01/07/2026
ALS new's
Today breaking new's
आज के इस आधुनिक युग में जब अपराधी अपने चेहरे पर मुखौटा लगा लेते हैं या खराब कैमरा क्वालिटी के कारण बच निकलने की कोशिश करते हैं, तब विज्ञान एक नया रास्ता दिखाता है। मैं बात कर रहा हूँ "गेट एनालिसिस" (Gait Analysis यानी चाल का विश्लेषण) तकनीक की, जो आजकल फॉरेंसिक जांच में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। हाल ही में दिल्ली पुलिस द्वारा केतन अग्रवाल मर्डर केस में आरोपी चेतन चौधरी की पहचान के लिए इसी अत्याधुनिक तरीके का सहारा लिया जा रहा है।
यह तकनीक इस सिद्धांत पर काम करती है कि हर इंसान के चलने का एक अनूठा वैज्ञानिक पैटर्न होता है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से व्यक्ति के कदम की लंबाई, कदमों की गति, शरीर की मुद्रा (posture), हाथों का हिलना, कूल्हों की गति और घुटनों के एंगल जैसे 20 से ज्यादा अलग-अलग पैरामीटर्स का बारीकी से अध्ययन किया जाता है।
हैरानी की बात यह है कि AI आधारित यह गेट एनालिसिस 90% से ज्यादा सटीकता दे सकता है। अगर जांच में 80% से ज्यादा मैचिंग मिल जाती है, तो कानून की नजर में इसे एक बेहद मजबूत और अकाट्य फॉरेंसिक साक्ष्य माना जाता है।
भारत सरकार भी देश के फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। यही वजह है कि साल 2025-26 में कई राज्यों में अत्याधुनिक AI आधारित फॉरेंसिक लैब्स की स्थापना की जा रही है। अब इस क्रांतिकारी तकनीक को NISER, CFSL (Central Forensic Science Laboratory) और देश की प्रमुख पुलिस अकादमियों के ट्रेनिंग सिलेबस में भी शामिल किया जा रहा है।