13/10/2026
एससी/एसटी अत्याचार के मामलों में पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाएं अधिकारी: एसडीएम सतीन्द्र सिवाच
अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की नियमित निगरानी करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई के दिए निर्देश
#बराड़ा
उपमंडल स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की कैलेंडर वर्ष 2026 की त्रैमासिक बैठक सोमवार को एसडीएम बराड़ा सतीन्द्र सिवाच की अध्यक्षता में उनके कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 तथा संशोधित अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन, पीड़ितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने और मामलों की प्रगति की समीक्षा की गई।
एसडीएम सतीन्द्र सिवाच ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में नियमानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पीड़ितों को सरकार द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार आर्थिक सहायता समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करवाई जाए, ताकि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
बैठक में अधिकारियों को अवगत करवाया गया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत विभिन्न प्रकार के अपराधों से प्रभावित पात्र पीड़ितों को अपराध की प्रकृति एवं निर्धारित नियमों के अनुसार 85 हजार रुपये से लेकर 8 लाख 25 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। इसमें भूमि पर अनाधिकृत कब्जा, हत्या, डकैती, बलात्कार तथा अन्य गंभीर अपराधों से संबंधित मामले शामिल हो सकते हैं। इस अधिनियम के अंतर्गत सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित मामले में नियमानुसार एफआईआर दर्ज होना आवश्यक है।
बैठक में बताया गया कि पात्र पीड़ितों को आर्थिक सहायता निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय किस्त में प्रदान की जाती है। सहायता की किस्तें एफआईआर दर्ज होने, आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने तथा मामले में अंतिम निर्णय जैसी निर्धारित प्रक्रियाओं से जुड़ी होती हैं। इसका उद्देश्य पीड़ितों को न्याय मिलने तक आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध करवाना है।
पुलिस अधीक्षक, अंबाला की रिपोर्ट के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक उपमंडल बराड़ा क्षेत्र में इस अधिनियम के तहत 04 मामलें दर्ज किए गए है। बैठक में संबंधित मामलों में पीड़ित को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की स्थिति की समीक्षा की गई।
एसडीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जाए और कार्रवाई में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी न होने दी जाए। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और पात्र पीड़ितों को उनके अधिकारों एवं सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध करवाएं, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे।
बैठक में डीएसपी बराड़ा अभिलक्ष जोशी, तहसील कल्याण अधिकारी ज्योति अंटाल, उपमंडल स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति के सदस्य विवेक शर्मा, शैलेंद्र सिंह लिपिक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।