15/08/2025
🚩🌸🙏 जय श्रीकृष्ण 🙏🌸🌿
"श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा"
श्री कृष्ण – सर्व-आकर्षक, करुणा के सागर, गोपियों के प्रिय।
गोविंद – गो (गौ, इंद्रियां, वेद) के रक्षक और आनंददाता।
हरे – जो पाप, दुःख और बंधन हर लेते हैं।
मुरारी – मुर नामक असुर का संहार करने वाले।
हे नाथ – हमारे स्वामी, रक्षक।
नारायण – सबका आश्रय, जो जल (नार) में वास करते हैं और जगत के आधार हैं।
वासुदेवा – वसुदेव के पुत्र और सर्वव्यापक परमात्मा।
यह मंत्र-जैसा भजन बार-बार गाने से मन निर्मल होता है और हृदय में भक्ति का रस उमड़ता है।
वासुदेवं सुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगत्गुरुम्॥
अर्थ:
वासुदेवं सुतं देवं – वासुदेव के पुत्र, जो स्वयं भगवान हैं।
कंसचाणूरमर्दनम् – कंस और चाणूर राक्षस का संहार करने वाले।
देवकीपरमानन्दं – माता देवकी के परम आनन्दस्वरूप।
कृष्णं वन्दे जगत्गुरुम् – उस श्रीकृष्ण, जो जगत के गुरु हैं, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।
श्रीकृष्ण प्राकट्य महामहोत्सव की
आपको और आपके परिवार को हार्दिक मंगलमय शुभकामनाएं एवं बधाई।
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भगवान श्रीकृष्ण आपकी जीवन-नौका को प्रेम, भक्ति और आनंद के सागर में निरंतर आगे बढ़ाते रहें।
उनकी मुरली की मधुर ध्वनि आपके हृदय को सदैव शांत और प्रसन्न बनाए रखे।
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राधे राधे! 🌹
अखिल@निकुंजरस 🦚🙌🌿