26/05/2026
सुबह से ही घर में हल्की-हल्की भागदौड़ थी। पूजा बार-बार घड़ी देख रही थी। आज उसके देवर रोहित कई महीनों बाद शहर से घर आने वाला था। पूरे परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन पूजा के चेहरे पर अलग ही चमक थी। वह रसोई का काम जल्दी-जल्दी निपटा रही थी और फिर कमरे में जाकर अलमारी खोलकर साड़ियाँ देखने लगी।
“कौन-सी पहनूँ?” उसने खुद से पूछा।
तभी उसकी सास कमरे में आईं और मुस्कुराकर बोलीं, “अरे बहू, इतना सजने-संवरने की क्या जरूरत है?”
पूजा हल्का सा शर्मा गई। “माँजी, इतने दिनों बाद घर आ रहा है, अच्छा तो लगना चाहिए ना।”
असल में रोहित सिर्फ देवर नहीं, बल्कि पूजा के लिए छोटे भाई जैसा था। शादी के बाद जब पूजा पहली बार इस घर में आई थी, तब वही था जिसने उसे हर मुश्किल में हँसाया था। जब कभी उसे मायके की याद आती, रोहित मजाक करके उसका मन हल्का कर देता। इसलिए उसके आने की खबर से पूजा सच में खुश थी।
पूजा ने हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहनी, बालों में छोटी-सी गजरा लगाया और शीशे के सामने खड़ी होकर खुद को देखने लगी। तभी उसका पति अमित कमरे में आया और हँसते हुए बोला, “वाह! लगता है मेरे लिए तो तुम कभी इतनी तैयार नहीं हुई।”
पूजा मुस्कुरा दी। “आप भी ना, बस मजाक करते रहिए।”
अमित ने प्यार से कहा, “अच्छा है, घर में फिर से रौनक आ जाएगी। रोहित के बिना घर कितना सूना लगता था।”
दोपहर होते-होते दरवाजे की घंटी बजी। पूजा सबसे पहले दरवाजे की तरफ भागी। सामने रोहित खड़ा था, हाथ में बैग और चेहरे पर वही पुरानी मुस्कान।
“भाभी!” उसने खुश होकर कहा।
“आ गए तुम!” पूजा की आँखों में खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
रोहित ने घर में कदम रखा तो सास-ससुर भी खुश हो गए। घर का माहौल पलभर में हँसी से भर गया। पूजा तुरंत उसके लिए पानी और खाना लेकर आई।
खाना खाते हुए रोहित बोला, “भाभी, आपके हाथ का खाना बहुत मिस किया मैंने।”
पूजा हँसते हुए बोली, “बस-बस, ज्यादा तारीफ मत करो।”
शाम को पूरा परिवार छत पर बैठा बातें कर रहा था। रोहित अपने शहर के किस्से सुना रहा था और सब लोग हँस रहे थे। अमित ने अचानक कहा, “देखो ना, रोहित के आने से पूजा कितनी खुश है।”
पूजा ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “परिवार में अपने लोग हों तो घर घर जैसा लगता है।”
उस रात घर में सचमुच अलग ही सुकून था। रिश्तों की गर्माहट, अपनापन और छोटी-छोटी खुशियाँ ही तो परिवार को खास बनाती हैं।