02/01/2026
“मेहनत, सिमरण और सुकून – राघव की कहानी
कभी नशा उसकी पहचान था,
आज सिमरण उसकी साँस है।
जहाँ बोतल ने सब छीन लिया था,
वहीं सत्संग ने सब लौटा दिया।
राघव ने शराब नहीं छोड़ी,
उसने सहारा बदल लिया —
निरंकार का।
धन, शोहरत नहीं मिली…
पर जो मिला,
वो किसी कीमत पर नहीं मिलता —
सुकून। 🙏
धन निरंकार जी
“Is kahani ko share karein, shayad kisi ko raasta mil jaye 🙏”