10/10/2026
मानुष हों तो वही रसखान ,
बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन ।
जौ पशु हों तो कहा बसु मेरौ ,
चरो नित नन्द की धेनु मझारन ।।
पाहन हों तो वही गिरि को ,
जो धरयो कर छत्र-पुरन्दन कारन ।
जो खग होऊँ तो बसेरौ करों ,
नित कालिन्दी कूल कदम्ब की डारन ।।