19/01/2026
कोई 14 साल का बच्चा जिसके परिवार ने फ्रॉड करने की ट्रेनिंग दी जिसे चस्का लगा समुदाय की भावनाओं साथ फ्राड करके आराम से पैसा भी कमाया जा सकता और नेम फेम तो मुफ्त मिलेगा ही !
उसने बिना किसी जानकारी के बहुजन समाज पार्टी के खिलाफ एक वीडियो बनाई जिसका आधार एक किताब को बनाया ललाई सिंह यादव द्वारा रचित सच्ची रामायण,
उसने भ्रम फैलाया मायावती जी 2007 में सच्ची रामायण पर बैन लगाया जबकि इस किताब पर बैन बहन जी तो क्या खुद मोदी ,योगी , राहुल, सोनिया गांधी भी इस किताब को कभी बैन नहीं कर सकते !!
कारण इस किताब पर वर्ष 1971 में मुकदमा हुआ जिसकी पैरवी खुद बहुजन महापुरुष ललाई सिंह यादव किए सच्ची रामायण' की कानूनी लड़ाई भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक मील का पत्थर मानी जाती है।
ललई सिंह यादव ने इस मुकदमे को दो स्तरों पर जीता था—पहले हाईकोर्ट में और फिर सुप्रीम कोर्ट में।
उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट में जीत (1971)
सुप्रीम कोर्ट में अंतिम जीत (1976)
पीठ (Bench): इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय खंडपीठ ने की थी, जिसमें न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर, न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और न्यायमूर्ति सैयद मुर्तज़ा फ़ज़ल अली शामिल थे।
इस जीत के बाद ही 'सच्ची रामायण' उत्तर भारत में एक वैचारिक जीत के रूप में देखी गई !
अब इस छटाक भर के यूट्यूबर ने ना तो कोई रेफरेंस दिया ना कोई ठोस कारण बताया बस बहन जी ने बैन करी और बीजेपी के कहने पर बैन करी, केवल बसपा को बदनाम करने की मनसा से रट्टू तोते की तरह बकवास करता रहा,
अब जो इसके भाई के आका जिनका वो गुलाम है, जो लिख कर दे वहीं बोलने में उस्तादी करी कुल जमा इतना ही कौशल है !
अब इस किताब को क्यों बैन नहीं किया जा सकता वो भी जान लो !
कोर्ट के फैसले की सर्वोच्चता (Res Judicata)
कानून में एक सिद्धांत होता है जिसे 'रेस ज्यूडिकाटा' (Res Judicata) कहते हैं। इसका अर्थ है कि यदि किसी मामले पर कोर्ट ने एक बार अंतिम फैसला सुना दिया है, तो उसी मुद्दे को उन्हीं पक्षों के बीच दोबारा नहीं उठाया जा सकता।
अगर सुप्रीम कोर्ट ने 'सच्ची रामायण' को यह कहते हुए बहाल किया कि यह "धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करती" या "अभिव्यक्ति की आजादी के दायरे में है", तो सरकार उसी कारण का हवाला देकर दोबारा बैन नहीं लगा सकती।
In short अगर किसी सरकार ने कोशिश करी तो Contempt of Court माना जाएगा !
अब इसका दूसरा फ्राड जिन ढकन्नो को पब्लिसिटी और अन्याय का फर्क तक नहीं मालूम समर्थन और विरोध में कूद पड़ते है !
इस फ्रॉड पब्लिसिटी का असर इतना हुआ मात्र 24 घंटे में इसके 1 लाख से ऊपर फॉलोवर्स बढ़ गए !
इसने अपने फॉलोवर्स बढ़ाने के लिए एक नहीं अनेक बार FIR की झूठी खबर प्रसारित करी, अब इसके खिलाफ सरकार ने FIR करी है, थाना क्षेत्र (दुबग्गा) लखनऊ !
मैने खुद वहां के SHO से बात करी इसके अलावा अन्य दो व्यक्ति जो लखनऊ निवासी प्रोफेसर श्रेयत और चंदन यादव से भी पुष्टि करवाई,
पता तो लगे इसने ऐसी कौनसी पोल खोल दी सरकार की और किसने FIR दर्ज करवाई, तो पता चला इसने हिंदू धर्म के खिलाफ अनावश्यक टिप्पणी करी जिसके चलते इसे थाने बुलाया गया और उम्र का छोटा देख सिर्फ डांट के भगा दिया,
चुकी फ्राड करने में ट्रेनिंग पूरी किए हुए तो इसके बड़े भाई ने खबर उड़ाई एक वीडियो में सरकार से सवाल पूछ लिया इस लिए पुलिस ने FIR कर दी तो अब पूछो इसे कौनसी वीडियो जिसमें इतनी घातक जानकारी चला दी कहा है FIR कॉपी ?
मेरी इस बच्चे से कोई निजी दुश्मनी नहीं अगर बसपा को लेकर झूठ फैलाया तो घर का एड्रेस पता लग गया, इस बार पुलिस कोई रहम नहीं करेगी ! नमस्ते ! 🙏🏻
( उन लोगों को कॉमेंट में मेंशन करना ना भूले जो इसके झांसे में आए, उन्हें इसकी विद्वानी पता तो चले )