23/08/2026
ये ऑटो रिक्शा सिर्फ एक गाड़ी नहीं है,
किसी बाप की सुबह है, किसी माँ की दवा है, किसी बच्चे की स्कूल फीस है।
आज मुंबई में भाषा के नाम पर इसी ऑटो वाले को परेशान किया जा रहा है...
अरे साहब, वो मराठी नहीं बोल पाया तो क्या हुआ,
उसने तो इसी मुंबई को दिन-रात चलाया है। बारिश में, गर्मी में, लॉकडाउन में।
वो हिंदी बोले या मराठी, गुजराती बोले या भोजपुरी —
जब भूख लगती है तो भाषा नहीं, मेहनत बोलती है।
इस ऑटो वाले का पूरा परिवार इसी 3 पहियों पर टिका है।
इसे रोकना किसी एक आदमी को नहीं, पूरे परिवार की रोटी को रोकना है।
ये हमारे देश के लिए दुर्भाग्य है कि मेहनत करने वाला ही सबसे ज्यादा परेशान है।
मुंबई सबकी है। भारत सबका है।
भाषा से नहीं, इंसानियत से पहचानो। 🇮🇳❤️
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