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हनुमान प्राकट्योत्सव के पावन अवसर सेवा.....
12/04/2025

हनुमान प्राकट्योत्सव के पावन अवसर सेवा.....

श्रद्धा का अर्थ यह नहीं की जो आप चाह रहे हैं ठाकुर जी वही करेंगे, श्रद्धा का अर्थ है ठाकुर जी वही करेंगे जो  आपके लिए सह...
21/05/2024

श्रद्धा का अर्थ यह नहीं की जो आप चाह रहे हैं ठाकुर जी वही करेंगे,
श्रद्धा का अर्थ है ठाकुर जी वही करेंगे जो आपके लिए सही होगा
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06/05/2024

#श्रीमद्_भागवत_कथा #अनुशासन_नियम #विकृतियां
लड़के लड़कियों को राधाकृष्ण बना कर नचाने से कथा का फल नष्ट हो जाता है , झांकी के नाम पर कथाओं में गंदगी बढ़ रही है ,शुद्ध श्रीमद्भागवत कथायें होगी तभी कल्याण होगा।।
#श्रीमद्_भागवद्_कथा_बनाम_डिस्को #डांस
श्रीमद्भागवत कथा
अकालमृत्यु के कारण प्रेतयोनि में गये पूर्वजों की मुक्ति का सर्वोच्च साधन है।

पितृपूजा में देव पूजा से भी अधिक सावधानी की आवश्यकता है।देवता भाव के भूखे होते हैं ,पूजनकर्म
में स्वल्प त्रुटि को देवता क्षमा कर देते हैं।परन्तु
#सावधान!......पितृदेव भाव के साथ साथ कर्मशुद्धि
भी चाहते हैं।अत : पितृ पूजन में देवपूजा से भी अधिक सावधानी जरूरी है।

एक मित्र ने बताया कि एक सेठ प्रतिवर्ष #श्रीमद्भागवद्कथा का आयोजन कर रहे हैं पर
दिन प्रतिदिन कारोबार ठप्प हो रहा है।
कारण स्पष्ट है ,कथा में नियमों की धज्जियां उड़ाई
जा रही हैं।
#नियम क्या हैं इन्हें समझ लें यदि पितरों को वास्तव में ही प्रसन्न करना चाहते हो तो।
१. ब्राह्मण विद्वान व आचारवान हों।
२.श्रीमद् भागवत का मूल पाठ दोपहर तक हो ,बाद में कथा का सार श्रोताओं को सुनाएं।
३.पितृपूजा में घर की औरतें सिर पर घूंघट रखें,नाच गाना व निर्लज्जता का प्रर्दशन बिल्कुल न करें।
४. आचार्य नियमों का पूर्ण पालन करें। कथा संस्कृतनिष्ठ हो।

#हरे राम हरे हरे कृष्ण ...आदि कीर्तन ही करें।
फिल्मी धुन व गीतों की कथा के बीच में कोई आवश्यकता नहीं,यह सब अशास्त्रीय है।
जो कथा का अंग नहीं है।
ये सब करना है तो अन्य किसी दिन करें पर पितृपूजा में सर्वथा वर्जित है।

५. पितृपूजा में स्पष्ट निर्देश है कि इसका विस्तार न करें क्योंकि विस्तार से अशुद्धता आ जाती है।

६. इस दौरान विजातीय मित्रों को अपने घर आमंत्रित न करें क्योंकि यह कुलदेव पूजा है कोई उत्सव नही ।

6.रसोई में बने प्रसाद को ब्राह्मण व सजातीय ही खाएं। संगीत मंडली की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इसमें विजातीय हो सकते हैं।
६. घर के सब लोग प्रतिदिन साफ वस्त्र पहनें।ब्रह्मचर्य में रहें।नीला,काला परिधान निषेध है।
७. घर में बांस की झाड़ू न लगाएं।
८. दूध न बिलोंएं। व्यापार भी इन दिनों स्थगित रखें।
९. ब्राह्मण भोजन के झूठे बर्तन पुरुष ही उठाएं, औरतें नहीं।
९.ब्राह्मण भी सफेद वस्त्र पहनें ,लाल ,नीले नहीं।ब्राह्मणों का परिधान सफेद वस्त्र ही है।
बहुरंगा परिधान तो नौटंकीबाज का है, जो नाटकादि करते हैं। वैदिक विद्वानों का नहीं।

इस कथा का आयोजन परीक्षित ने मृत्यु से पहले दत्तचित होकर सुना था ।इसको सुनने देवता भी आते हैं अतः मर्यादा में रहें।
डिस्को डांस न बनाएं। शालीनता बरतें व मन लगाकर पूजा करें बिना किसी दिखावे के।

इसतरह नियमानुसार #भागवत करने से आपके पितृ व देवता तो प्रसन्न होंगे ही साथ ही धन ऐश्वर्य सुख शांति यश की भी प्राप्ति होगी ।

~~~सनातन वैदिक धर्म विचार मंच~~~

❗जय महादेव❗
⭕प्रश्न नहीं स्वाध्याय करें‼️

जिंदगी अच्छे और बुरेदोनों पलों से मिलकर बनी है ...!न तो कभी खुशी को सिर परबिठाना चाहिए , न ही कभी गम कोदिल से लगाना चाहि...
28/03/2024

जिंदगी अच्छे और बुरे
दोनों पलों से मिलकर बनी है ...!
न तो कभी खुशी को सिर पर
बिठाना चाहिए , न ही कभी गम को
दिल से लगाना चाहिए...!!

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