19/08/2026
पैग़ाम-ए-सीरतुन्नबी ﷺ — सबके लिए
लेखक: जावेद भारती
सीरतुन्नबी ﷺ केवल मुसलमानों के लिए पढ़ने और सुनने का विषय नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक ऐसा संदेश है, जिसमें इंसानियत, प्रेम, भाईचारा, न्याय, दया, सहिष्णुता और अच्छे आचरण की शिक्षा मिलती है। पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद ﷺ ने अपनी पूरी ज़िंदगी मानव समाज को यह सिखाने में गुज़ार दी कि इंसान की असली पहचान उसके अच्छे व्यवहार और उसके कर्मों से होती है।
आप ﷺ ने ऐसे समय में दुनिया को इंसानियत का रास्ता दिखाया, जब समाज में जाति-पाति, ऊँच-नीच, अन्याय, अत्याचार और आपसी दुश्मनी जैसी बुराइयाँ आम थीं। आपने लोगों को बताया कि सभी इंसान एक ही मूल से हैं और किसी इंसान को दूसरे इंसान पर केवल उसके धन, वंश या पद के कारण श्रेष्ठता प्राप्त नहीं है।
आप ﷺ का जीवन दया और करुणा का सर्वोत्तम उदाहरण है। आपने अपने साथ बुरा व्यवहार करने वालों के साथ भी क्षमा और उदारता का व्यवहार किया। आपने पड़ोसियों के अधिकारों पर जोर दिया, चाहे पड़ोसी किसी भी धर्म या समुदाय का क्यों न हो। आपने भूखे को खाना खिलाने, जरूरतमंद की मदद करने, अनाथों और कमजोरों का ख्याल रखने तथा दुखी इंसान के दुख को अपना दुख समझने की शिक्षा दी।
सीरत का एक महत्वपूर्ण संदेश न्याय है। पैग़म्बर ﷺ ने सिखाया कि न्याय अपने और पराए, अमीर और गरीब तथा ताकतवर और कमजोर सभी के लिए समान होना चाहिए। किसी के साथ केवल उसकी पहचान या संबंध के कारण अन्याय नहीं होना चाहिए। आज के समाज में यदि हम इस शिक्षा को अपना लें तो अनेक सामाजिक समस्याओं का समाधान हो सकता है।
आप ﷺ ने महिलाओं के सम्मान और अधिकारों पर भी विशेष जोर दिया। बेटियों को बोझ समझने वाली मानसिकता का विरोध किया और महिलाओं के साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार की शिक्षा दी। आपने परिवार को समाज की बुनियादी इकाई माना और पति-पत्नी, माता-पिता तथा बच्चों के अधिकारों को स्पष्ट किया।
आप ﷺ की सीरत हमें यह भी सिखाती है कि धर्म केवल कुछ धार्मिक कर्मों का नाम नहीं है, बल्कि अच्छे चरित्र का नाम भी है। झूठ, धोखा, अहंकार, नफरत, अत्याचार और बेईमानी से बचना तथा सच्चाई, ईमानदारी, विनम्रता और इंसाफ को अपनाना भी सीरत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आज दुनिया में धर्म, जाति, भाषा और विचारधारा के नाम पर दूरियाँ बढ़ती दिखाई देती हैं। ऐसे समय में पैग़म्बर ﷺ की सीरत हमें आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता दिखाती है। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मतभेद को दुश्मनी में बदल देना इंसानियत के लिए नुकसानदेह है।
सीरतुन्नबी ﷺ का सबसे बड़ा पैग़ाम यही है कि इंसान अपने चरित्र को बेहतर बनाए, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करे, जरूरतमंद के काम आए और समाज में शांति तथा भाईचारे को बढ़ावा दे।
इसलिए सीरतुन्नबी ﷺ को केवल एक धार्मिक अवसर तक सीमित करने के बजाय हमें इसे अपने व्यवहार और जीवन में उतारने की जरूरत है। अगर हम सच्चाई को अपनाएँ, इंसाफ करें, कमजोरों का सहारा बनें, पड़ोसी का सम्मान करें, माफ करना सीखें और हर इंसान के साथ इंसानियत का व्यवहार करें, तो यही सीरतुन्नबी ﷺ का वास्तविक संदेश होगा।
सीरत पढ़ने के साथ-साथ सीरत को अपने जीवन में उतारना ही पैग़म्बर-ए-इस्लाम ﷺ के प्रति सच्ची श्रद्धा और प्रेम की पहचान है।
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जावेद अख्तर भारती (पूर्व महासचिव बुनकर यूनियन)
मोहम्मदाबाद गोहना जनपद मऊ उत्तर प्रदेश