरतें बढ़ा चढ़ा कर गिनाईं ! तभी बाबूजी की नज़र कामवाली ललिता पर पड़ी जो बड़ी उम्मीद भरी नजरों से पैसों को एकटक देख रही थी।

बाबूजी ने पूछा, ललिता तेरी क्या जरूरत है , चल तू बता ? घर के लोग आश्चर्य से बाबूजी ओर देखने लगे। ये तो उनकी कमाई का हिस्सा है कामवाली से क्यों पूछा जा रहा है ?

बोल ललिता " ! जब दोबारा जोर से बाबू जी ने कहा तो ललिता बड़े ही बुझे स्वर में बोली , "बाबूजी मेरी तो कोई जरूरत ना है ", पर बिटिया पूजा के स्कूल में ऑन लाइन पढ़ाई हो रही है । मेरे पास ऐसा मोबाइल नहीं , जिसमें वो पढ़ सके। सुनते ही बाबू जी बोले स्मार्ट फोन चाहिए ?

इधर आ बबलू , अपने छोटे बेटे से बाबूजी बोले । इन पैसों से स्मार्ट फोन लेते आना । सुनकर ललिता की आँख डबडबा गईं ! झट बाबूजी के चरणों पर मत्था टेक दिया। एक बच्ची पढ़ लिख जाए , इससे अच्छा और क्या हो सकता है ?

आजकल की मतलबी दुनियां में किसी के लिए दो पैसा खर्च करना भारी लगता है इसलिए बच्चों मैं इस दुनियाँ में रहूँ या ना रहूँ , तुम अपनीं आय के एक छोटे हिस्से से "सहयोग व साझेदारी" की एक गुल्लक जरूर बनाये रखना। इससे बचत की प्रवृत्ति तो बनेगी ही , किसी एक के ऊपर कोई भार भी नहीं आएगा....! यदि परपीड़ा महसूस कर , उसका सदुपयोग करोगे तो अलग से धर्म कर्म की आवश्यकता भी ना होगी...! !!

इस बूढ़े पिता की यह बात यदि अपनें "मन की गुल्लक" में सदा के लिए संचित कर लो तो मेरा जीवन सफल हो जाये....! सुनकर सब एक स्वर में बोल पड़े , जी बाबूजी ! इस घर में प्यार व सम्मान की गुल्लक हमेशां बनी रहेगी...!

आज के युवा भविष्य की वित्तीय जरूरतों के प्रति सचेत और गंभीर नहीं हैं। वे इसके महत्व को नहीं जानते। बढ़ती उम्र में जब आय के साधन सीमित हो जाते हैं या कहें खत्म हो जाते हैं, तो न्यूनतम जरूरतों को पूरा करने और जीवन शैली को बनाये रखने के लिए बढ़ते खर्च को पूरा करना मुश्किल होता है इसलिए यह जरूरी है कि हम आप अपने बच्चों को शुरू से ही बचत और निवेश करना सीखाएं।

भारतीय परिवार में छोटी बचत का रिवाज बहुत पुराना है। लगभग हर घर में मिट्टी के गुल्लक होते थे और बच्चे उनमें पैसे जमा करते थे। यह चलन अब बहुत कम ही देखने को मिलता है। नयी पीढ़ी, जिसे मिलेनियम भी कहा जाता है, बचत और अपनी आर्थिक जिम्मेवारियों के प्रति लापरवाह दिखती है। यह भविष्य के लिए ज्यादा चिंतित नहीं रहती और आज में ही जीवन व्यतीत करने में विश्वास करती है अगर आनेवाली पीढ़ी के भविष्य को सुखमय बनाना चाहते हैं, तो यह जरूरी है कि बच्चों में बचत करने की प्रवृत्ति को विकसित करना होगा, ताकि निवेश करने के तरीके को वे समझें।

*💐💐कुआं💐💐*

कालाम जी के कथन 🤩💫🌟🎉😊👏
15/01/2026

कालाम जी के कथन 🤩💫🌟🎉😊👏

इस बात को हमेशा याद रखना 💫🔥💯
15/01/2026

इस बात को हमेशा याद रखना 💫🔥💯

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