08/11/2025
वो आये घर में हमारे ख़ुदा की कुदरत है ...
हम तो फनाह हो गए उसकी ऑंखें देख कर ग़ालिब , ...
हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ, ...
ज़रा सोच कर रखना हमारे सल्तनत में कदम मेरे सनम, ...
कोई हद ही नहीं शायद मोहब्बत के फ़साने की, ...
ldquo’सीने में धड़कता जो हिस्सा हैंhellip’. ...
मेरी मोहब्बत ही देखनी है तो गले लगाकर देखो 😞 ❤️ ❤️