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21/04/2020

इश्क़ का हर तोहफा कुबूल है,
ये जानते हुए भी की ये मर्ज़ "कंबख्त" बड़ा ऊल जुलूल है

Hashtag इस lockdown में मन में आया सब किया जा रहा है, सीखा जा रहा है और भाई उस मन के किये को जादू से यादगार बना रहें हैं,

शब्द: मेरे
संगीत और आवाज़: भाई

19/07/2016

हैशटैग "बाप"..
हैशटैग "जवानी"..
हैशटैग "नौकरी".
हैशटैग "सरकारी"
हैशटैग "शौक"...
हैशटैग "जबरा"...
हैशटैग "ज़िन्दगी"

मैं "बाप" हूँ.......एक माध्यम वर्गीय सरकारी "बाप"

मैं पिछले 25 सालों से "बाप" हूँ और 28 सालों से "पति"
समय बीतता गया ...और समय के साथ बीत रहा "मैं"।

मुझे फिल्में देखने का बहोत शौक था...पर अब नही देखता......असल में चाह के भी देख नही पाता....कारण बहोत से हैं...ज़िम्मेदारियाँ,भाग दौड़...पर सबसे बड़ा कारण कुछ और ही है...कारण ये की मैं जब पहली बार बाप बना था तब शाहरुख़ ख़ान फ़िल्मी दुनिया में उभर रहा था...मुझे खूब पसंद था वो...पर धीरे धीरे मुझे उससे जलन होने लगी...जलन क्यूँ?????? इसलिए की हम दोनों करीब करीब एक ही उम्र के हैं। हममें अंतर ये है कि वो उमर के साथ बढ़ता गया और मैं उमर के साथ दबता चला गया,अनेक ज़िम्मेदारियों के बोझ तले....उम्र के साथ उसका रुपया-पैसा-इज़्ज़त-शौहरत बढ़ी। मेरी स्थीति जस की तस रही।एक उप्लभदी ये मिली की "क्लर्क" से "केशियर" प्रमोट हो गया...पर उस प्रमोशन के चक्कर में सिर के पूरे बाल सफेद हो गए...तमाम बीमारियों ने शरीर में घर करना शुरू कर दिया,कमर 30 से बढ़ के 38 हो गयी..बहोत कुछ हो गया और बढ़ते हर इंच के साथ मेरी जलन बढ़ती गयी....

ख़ैर, बात शाहरुख़ ख़ान की नही मेरी है...
मैं "बाप" हूँ.
आज मैंने बाप होने का फ़र्ज़ निभाया है....आज मैंने अपनी "बेटी" की शादी की है।
खूब धमाल हुआ...पिछले कुछ दिनों मेंमेहमान ,रिश्तेदार,पडोसी,ननौकर-चाकर,.सबने जम के मौज की...और इन सबके बीच "मैं"
सबकी ज़रुरत, काम ज़्यादा की रखवाली करता...एक चमड़े के बैग में 10,20,50,100,500,1000 के नोट भरे..हर ज़रूर्स्ट के हिसाब से नोट निकाल निकाल के देता "मैं"...

"बरात" आयी.
"बाराती"आये...
"वरमाला" हुई..
खाना पीना शुरू हुआ...मैं एक कोने में खड़ा ये सब देखता रहा...लोग काउंटर पे खडे हर एक आइटम के लिए एक नया प्लेट उठा रहे थेl..इधर हर प्लेट के साथ मेरे 500 रूपये जा रहे थे..मैंने कैटरर को समझाने की कोशिश की पर बेटे ने झिड़क दिया..की बाराती क्या सोचेंगे???.सबने खूब खाया पीया,डकार मारी और चले गए ...मैंने सबसे पर्सनली पुछा "खाना खाया"?????पर मुझसे किसी ने नही पुछा... क्यों मैं "लड़की" का बाप हूँ...सब मुझे देखना है..सबकी ज़रुरत मेरी ज़ोम्मेदारी है..

शादी के मंडप में शादी पूरे रीती रिवाज से शुरू हुईi...हर मंत्र पे बैग में से 51/101 निकाल निकाल के देता हुआ मैं...
लड़के के माँ-बाप,भाई-बहन, चाचा-चाची, मामा-मामी,बुआ-मौसी,सबको कुछ माँ कुछ दिया।।।नेग के तौर पे....ये सब दहेज ना होकर भी एक ज़िम्मेदारी है.....क्योंकि लड़की हमारे है.

कन्यादान हुआ..आँखें भर आयीं..जिस बेटी को पाल-पोस के बाद किआ वो एक पल में दूसरे के घर की जो गयी..उसका अपना परिवार होगा अब..."ससुर" "बाप"( नया) होगा..और "सास" "माँ"(नयी)
और हम मेहमान.......एक बेटी की शादी के बाद माँ बाप मिल ही कितना पाते हैं.......
विदाई की रस्म का समय आया... सजी हुई नयी चमचमाती कार आयी
जिसको मैंने अपने प्रोविडेंट फण्ड में जमा किये हुए रुपयों से खरीदा था......
सब रोये।।गले मिले....

मैं कोने में खड़ा बस उस कार को देख रहा था.....
लाल रंग की...हुंडई की
मुझे कार बहोत पसंद है...सोचा था कभी अपने लिए खरीदूंगा एक अच्छी सी कार...पर खरीद नहीं पाया.......
बेटी को गाड़ी में बिठाया और उस कार को धीरे से धक्का दिया....रस्म अदायगी के तौर पे..
बेटी तो जा ही रही थी......पर साथ ही मेरी आँखों के सामने मेरे जीवन भर की कमाई जो पाई पाई करके बचायी ... वो भी जा रही थी..6 लाख़ की वो लाल रंग की हुंडई की कार।

सब लोग तीतर-बितर हुए..मैं थोड़े सुकून की तलाश में घर के अंदर गया.....थक के बिस्तर पे पड़ा......वो चमड़े का बैग अभी भी कलाई में फसां था....मैंने थकी हाथों से उस बैग को खोला...अब उस बैग में 50 100 500 100 के नोटों की जगह लॉन..झालर...खाने।।मंडप....हार-फूल वालों का बकाया बिल भरा था ...मैं और थक गया...और वहीँ पसर गया..

सुबह नींद खुली..पता चला मैं जहाँ रात में थक के पड़ा था वहीँ सो गया था..... देखा नाते रिश्तेदार चाय पीते शादी में होने वालों घटनाओं और लड़के वालों को लेके गप्पे मार रहे थे....और उनकी बच्चे तेज़ आवाज़ में टीवी देख रहे थे...

मेरा ध्यान उधर गया.....
देखा "शाहरुख़ खान" "जबरा" नाम के गाने पे लाल किला के सामने अपने घने काले बालों पे हाँथ फेरता उछल उछल के नाच रहा था... और घर के बच्चे उसकी नक़ल कर रहे थे..

मैं फट से उठा....ग़ुस्से भरी उदासी से चमड़े के बैग को देखा जल्दी -जल्दी दफ्तर जाने की तैयारी करने लगा...उधर शाहरुख़ ख़ान "फैन" को हिट करने में लगा था...इधर मैं चमड़े के बैग में पड़े "बिल" को "निल" करने की जद्दोज़हद शुरू करने जा रहा था......

मैं अचानक समय के साथ बूढ़ा हो चूका था.....

15/07/2016

Dear #सलमानखान #....

# देखी...
इतना समझ आ गया की "ईद" का "चाँद" और सलमान खान माने तुम्हारा ये जो कॉम्बिनेशन चल रहा है न वो बड़ा "डेडली" है.....
इस बार तो जो वो मिटटी से जुड़ा हुआ... इंट्रोडक्यूटिओं प्लान किआ गया है तुम्हारे लिए वो दिल को छु गया एकदम...बहोत दिनों बाद लगा की इस देश में "हीरो" और "हीरो" वाली फिल्में बन सकते /सकती हैं...जब तक "तुम" हो...

तुम अकेले हीरो हो जो MULTIPLEX जो मल्टीप्लेक्स नाम के सिनेमाहॉल में लफंदरगिरी करवा सकता है....तुम्हारे परदे पे आते ही जो सीटियां ..तालियां बजती हैं..वो रोंगटे खड़े कर देंती हैं...

तुम अकेले ऐसे हीरो हो ...जिसके परदे पे आते ही...कई शादी-शुदा औरतें लंबी सी "आह" भरती हैं .....अंग्रेज़ी -हिंदी दोनों में....और कमाल की बात देखो बगल में बैठे पति/हस्बैंड मुस्कुराते हैं....उनको कतई बुरा नहीं लगता....वो मन ही मन तुमको देख के हलकी जलन के साथ खुश होते हैं...पति/हस्बैंड शायद किसी कोने में मन मसोस के रह जाएँ ...पर आज का हर "बॉयफ्रेंड" तुम जैसे बनना चाहता है..
इस बार तो जो पलटी खा के मूछ पे ताव मारे हो...एक नया स्टाइल दे गए हो...मतलब सोच रहा हूँ कितनी चिकने चेहरों पे मूछों को फसल लहलहाने वाली है इस बार...

सबसे अनोखी बात तुमने कमाल की "एक्टिंग"करी है इस बार....इस बार वो सलमान खान दिखा है..जो हर मामले में सबको टक्कर दे सकता है....."सबको".....बढ़ती उम्र के साथ तुम इतने गहरे होते जा रहे हो..की नापना नामुमकिन सा हो रहा...ये पक्का है कि मिटटी का लोन्धा बन के जाते होंगे इस फिल्म की शूटिंग पे..तभी निर्देशक ने खुल के अपने विज़न में पिरोया है "सुल्तान" और बाकी सभी किरदारों को....
सभी को.....

स्लो रोमांटिक गाने पे जो अचानक फिरकी लेके घूम के पैर पे पैर चढ़ा के नागिन डांस वाले पोज़ में आके जो बिलकुल हल्के से कमर उठा के हिलाये हो ना...मतलब "गज़ब" किये हो एकदम....देखना कितनी लोगों को "स्लिप डिस्क" होने वाला है इस स्टाइल के प्रैक्टिस के चलते....देखते जाना बस...ये वाला थोड़ा मुश्किल है....पर तुमने किया है तो सबका करना ज़रूरी है.....

इस बार सिर्फ लौंडे लपाड़े ही नहीं.अधेड़ उम्र के मर्द सब मिल के.. जिम जाने वाले हैं...
और हाँ...
पतंगबाज़ी में अब पतंग लूटने का अलग कम्पटीशन हुआ करेगा.....नेशनल/स्टेट लेवल पे ना सही...गली मोहल्ले के लेवल पे पक्का...

पहलवानी और अखाड़े वाला जो ट्रैक है..वो दिल को इमोशनल कर देता है..देखते ही बनारस के महाबीर मंदिर के बगल वाले अखाड़े की याद आ गयी....उन पहलवानों की याद आ गयी जो अखाड़े में अपना पसीना बहा के मिट्टी गीली करते थे...और मैं भौचक्का सा उन्हें देखता रहता था...

वो अखाड़े से मिट्टी उठा के पोटली में भरने वाला सीन...जब तुम धीरे से कोच साहेब को देख भर के(हल्का सा एकदम)...और मिट्टी पोटली में भरते हो...दिल को छु जाता हज.

अखाड़े की मिट्टी अपनेआप में एक कैरक्टर है पिक्चर में...
जब अनुष्का शर्मा फाइनल फाइट के समय तुम्हारा इंतज़ार कर रही है..उधर तुम लड़ रहे हो...और बेहोश से हो गए हो..अचानक जो धीरे से मिट्टी गिरी और फ़्लैश के साथ रुकी...और मिटटी का गिरना रुकते ही जो तुमने आँखें खोलीं...अपने आप मुँह से निकला "वाह".....

वो मज़ार वाला सीन और तुम्हारा कहना "मेरे नाम का धागा भी बांध देना...."...और अनुष्का शर्मा का बिन बोले बहोत कुछ कह जाना..दिल में रोमांस जगा गया...
और जो सीने पे डफली बजाते हुए राहत फ़तेह अली जी का "जग घुमेया" गाये हो...बडे सुन्दर लगे हो यार☺☺☺

क्या कहूँ...पिक्चर देखते कब तीन घंटे बीत गए पता ही नहीं चला ..तुम वो जादूगर हो जो सबको "वरचुयली" सम्मोहित करता है...

तुम जैसे हो वैसे क्यों हो कोई नहीं जानता..
पर ये तो है....कोई माने या ना माने.........................................

इस फिल्म के बाद ना जाने कितने "सुल्तान" जागेंगे और कितनी "आरफा"की तलाश होंगीं....उम्मीद जगा दी है तुम्हारे इस किरदार ने और इस फिल्म ने....जोशीली उम्मीद.....

डिअर #...

तुम भारत के #रॉकी बल्बोआ #हो......

हैशटैग
तुमने जो भी टिप्पणी की जिसपे बवाल मचा।।निंदा हुई।।।.... इतना ज़रूर कह सकता हूँ वो तुमने जानबुझ के नहीं कही होगी...पूरी उम्मीद है तुम्हारा वो मतलब बिलकुल नहीं होगा...कभी कभी दिमाग और ज़ुबान का तालमेल गड़बड़ा जाता है...हम सबके साथ कभी न कभी ज़रूर होता है...और हम कहते हैं.."मेरा वो मतलब नहीं था........"

हैशटैग.....
पिता और बेटे का रिश्ता बड़ा पॉवरफुल होता है..केवल माँ ही नहीं...पिता भी हमेशा बेटे की रक्षा करने... .उसकी गलतियां छिपाने आगे आता है।।।
मेरे पिताजी ने भी मेरी कई गलतियां ...कई पाप..अपने सिर लिए हैं..सबके पिता ने कभी न कभी अपने बच्चों की गलती अपने सिर ली होगी...किसी वजह से..इसमें कोई बुरी या बड़ी बात नहीं....
वो बाप -बेटे का पर्सनल मैटर है...

बाकी....


"अगली ईद और तुम्हारा इंतज़ार रहेगा...."

09/06/2016

Aftab Aalam( hamarey saanp/nevle jaise mitra)
Itra lagaye they tagda ekdum..hamney poocha kyun bhai ye aisa zeher type kya lagaye ho....1km door tak mehak raha sarwa...
Aftab boley yaar kaun sa hai pata nahi..Par itna pata hai "Hiran" ke "seengh" se khuch nikalta hai us se banta hai..

Hamney kaha acha beta....chalo kastoori hamari....seengh tumhari....

Boley Tum LOG jo logey usmein se thoda ya aadha Ham to lenge hi...

Khair..
Waapis hamney daaga guru dair raat nikal na lena sadak pe....BHOOT pakad lega..

Boley Jinnat log hamko nahi pakad paayenge..

Hamney thoda socha aur kaha..
" baat tum sahi keh rahey ho..
Jinnaat tumko nahi pakdega....
Isiliye BHOOT bola...
Jinaat bas HAM logon ko pakadta hai...

Hash tag ATMAAYEIN BHI DHARM WAALI
HASH TAG KAHIN KI BAAT AFTAB SE JODTEY HUE☺☺☺😊😊😀😀😁😁

09/06/2016

Ab is page pe likha jaayega..
Gyaan yahan baanta jaayega...
ek doosrey ke saath..
Koshish rahegi har kisaa mazey daar rahey...

Hash tag Shuruaat puraney kisson se hogi...
Puraney se naye mein jaana...behtar hai....

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