23/06/2026
लखनऊ अग्निकांड: 'सिस्टम' की लापरवाही ने ली 15 निर्दोषों की जान, क्या सस्पेंशन और आंसू ही हैं हर हादसे का इलाज?
लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का आलीशान और व्यस्त इलाका अलीगंज सोमवार दोपहर अचानक चीख-पुकार और काले धुएं के गुबार में डूब गया। एक तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते 15 हंसते-खेलते चेहरों को मौत की आगोश में सुला दिया। मरने वालों में 5 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश 20 से 30 साल की उम्र के वे छात्र थे, जो अपने सुनहरे भविष्य का सपना लेकर यहां की एक लाइब्रेरी (कोचिंग सेंटर) में पढ़ने आए थे। 10 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
हादसा इतना खौफनाक था कि जान बचाने के लिए कोई पहली मंजिल से कूद गया, तो कोई तारों के सहारे लटककर नीचे उतरा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक 'हादसा' है, या फिर चंद रुपयों के लालच और प्रशासनिक सांठगांठ से किया गया 'संस्थागत मर्डर'?
शुरुआती जांच और चश्मदीदों के बयानों ने इस पूरी इमारत को 'मौत का कुआं' साबित कर दिया है।
अवैध कमर्शियल खेल: यह इमारत वीरेंद्र शुक्ला की जमीन पर बनी है, जिनका आवासीय नक्शा पास था। लेकिन साल 2014 में नियमों को ताक पर रखकर इसे कमर्शियल बना दिया गया। नगर निगम साल 2022 से इस पर कमर्शियल टैक्स भी वसूल रहा था, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि इस इमारत में सुरक्षा के मानक पूरे हैं भी या नहीं।
मौत का ऑटोमैटिक लॉक:इमारत की दूसरी मंजिल पर चल रहे 3D आर्ट और गेमिंग स्टूडियो का मुख्य गेट 'थंब इंप्रेशन' (बायोमेट्रिक) से खुलता था। आग लगने के बाद जब बिजली कटी, तो यह गेट ऑटोमैटिक लॉक हो गया। बदहवास लोग अंदर फंसे रहे और गेट खोलने की जद्दोजहद में बेशकीमती मिनट बर्बाद हो गए।
गायब था इमरजेंसी एग्जिट: पूरी इमारत में बाहर निकलने के लिए कोई इमरजेंसी रास्ता (Emergency Exit) था ही नहीं। जब आग फैली, तो मजबूरन बच्चों ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया, जहां दम घुटने से उनकी मौत हो गई। बाद में फायर ब्रिगेड को पीछे की दीवार तोड़कर शवों को बाहर निकालना पड़ा।
तमाशाई प्रशासन: हादसे के बाद रोए माननीय, कम पड़ गईं एंबुलेंस !
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला और सियासतदान मौके पर पहुंच गए। 19 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां, NDRF और SDRF की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इस बीच, बेजुबान जानवरों के हक में काम करने वाले कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने ग्राउंड फ्लोर पर स्थित पेट शॉप से कई मूक पशुओं को सुरक्षित बाहर निकाला। इंसानों को बचाने की जद्दोजहद भी जारी रही, लेकिन यूपी की हाई-टेक राजधानी का ढोल तब फट गया जब मौके पर घायलों और शवों को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक कम पड़ गईं।
मौके पर पहुंचे प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक इस भयावह मंजर को देखकर फूट-फूट कर रो पड़े। माननीय के आंसू अपनी जगह हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब रसूखदार लोग नियमों को जेब में रखकर रिहायशी इलाकों में मौत के ये कमर्शियल अड्डे खड़े कर रहे होते हैं, तब प्रशासन की आंखें क्यों रोने का इंतजार करती हैं?
सीएम योगी का एक्शन: 4 अफसर सस्पेंड, मालिकों समेत 4 गिरफ्तार ।
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने ट्रॉमा सेंटर जाकर पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात की और साफ कहा कि "जिम्मेदार किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।"
अब तक की बड़ी कार्रवाई:
> * इमारत के मालिकों समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। कुल 16 आरोपियों की लिस्ट तैयार है।
> * मुख्यमंत्री के निर्देश पर लापरवाही बरतने वाले 4 जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
> * पूरे मामले की जांच के लिए 2 सदस्यीय हाई-लेवल SIT का गठन किया गया है, जिसमें अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और ADG प्रवीण कुमार शामिल हैं। टीम को 7 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
> * दिल्ली से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी सीधे लखनऊ पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना किया।
तीखा सवाल: आखिर कब तक कागजी जांच के भरोसे रहेगा युवाओं का भविष्य?
एसी शॉर्ट सर्किट से बेसमेंट में हुआ ब्लास्ट तो सिर्फ एक तात्कालिक वजह है, असली 'ब्लास्ट' तो उस भ्रष्टाचार का है जो लखनऊ के हर कोने में ऐसी अवैध और असुरक्षित इमारतों के रूप में फल-फूल रहा है।
हर बड़े हादसे के बाद एक तयशुदा स्क्रिप्ट चलती है—नेताओं के आंसू आते हैं, कुछ छोटे-मोटे अधिकारियों पर सस्पेंशन की गाज गिरती है, मुआवजे का ऐलान होता है और एक SIT बना दी जाती है। लेकिन सवाल वही अनुत्तरित रह जाता है ! क्या सस्पेंशन से उन 15 घरों के चिराग वापस लौट आएंगे? आखिर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और नगर निगम के वो इंजीनियर और अधिकारी सलाखों के पीछे कब भेजे जाएंगे, जिन्होंने घूस की मलाई खाकर इस मौत की इमारत को सालों से चलने दिया?
आज अलीगंज की इस घटना ने लखनऊ के हर उस माता-पिता को डरा दिया है, जिसके बच्चे किसी तंग गली या बिना फायर एनओसी (NOC) वाली इमारतों में चल रही कोचिंग या ऑफिसों में बैठकर अपना भविष्य तलाश रहे हैं।
MYogiAdityanath UP Police Chief Minister Office Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश लखनऊ