08/06/2026
शामली में करोड़पति कारोबारी बोला- अपनी मर्जी से मुस्लिम बना:मां-बाप पूजा करें, मैं नमाज पढ़ूंगा; जिम ट्रेनर बीवी को छोड़ नहीं सकता
यूपी के शामली में मुस्लिम महिला जिम ट्रेनर से निकाह कर इस्लाम अपनाने वाले आयुष मलिक सोमवार को मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा, इस्लाम अपनाने के लिए मुझ पर किसी ने दबाव नहीं डाला। मैंने अपनी इच्छा से इस्लाम स्वीकार किया है। मां-पिता पूजा-पाठ करें, मैं 5 वक्त की नमाज अदा करता हूं। दाढ़ी भी इसीलिए रखी है, क्योंकि ये हमारे इस्लाम में सुन्नत है।
आयुष ने यह भी दावा किया कि वे करीब 13 सालों से इस्लाम और मुस्लिम रीति-रिवाजों को समझ रहे थे। चार साल पहले जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी से इस्लामिक रीति रिवाज से निकाह किया था। परिवार से ये बात इसलिए छिपाई, क्योंकि उनकी बहन की शादी नहीं हुई थी। अब मैं मुसलमान हूं। दोनों ही परिवार मेरे अपने हैं। मैं किसी को नहीं छोडूंगा।
आयुष के पिता देवराज मलिक शामली के बड़े दवा कारोबारी हैं। उनकी करोड़ों की संपत्ति है। उन्होंने शनिवार को जिम ट्रेनर, उसके परिवार के 6 सदस्यों और 3 मौलवियों पर जबरन धर्म परिवर्तन कराने और अवैध वसूली की FIR दर्ज कराई थी। पुलिस ने चांदनी और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
अब पढ़िए आयुष मलिक उर्फ रहमान की पूरी बात…
आयुष मलिक उर्फ रहमान ने कहा, मैं किसी से प्रभावित नहीं हूं। ऐसा नहीं है कि 24 घंटे में ये ख्याल आया। कहीं कलमा पढ़कर मैं मुस्लिम बन गया। इस्लाम के बारे में स्कूल के टाइम से ही सीख रहा था। 2012–13 के आसपास और तेजी से सीखने लगा। पाकिस्तान के इस्लामिक इंफ्लुएंसर डॉक्टर इसरार अहमद के वीडियो देखे। मेरा खुद का रुझान बढ़ा।
मैं बचपन से ही मंदिर नहीं जाता था, क्योंकि इस्लाम में रुझान था। अब 5 वक्त की नमाज अदा करता हूं। दाढ़ी भी इसीलिए रखी है, क्योंकि ये हमारे इस्लाम में सुन्नत है। हमारे सारे नबी ने भी दाढ़ी रखी थी।
इसके बाद चांदनी से मुलाकात हुई। मैंने 4 साल पहले इस्लाम को पूरी शिद्दत से कबूल करके फिर चांदनी से पूरे इस्लामिक रीति–रिवाज से निकाह किया। मुझे चांदनी या उसके परिवार ने इस्लाम अपनाने को नहीं कहा। मेरी खुद की अंडरस्टैंडिंग थी।
मेरा परिवार नाराज है कि हिंदू धर्म को छोड़कर मुस्लिम धर्म क्यों अपनाया। पर ये सिर्फ और सिर्फ मेरा फैसला था। हालांकि मैंने झूठ नहीं बोला, बस सोचा था कि वक्त के साथ–साथ धीरे–धीरे बाद में बता दूंगा। लेकिन परिवार को पहले ही पता चल गया। फरवरी में मैंने खुलकर ऐलान कर दिया कि मैंने इस्लाम कबूल कर लिया है। आयुष ने कहा- इस्लाम में झूठ बोलना गुनाह है, पर इस्लाम इस बात की इजाजत देता है कि माहौल ठीक ना हो, जान पर बन रही हो या किसी का दिल दुख रहा हो तो बात छिपाई जा सकती है। एक और वजह ये थी कि मेरी बहन की तब तक शादी नहीं हुई थी। चांदनी के परिवार का भी जोर था कि बेटी की जल्दी शादी करनी है, इसलिए मैंने अपने परिवार से छिपाते हुए इस्लाम कबूल किया और चांदनी से निकाह किया।मेरा परिवार भले ही मुझे कबूल न करे, पर मेरे लिए मेरा और चांदनी दोनों के परिवार अपने हैं। मैं किसी को नहीं छोड़ सकता। मेरे परिवार ने चांदनी और उसके पिता पर जो इल्जाम लगाए हैं, मैं उनके साथ पूरे सच के साथ खड़ा होउंगा। मेरी मां मुझे आज भी बचपन के नाम लवकुश से ही बुलाती है, मैं भी जोर नहीं देता। मां हैं, जो मन है, बुलाएं।
फिलहाल अब मैं मुस्लिम ही हूं और खुश हूं। आगे कभी दोबारा धर्म नहीं बदलूंगा, कोई कितना भी जोर दे। इस्लाम भी इस बात की इजाजत नहीं देता।