22/07/2026
लिखना अक्सर शब्दों का जाल नहीं होता,बल्कि उन चुप्पियों की आवाज़ होता है जो बाहर निकलने का रास्ता ढूँढ़ रही होती हैं कभी डायरी के पन्नों में,कभी किसी पोस्ट में,तो कभी किसी कविता में हम बस अलग-अलग तरीकों से अपने टूटे हुए हिस्सों को फिर से जोड़ने की कोशिश करते हैं...!