16/07/2026
*तीसरा बच्चा होने पर नहीं लड़ सकते पंचायत चुनाव, सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, कहा बदल गया है देश*
✍️ *पंचायत* और स्थानीय निकाय चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों पर चुनाव लड़ने की रोक संबंधी नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देश की जनसंख्या और प्रजनन दर (फर्टिलिटी रेट) में बड़ा बदलाव आ चुका है, इसलिए इस नीति की मौजूदा समय में उपयोगिता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ महाराष्ट्र की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव इंगले की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इंगले को तीसरा बच्चा होने के आधार पर महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(जे-1) के तहत अयोग्य घोषित किया गया था। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने वर्ष 2003 के जावेद बनाम हरियाणा राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय की परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं। अदालत ने कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर अब करीब 1.7 रह गई है और कई राज्यों में यह प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level) से भी नीचे पहुंच चुकी है। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से बनाई गई इस नीति को जारी रखने का औचित्य जांचने की जरूरत है।
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान परिस्थितियों में यह नीति अपने मूल उद्देश्य को काफी हद तक पूरा कर चुकी है और कई मामलों में चुनावी प्रतिद्वंद्वी इसका इस्तेमाल विरोधियों को अयोग्य ठहराने के हथियार के रूप में कर रहे हैं। अदालत ने इस मुद्दे पर विस्तृत सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता रुक्मिणी बोबडे को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है।
मामले की पृष्ठभूमि में बुलढाणा जिले की काकोडा ग्राम पंचायत की तत्कालीन सरपंच मंगला इंगले को तीसरे बच्चे के जन्म के आरोप के बाद अक्टूबर 2024 में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। उनकी अपील अतिरिक्त आयुक्त और बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी खारिज कर दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट इस नियम की संवैधानिक वैधता और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार करेगा।