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इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है
नफरत नहीं मोहब्बत फैलाओ
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💉 45 बार रक्तदान कर बनीं इंसानियत की मिसाल: कश्मीर की आशा वर्कर बिलकीस आरा ❤️उत्तरी कश्मीर की खूबसूरत वादियों में रहने व...
29/07/2026

💉 45 बार रक्तदान कर बनीं इंसानियत की मिसाल: कश्मीर की आशा वर्कर बिलकीस आरा ❤️

उत्तरी कश्मीर की खूबसूरत वादियों में रहने वाली आशा वर्कर बिलकीस आरा आज सेवा, इंसानियत और रहमदिली की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। बिना किसी शोहरत, पुरस्कार या पहचान की चाहत के उन्होंने अब तक 45 बार रक्तदान कर कई जरूरतमंद लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है।

इस नेक सफर की शुरुआत साल 2012 में हुई, जब उनकी एक कजिन को प्रसव के दौरान गंभीर हालत में श्रीनगर के एलडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने तुरंत खून की जरूरत बताई। अस्पताल में मरीजों के परिजनों को खून के लिए भटकते और परेशान होते देखकर बिलकीस का दिल दहल गया। उसी पल उन्होंने संकल्प लिया कि वे खुद नियमित रक्तदान करेंगी और दूसरों की जिंदगी बचाने का माध्यम बनेंगी।

आज भी समाज में, खासकर महिलाओं के बीच, रक्तदान को लेकर कई तरह की गलतफहमियां हैं। बिलकीस इन भ्रांतियों को दूर करते हुए बताती हैं कि एक स्वस्थ व्यक्ति हर चार महीने में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है। उनका कहना है कि नियमित रक्तदान से उन्हें कभी कोई परेशानी नहीं हुई, बल्कि वे खुद को पहले से अधिक स्वस्थ महसूस करती हैं।

एक आशा वर्कर होने के नाते वे अक्सर ऐसी महिलाओं की मदद करती हैं जिन्हें प्रसव के दौरान अचानक खून की आवश्यकता पड़ती है। उनका मानना है कि समय पर रक्त उपलब्ध होना किसी की जान बचा सकता है, इसलिए हर सक्षम व्यक्ति को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।

बिलकीस आरा का संदेश साफ है—रक्तदान किसी पर एहसान नहीं, बल्कि इंसानियत और समाज के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।

ऐसी प्रेरणादायक बेटियां समाज का गर्व हैं और हमें यह सिखाती हैं कि किसी की जिंदगी बचाने से बड़ा कोई नेक काम नहीं।

🩸 "रक्तदान करें, जीवन बचाएं।"

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जानकारी के अनुसार, छात्र नेता मोहम्मद सदाकत पिछले लगभग चार महीनों से रूस में हैं। इसी बीच दा...
29/07/2026

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जानकारी के अनुसार, छात्र नेता मोहम्मद सदाकत पिछले लगभग चार महीनों से रूस में हैं। इसी बीच दावा किया जा रहा है कि बिहार पुलिस ने छात्र आंदोलन के दौरान उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि एफआईआर किन धाराओं में दर्ज की गई है और इसकी आधिकारिक स्थिति क्या है।
यदि पुलिस की कार्रवाई हुई है, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित पक्षों का बयान इस मामले में अहम होगा।
हमारी अपील है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेज़ों और विश्वसनीय स्रोतों की जानकारी का इंतजार करें।
इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके ज़रूर बताइए।
वीडियो पसंद आए तो लाइक करें, शेयर करें और Naushad TRT को फ़ॉलो करना न भूलें। धन्यवाद!

बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ नाहिद राना को लेकर रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्होंने अपनी शादी में वीआईपी मेहमानों ...
29/07/2026

बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ नाहिद राना को लेकर रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्होंने अपनी शादी में वीआईपी मेहमानों और शाही आयोजन को प्राथमिकता देने के बजाय एक मदरसे के हाफिज़-ए-कुरआन की मेहमाननवाज़ी को चुना। यदि यह रिपोर्ट सही है, तो यह सादगी, दीन से मोहब्बत और कुरआन से जुड़े लोगों के सम्मान का एक प्रेरणादायक उदाहरण माना जा सकता है। आज के दौर में, जब शादियों में दिखावे पर बहुत अधिक खर्च किया जाता है, ऐसी खबरें लोगों को सादगी और अच्छे मूल्यों की याद दिलाती हैं। हालांकि, यह जानकारी विभिन्न रिपोर्टों के आधार पर साझा की जा रही है, इसलिए इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

यह रहा आपका संदेश, जिसे सोशल मीडिया पोस्ट या वीडियो स्क्रिप्ट के रूप में अधिक प्रभावशाली और संतुलित भाषा में तैयार किया ...
29/07/2026

यह रहा आपका संदेश, जिसे सोशल मीडिया पोस्ट या वीडियो स्क्रिप्ट के रूप में अधिक प्रभावशाली और संतुलित भाषा में तैयार किया गया है:

पैरों में चालीस रुपये की हवाई चप्पल थी,
लेकिन ज़मीर की अमीरी का कोई मोल नहीं था।

जब दफ्तर की चौखट पर उन्होंने विनम्रता से पूछा,
"चप्पल यहीं उतार दूँ?"
तो वहाँ मौजूद बड़े-बड़े डिग्रीधारियों के सिर भी सम्मान से झुक गए।

फर्श साफ़ था, लेकिन मुहम्मद इरफ़ान का दिल उससे भी ज़्यादा साफ़ था। उनकी सादगी, विनम्रता और संस्कार ने दिखा दिया कि इंसान की असली पहचान उसके कपड़ों, जूतों या हैसियत से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार से होती है।

आज के दिखावे भरे दौर में यह छोटा-सा पल एक बड़ा संदेश देता है—
असली तहज़ीब और संस्कार महलों की ऊँची दीवारों से नहीं, बल्कि ज़मीन से जुड़े लोगों के चरित्र से सीखने को मिलते हैं।

कपड़े रुतबा दिखा सकते हैं,
लेकिन संस्कार इंसान की असली दौलत होते हैं।

सलाम है ऐसी सादगी, ऐसे संस्कार और ऐसी इंसानियत को।
जियो शेर मुहम्मद इरफ़ान! 🫡❤️🙏

867 दिन...जी हाँ, पूरे 867 दिन जेल में बिताने के बाद आखिरकार मध्य प्रदेश के खरगौन हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए 11 मुस...
29/07/2026

867 दिन...

जी हाँ, पूरे 867 दिन जेल में बिताने के बाद आखिरकार मध्य प्रदेश के खरगौन हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए 11 मुस्लिम आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पेट्रोल बम के इस्तेमाल का आरोप अदालत में सिद्ध नहीं हो पाया और सबूत पर्याप्त नहीं पाए गए।

यह मामला अप्रैल 2022 की रामनवमी के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा था। उस समय शहर में तनाव और हिंसा के बाद कई लोगों की गिरफ्तारी हुई, संपत्तियों को नुकसान पहुँचा और बुलडोज़र कार्रवाई भी चर्चा का विषय बनी।

अब सवाल उठ रहे हैं—

अगर अदालत में आरोप साबित नहीं हुए, तो जिन लोगों ने 867 दिन जेल में बिताए, उस समय की भरपाई कौन करेगा?

क्या किसी निर्दोष व्यक्ति के जीवन के ढाई साल लौटाए जा सकते हैं?

क्या ऐसी जांचों में जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी बेगुनाह को बिना पर्याप्त सबूत के लंबी कैद का सामना न करना पड़े?

एक लोकतंत्र में न्याय केवल सज़ा देने का नाम नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि किसी निर्दोष को अन्याय न सहना पड़े।

आपकी इस मामले पर क्या राय है? अपनी राय कमेंट में ज़रूर लिखें।

कभी-कभी डिग्री नहीं, हिम्मत इंसान की पहचान बनती है।एक साधारण-सा घर... साधारण-सी ज़िंदगी... लेकिन इरादे इतने बुलंद कि उनक...
29/07/2026

कभी-कभी डिग्री नहीं, हिम्मत इंसान की पहचान बनती है।
एक साधारण-सा घर... साधारण-सी ज़िंदगी... लेकिन इरादे इतने बुलंद कि उनकी आवाज़ लाखों लोगों तक पहुँच गई।
मोहम्मद इरफ़ान ने यह साबित कर दिया कि इंसान की असली ताकत उसकी सोच, उसके जज़्बे और उसकी सच्चाई में होती है। उन्होंने हर उस व्यक्ति को उम्मीद दी, जो हालात से हार मानने वाला था।

न किताबों का सहारा था, न डिग्रियों का मान,
सच की राह पर निकला, बस लेकर अपना ईमान।
जो आवाज़ दिल से निकले, उसे कौन रोक पाया है,
इरफ़ान ने यह दिखा दिया, हौसला ही असली पहचान है।

"प्रोटेस्ट खत्म हुआ... लेकिन क्या जुनैद भाई अकेले पड़ गए?"पेपर लीक आंदोलन से जुड़े मुहम्मद जुनैद को लेकर सोशल मीडिया पर ...
27/07/2026

"प्रोटेस्ट खत्म हुआ... लेकिन क्या जुनैद भाई अकेले पड़ गए?"

पेपर लीक आंदोलन से जुड़े मुहम्मद जुनैद को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पोस्ट में दावा किया गया है कि आंदोलन के पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक जुनैद भाई प्रदर्शनकारियों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था में जुटे रहे और पूरी निष्ठा से सेवा करते रहे।

वायरल पोस्ट के अनुसार, आंदोलन खत्म होने के बाद पुलिस ने जुनैद को हिरासत में लिया। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि आंदोलन से जुड़े कुछ प्रमुख चेहरों ने उनसे संपर्क नहीं किया। पोस्ट में यह भी कहा गया है कि स्वयं जुनैद ने बताया कि उनकी कुछ प्रमुख आंदोलनकारियों से कोई बातचीत नहीं हुई।

यही नहीं, पोस्ट में यह आरोप भी लगाया गया है कि अब आंदोलन में शामिल कुछ अन्य छात्रों और युवाओं के परिवारों तक भी नोटिस पहुंचने लगे हैं।

हालांकि, इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित व्यक्तियों या पुलिस की ओर से भी इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो एक बड़ा सवाल उठता है—क्या किसी आंदोलन के समाप्त होने के बाद उसमें शामिल लोगों के प्रति कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी भी समाप्त हो जाती है, या साथ निभाना आगे भी जरूरी होता है?

इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताइए।

'मैं बालिग हूं, तुम होते कौन…' — ब्वॉयफ्रेंड के लिए भाई से भिड़ी बहन, भूल गई भाई का प्यार?एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया...
27/07/2026

'मैं बालिग हूं, तुम होते कौन…' — ब्वॉयफ्रेंड के लिए भाई से भिड़ी बहन, भूल गई भाई का प्यार?

एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने भाई से कहती सुनाई देती है, "मैं बालिग हूं, तुम होते कौन मुझे रोकने वाले?" बताया जा रहा है कि मामला युवती के अपने पसंद के लड़के के साथ जाने को लेकर परिवार में हुए विवाद का है।

वीडियो में भाई अपनी बहन को समझाने की कोशिश करता दिखाई देता है, जबकि बहन अपने फैसले पर अड़ी रहती है। इस घटना ने सोशल मीडिया पर रिश्तों, व्यक्तिगत आज़ादी और परिवार की भूमिका को लेकर बहस छेड़ दी है।

हालांकि, वायरल वीडियो या उससे जुड़ी सभी बातों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे मामलों में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना उचित है।

आपकी क्या राय है?
क्या बालिग होने के बाद व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए, या परिवार की सलाह और सहमति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

सीजेपी प्रोटेस्ट से मुस्लिम लड़की फरहा नाज़ गायब गायब हो गई है अल्लाह इसकी हिफाजत फरमाए
27/07/2026

सीजेपी प्रोटेस्ट से मुस्लिम लड़की फरहा नाज़ गायब गायब हो गई है अल्लाह इसकी हिफाजत फरमाए

20 जुलाई के एक्शन पर बड़ा खुलासा! जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर RAF ने अपनी आंतरिक समीक्षा में माना कि कुछ जवानों ने ज़रूरत...
26/07/2026

20 जुलाई के एक्शन पर बड़ा खुलासा! जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर RAF ने अपनी आंतरिक समीक्षा में माना कि कुछ जवानों ने ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग किया।"
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के बाद अब एक अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, RAF की आंतरिक समीक्षा में स्वीकार किया गया है कि कुछ जवानों द्वारा आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया।

बताया जा रहा है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में बल का इस्तेमाल चरणबद्ध और हालात के अनुसार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, कुछ भीड़-नियंत्रण उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई और भीड़ नियंत्रण की प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, इस मामले पर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी राय है और घटना से जुड़ी जानकारी व समीक्षा सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर सामने आ रही है।

"इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है?

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