30/05/2026
चार दीवारों के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं बेटियाँ...
जिस घर को सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है, आज वहीं उनकी प्राइवेसी और सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। अपने ही फ्लैट में रहने वाली लड़कियों का चुपके से वीडियो बनाना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज की घटिया मानसिकता का आईना है। समस्या कपड़ों में नहीं, बल्कि उन नज़रों में है जो दूसरों की निजी ज़िंदगी में झाँकने का मौका ढूंढती हैं।
हर लड़की को अपने घर, अपने कमरे और अपनी बालकनी में बिना किसी डर के जीने का अधिकार है। अब वक्त आ गया है कि ऐसी हरकतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और लोगों की सोच बदले।