Sachin Verma

Sachin Verma Sachin Azad

मैने बहुत से ईन्सान देखे हैं, जिनके बदन पर लिबास नही होता,
और बहुत से लिबास देखे हैं, जिनके अंदर ईन्सान नही होता।
कोई हालात नहीं समझता, कोई जज़्बात नहीं समझता,
ये तो बस अपनी अपनी समझ की बात है…,
कोई कोरा कागज़ भी पढ़ लेता है तो कोई पूरी किताब नहीं समझता!

25/11/2025
25/11/2025
 #माँसदमा गहरा है की तुम साथ नहीं माँ ......पर कोई लम्हा, पल नहीं जिसमें तुम नहीं माँ .....हर जज़्बात मैं तुम हर आवाज मैं...
16/03/2025

#माँ

सदमा गहरा है की तुम साथ नहीं माँ ......
पर कोई लम्हा, पल नहीं जिसमें तुम नहीं माँ .....

हर जज़्बात मैं तुम हर आवाज मैं तुम......
और मेरी हरेक सांस मैं तुम हो माँ .....

नींद मैं गोद का सिरहाना तुम..... ,
उंगलिओं से बालों को पोरना तुम......
अच्छे मैं खुशी तुम,दुःख मैं सहारा तुम.....

तुमने जो किया उसका अंश भर भी मैं दे न सका.....
तुमने लुटाई गंगा और मैं अन्जरी भी भर न सका.....

मेरी हर निराशा की आशा तुम.....
मेरी बिखरी उमीदों का विश्वास तुम ......

मेरी हर मुश्किल का जवाब तुम......
मेरे हर ख्याल की आवाज तुम......
मेरी हस्ती की सिर्फ और सिर्फ पहचान तुम हो माँ ....

कबूल हो दुआ की तुम मेरे जीवन मैं फिर आओ
दर्दों के सागर मैं ख़ुशी का एक सीप लाओ

04/02/2025
26/01/2025
12/01/2025

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मैने बहुत से ईन्सान देखे हैं, जिनके बदन पर लिबास नही होता , और बहुत से लिबास देखे हैं, जिनके अंदर ईन्सान नही होता। कोई हालात नहीं समझता, कोई जज़्बात नहीं समझता , ये तो बस अपनी अपनी समझ की बात है…, कोई कोरा कागज़ भी पढ़ लेता है तो कोई पूरी किताब नहीं समझता !