01/10/2026
गलत काम की पहचान नहीं, कृत्य पर सवाल होना चाहिए!
बताया जा रहा है कि ट्रेन में एक व्यक्ति ने सार्वजनिक स्थान पर महिलाओं और बच्चियों की मौजूदगी में कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया और पेशाब किया। मौजूद लोगों ने इसका विरोध किया और उसे रोकने की कोशिश की।
ऐसी हरकत निंदनीय है और यदि आरोप सही हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन एक बड़ा सवाल भी है—क्या किसी आरोपी की धार्मिक पहचान के आधार पर किसी घटना को अलग-अलग तरीके से देखा जाना चाहिए?
अपराध, अपराध है—चाहे आरोपी किसी भी धर्म का हो।
किसी घटना को धार्मिक रंग देकर नफरत या भीड़ की हिंसा को बढ़ावा देना समाज के लिए नुकसानदेह है।
कानून का पैमाना सबके लिए एक जैसा होना चाहिए।
पहचान नहीं, कृत्य देखिए। न्याय सबके लिए बराबर होना चाहिए।