21/02/2026
इंसान को दुनिया की कोई ताकत पराजित नहीं कर सकती; यदि वह हारता है तो अपने ही आत्मबल, अपने ही मन और अपने ही विचारों से हारता है। समस्या से भागना कभी समाधान नहीं होता, बल्कि उसका साहसपूर्वक सामना करने से ही आगे का मार्ग खुलता है। अधिक से अधिक क्या होगा—अस्वीकृति या असफलता? जीवन में अंततः दो ही परिणाम होते हैं: हार या जीत। इसलिए इनसे भयभीत होने के बजाय इन्हें जीवन का हिस्सा मानकर आगे बढ़ना चाहिए। दृढ़ संकल्प और संयम के साथ चलने वाला व्यक्ति अपना मार्ग स्वयं बना लेता है। ब्रह्मचर्य ही जीवन की सुदृढ़ नींव है।