11/09/2025
‼ *क्या मैं शरीर ही हूँ-उससे भिन्न नहीं? (भाग 3)* ‼
‼ *शांतिकुंज ऋषि चिंतन* ‼
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
🌞 *11 September, 2025 Thursday* 🌞
🌻 *११ सितंबर, २०२५ गुरुवार* 🌻
*!! आश्विन माह, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी तिथि, संवत २०८२ !!*
‼ *सूर्योदय 6:03 AM, सूर्यास्त 6:23 PM*‼
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
*🔷 मौत के जरा से आघात से मेरा स्वरूप यह कैसा हो गया। अब तो मेरी मृत काया-हिलती डुलती भी नहीं-बोलती, सोचती भी नहीं? अब तो उसके कुछ अरमान भी नहीं है। हाय, यह कैसी मलीन, दयनीय, घिनौनी बनी जमीन पर लुढ़क रही है। अब तो यह पलंग बिस्तर पर सोने तक का अधिकार खो बैठी। कुशाओं बान से ढकी-गोबर से लिपी गीली भूमि पर यह पड़ी है। अब कोई चिकित्सक भी इसका इलाज करने को तैयार नहीं। कोई बेटा, पोता गोदी में नहीं आता।*
*यम गायत्री, Yam Gayatri Mantra | मंत्र का सदैव जाप करने वाले प्राणियों में मृत्यु का भय नहीं रहता है*
https://youtu.be/LVjSolgsYrE?si=elqYMRpjCgxvbICo
*🔶 पत्नी छाती तो कूटती है पर साथ सोने से डरती है। मेरा पैसा-मेरा वैभव-मेरा सम्मान हाय रे! सब छिन गया-हार से मैं बुरी तरह लुट गया। मेरे कहलाने वाले लोग ही-मेरा सब कुछ छीन कर मुझे इस दुर्गति के साथ घर से निकाल रहें हैं। क्या यही अपनी दुर्दशा कराने के लिए मैं जन्मा? यही है क्या मेरा अन्त-यही था मेरा लक्ष्य, यही है क्या मेरी उपलब्धि। जिसके लिए कितने पुरुषार्थ किये थे-क्या उसका निष्कर्ष यही है? यही हूँ मैं-जो मुर्दा बना पड़ा हूँ-और लकड़ियों की चिता में जल कर अगले ही क्षण अपना अस्तित्व सदा के लिए खोने जा रहा हूँ।*
> 👉 *शांतिकुंज हरिद्वार के (अधिकारिक) Official WhatsApp Channel को Follow करें*
➡️ https://whatsapp.com/channel/0029VaBQpZm6hENhqlhg453J
🔷 *लो अब पहुँच गया मैं चिता पर। लो, मेरा कोमल मखमल जैसा शरीर-जिसे सुन्दर, सुसज्जित, सुगन्धित बनाने के लिए घण्टों शृंगार किया करता था, अब आ गया अपनी असली जगह पर। लकड़ियों का ढेर-उसके बीच दबाया हुआ मैं। लो यह लगी आग। लो, अब मैं जला। अरे मुझे जलाओ मत। इन खूबसूरत, हड्डियों में मैं अभी और रहना चाहता हूँ, मेरे अरमान बहुत हैं, इच्छायें तो हजार में से एक भी पूरी नहीं हुई। मुझे उपार्जित सम्पदाओं से अलग मत करो, प्रियजनों का वियोग मुझे सहन नहीं। इस काया को जरा सा कष्ट होता था तो चिकित्सा, उपचार मैं बहुत कुछ करता था। इस काया को इस निर्दयतापूर्वक मत जलाओ*
*.... क्रमशः जारी*
*✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य*
*📖 अखण्ड ज्योति मार्च 1972 पृष्ठ 4*
http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1972/March/v1.4