Rimku Singh

Rimku Singh बाबा भोलेनाथ का भक्त, बाबा राम सा पीर का भक्त!!

03/03/2026

रंगो के त्यौहार होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🎉🎉🎉🎉🎉

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09/01/2026

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सम्राट पृथ्वीराज चौहान तृतीय का जीवन शौर्य, प्रेम और बलिदान की एक अद्भुत गाथा है। उन्हें 'अंतिम हिंदू सम्राट' और 'राय पिथौरा' के नाम से भी जाना जाता है।

अक्सर हम सम्राट पृथ्वीराज चौहान की वीरता के किस्से सुनते हैं, लेकिन उनके परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में कम चर्चा होती है। इस चित्र के माध्यम से जानिए उनके माता-पिता, भाई-बहन और संतान के बारे में।

👉 राज्याभिषेक: पिता राजा सोमेश्वर की मृत्यु के बाद, मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने अजमेर की गद्दी संभाली। उनकी माता, रानी कर्पूरी देवी ने शुरू में शासन चलाने में उनकी बहुत मदद की।

👉 कौशल: कहा जाता है कि पृथ्वीराज बचपन से ही बहुत प्रतिभाशाली थे। वे 6 भाषाएं जानते थे और 'शब्दभेदी बाण' (आंखों पर पट्टी बांधकर केवल आवाज़ सुनकर सटीक निशाना लगाना) चलाने में माहिर थे।

⚔️👉 तराइन का प्रथम युद्ध (1191): पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को बुरी तरह हराया। गौरी घायल होकर भाग गया। दयालुता दिखाते हुए पृथ्वीराज ने भागते हुए दुश्मन का पीछा नहीं किया (जिसे इतिहासकार कभी-कभी एक रणनीतिक चूक भी मानते हैं)।

⚔️👉 तराइन का द्वितीय युद्ध (1192): मोहम्मद गौरी पूरी तैयारी और छल-कपट के साथ वापस आया। इस बार पृथ्वीराज चौहान की हार हुई और उन्हें बंदी बना लिया गया।

🏹 अंत और 'शब्दभेदी बाण' की किंवदंती

ऐतिहासिक मत: हार के कुछ समय बाद उन्हें मृत्युदंड दे दिया गया, गौरी उन्हें बंदी बनाकर अपने देश ले गया और उनकी आंखें फोड़ दीं। वहां एक कला प्रदर्शन के दौरान, पृथ्वीराज के मित्र और दरबारी कवि चंद्रबरदाई ने एक दोहा पढ़ा:

"चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान॥"

इस संकेत को समझकर अंधे पृथ्वीराज ने आवाज़ की दिशा में तीर चलाया और गौरी को मार गिराया। इसके बाद पकड़े जाने और अपमान से बचने के लिए उन्होंने और चंद्रबरदाई ने एक-दूसरे को मार दिया।

पृथ्वीराज चौहान आज भी भारतीय जनमानस में स्वाभिमान और वीरता के प्रतीक बने हुए हैं।

09/01/2026

इतिहास गवाह है, इस पावन धरा पर जब-जब संकट के बादल छाए, क्षत्रिय धर्म ने अपनी तलवार से भारतवर्ष की रक्षा की। ⚔️🚩

चाहे अरब हों, तुर्क हों, मुगल हों या फिर अंग्रेज... लूटने के इरादे से आने वाले हर आक्रमणकारी को अगर किसी ने सबसे पहले और सबसे अंत तक चुनौती दी, तो वह राजपूत थे। यह चित्र मात्र एक तस्वीर नहीं, बल्कि सदियों के संघर्ष और बलिदान की गाथा है।

जब सब घुटने टेक देते थे, तब भी राजपूताने की तलवारें स्वाभिमान के लिए चमकती थीं।

दुश्मन बदलते रहे, दौर बदलते रहे, लेकिन भारत की रक्षा में खड़ी 'राजपूतों की दीवार' कभी नहीं टूटी। 💪🇮🇳

अरब से लेकर अंग्रेजों तक... हर आक्रमण का सामना डटकर किया। यह मिट्टी ऋणी है उन वीरों की। ⚔️

आंधियां जुल्म की चलती रहीं सदियों तक,
मगर वो "दीपक" थे जो तूफानों में भी जलते रहे।
अरब, तुर्क, मुगल और फिरंगी सब आए लूटने,
मगर एक "राजपूत" थे जो हर बार उनसे लड़ते रहे।

भारत मां की रक्षा के लिए जिन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया, उन वीरों को नमन। 🙏🚩

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Sonaram Kumawat, Hemraj Choudhary, Lalsingh Rawat, Ranjee...
24/12/2025

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Sonaram Kumawat, Hemraj Choudhary, Lalsingh Rawat, Ranjeet Singh Rawat, Lalbahadur Bharatiy, Prakash Kathat, Sukhdev Saini, Rawat Abhishek Singh Pokhriya, Raghunandan Mahto, Satish Bariwal, ओम प्रकाश सिंह रावत, Mah Khan, Kamal Rawat, Rahul Ansari, Ganapat Ji, Bablu Chouhan, त्रिलोकी यादव

20/12/2025

हम राजपूतों की दोस्ती भी तलवार जैसी होती है,
न झुकती है, न टूटती है, बस वक़्त आने पर चमकती है।

जय भवानी ⚔️

20/12/2025

जय पृथ्वीराज चौहान 🏹
जय महाराणा प्रताप ⚔️

20/12/2025

👉 एकता का असली अर्थ :- "हाथ खींचना, टांग नहीं"
जैसा कि तस्वीर में दिखाया गया है, असली एकता वही है जब ऊपर पहुँचा हुआ व्यक्ति नीचे खड़े व्यक्ति का हाथ पकड़कर उसे भी अपने स्तर पर ले आए। इतिहास गवाह है कि जब-जब राजपूत समाज ने आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे का साथ दिया है, उन्होंने असंभव को संभव किया है। वर्तमान समय में एक-दूसरे की टांग खींचने के बजाय हाथ खींचकर आगे बढ़ाने की सोच ही समाज को मजबूत बनाएगी।

👉 शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण :- आज के दौर में तलवार से ज्यादा 'कलम' और 'अर्थव्यवस्था' (Economy) में ताकत है। राजपूत एकता का लक्ष्य केवल भीड़ जमा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह होना चाहिए कि समाज का हर बच्चा शिक्षित हो।
युवाओं को व्यापार और प्रशासनिक सेवाओं (IAS/IPS) में जाने के लिए प्रेरित किया जाए।
सक्षम लोग आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करें।

👉 सामाजिक कुरीतियों का त्याग :- एकता का अर्थ समाज सुधार भी है। दहेज प्रथा, मृत्यु भोज और दिखावे में फिजूलखर्ची जैसी चीजों ने समाज को आर्थिक रूप से कमजोर किया है। "राजपूताना सोच" का असली मतलब है इन कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होना और एक सादगीपूर्ण लेकिन गौरवशाली जीवन जीना।

👉 अहंकार (Ego) से दूरी :- इतिहास गवाह है कि कई बार आपसी अहंकार और छोटी-छोटी रंजिशों के कारण बड़े नुकसान हुए हैं। आज जरूरत है कि व्यक्तिगत अहंकार को त्यागकर 'समाज सर्वोपरि' की भावना रखी जाए। क्षमा करना और साथ लेकर चलना ही असली शूरवीरता है।

👉 संरक्षण की परंपरा :- राजपूतों का इतिहास हमेशा से 'रक्षक' का रहा है। राजपूत एकता का उद्देश्य केवल अपने समाज का भला करना नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र और समाज के हर कमजोर वर्ग की रक्षा और सेवा करना होना चाहिए। यही असली 'क्षत्रिय धर्म' है।

जो - जो भाई एकता चाहते है वो पोस्ट को शेयर जरूर करे 🙏

20/12/2025

जय भवानी ⚔️
जय राजपूताना 🔥

18/12/2025

🚩जय बाबा री🚩

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