Puraane Yaaden

Puraane Yaaden Purani Yaadein Motivation ✨
पुरानी यादों से नई ताक़त 💫
हर दर्द एक सीख है, हर याद एक हौसला 💪
ज़िंदगी • एहसास • प्रेरणा 🌱
👉 Follow करें सकारात्मक सोच के लिए ❤️

🔥 जिस दिन हालात ने आपको रुलाया,उसी दिन किस्मत ने आपको मजबूत बनाना शुरू कर दिया… 💔➡️💰 एक वक्त था जबजेब में सिक्के कमऔर आँ...
04/01/2026

🔥 जिस दिन हालात ने आपको रुलाया,
उसी दिन किस्मत ने आपको मजबूत बनाना शुरू कर दिया…
💔➡️💰 एक वक्त था जब
जेब में सिक्के कम
और आँखों में सपने ज़्यादा थे…

🤔लोगों ने कहा –
“छोड़ दे, तेरे बस का नहीं”
लेकिन 💖दिल ने कहा –
😞“पुरानी यादों से सीख ले,
और नया इतिहास बना”

गरीबी ने सिखाया –
कौन अपना है
और कौन सिर्फ़ भीड़…

💥बुरा वक्त सिखा गया –
चुप रहकर मेहनत करना
और सही वक्त आने पर
खामोशी से जीत जाना।

✨आज जो मुस्कान है,
वो अचानक नहीं आई…
ये हर उस रात की कीमत है
जो रोते हुए गुज़री थी।
✔ बुरा वक्त इंसान को तोड़ता नहीं, बनाता है
✔ गरीब सोच नहीं, हालात होते हैं
✔ पैसा मंज़िल नहीं, आत्मसम्मान का रास्ता है
✔ पुरानी यादें दर्द नहीं, सबसे बड़ा सबक होती हैं
👉 Follow
क्योंकि यहाँ यादें नहीं, हौसले ज़िंदा रहते हैं पुरानी यादें
गरीब से अमीर
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गरीबी से सफलता
बुरा वक्त प्रेरणा

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🌸 बच्चे के जन्म पर लोक-वेदना से भरी भावनात्मक शायरी 🌸घर में किलकारी गूंजी तोआँखों में आँसू उतर आए,खुशी थी बच्चे के आने क...
11/12/2025

🌸 बच्चे के जन्म पर लोक-वेदना से भरी भावनात्मक शायरी 🌸

घर में किलकारी गूंजी तो
आँखों में आँसू उतर आए,
खुशी थी बच्चे के आने की
पर हालात ने सपने जलाए…

एक रोटी की जंग में माँ
अपनी भूख को मार गई,
आधी थाली पति को दी
और बाकी किस्मत खा गई…

सास की रजाई गर्म सही
पर बहू की सिसकी ठंडी थी,
गोद में बच्चा, टूटी हड्डियाँ
फिर भी माँ की ममता ज़िंदा थी…

सबने अपना हिस्सा पाया
पर बच्चे को बस प्यार मिला,
टुकड़ों में बँटी उस थाली से
एक भविष्य तैयार मिला…

कहती है माँ –
“मेरा घर उजड़ न जाए
इस नन्ही हँसी के खातिर,
मैं हर दर्द सह जाऊँगी
बस मेरा लाल बचा रहे आख़िर…”

❤️

माँ की भूख कभी लिखी नहीं जाती,
बस बच्चों की मुस्कान में छुप जाती है…

📣

👉 अगर यह शायरी दिल तक पहुँची हो
तो ❤️ जरूर करें
👉 माँ की ममता को समझते हों
तो कमेंट में “माँ” लिखें
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जो इन भावनाओं को समझती हो

🔍

माँ की ममता
बच्चे के जन्म पर गीत
लोक जीवन पीड़ा
गरीबी और मातृत्व
Emotional Hindi Shayari
Heart touching mother poetry
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पेश है आपलोगो के लिए विवाह संगीत पहीले पहीले अईली गवने सासु समझावे लगनी अवरू बुझावे लगनी हो बहुआ रची रची विज़न बनाया परि...
11/12/2025

पेश है आपलोगो के लिए विवाह संगीत पहीले पहीले अईली गवने सासु समझावे लगनी अवरू बुझावे लगनी हो बहुआ रची रची विज़न बनाया परिवरवा हमरे ढेर बांटे हों बहुआ रची रची विज़न बनाया परिवरवा हमरे ढेर बांटे नां दिया भर के चावल दिहनी दिया भरी के दाल दिहनी दिया भरी के आटा दिहनी बहुआ रची रची विज़न बनाया परिवरवा हमरे ढेर बांटे नां टाटी बासन कई दिहली धोइ मांजी केध इ देहली सासु आजु मोरी मुडवा पिराता परोस के खियाइ देतु नां सासु आजु मोरी मुडवा पिराता परोस के खियाइ देतु नां पार पड़ोसीन गोतीनं तोहु मोरी बहीनी हों नां बहीनी आजु के उतरल बहुवा त हमसे जबाब करे नां बहीनी आजु के उतरल बहुवा त हमसे जबाब करे नां सासु बड़े जिमेदारे के बिटीअवा तोहसे चलाक हई नां सासु बड़े जिमेदारे के बिटीअवा तोहसे चलाक हई नां
धन्यवाद ज्योती सिंह महाराष्ट्र

10/12/2025

बच्चे के जन्म का सोहर संगीत,निहुरे नीहुरे,धई अईली सासु के जगाई अईली अम्मा गोहराई अईली हो सासु आवे कुनकुनीया के पीर मैं के के बोलाई मैं के के जगाई हो नां निहुरे धई अईली ननदा के जगाई अईली दिदी गोहराई अईली हो दिदी आवे कुनकुनीया के पीर मैं के के बोलाई मैं के के जगाई हो नां निहुरे नीहुरे धई अईली जेठानी के जगाई अईली भाभी गोहराई अईली हो भाभी आवे कुनकुनीया के पीर मैं के के जगाई मैं के के बोलाई हों नां निहुरे नीहुरे धई अईली संईया के जगाई अईली साहब गोहराई अईली हो राजा आवे कुनकुनीया के पीर मैं के के जगाई मैं के के बोलाई हों नां संईया हमार दउडल आंवे लुगरी लत्ता लेहले आवें हों धनीया लागा लागा सब देवता गोहार हम लोकै के तईयार बांटी नां धनीया लागा लागा सब देवता गोहार हम लोके के तईयार बांटी नां उफ्फर परी जांय ससुई ननदीया देवरनीया जेठनीया हो बहीनी नीके रहें बचवा के बाप जीन गाढ़े दिनवा काम अईने हो बहीनी नीके रहें बचवा के बाप जीन गाढ़े दिनवा काम अईने हो धन्यवाद ज्योती सिंह महाराष्ट्र

बच्चे के जन्म का संगीत सोहर ्सुनत हंई ये राजा ननदा अवाई ननदा अवनं सुनी जिया घबराल ननदा अवनं सुनी जिया घबराला,नथीया दियाई...
10/12/2025

बच्चे के जन्म का संगीत सोहर ्सुनत हंई ये राजा ननदा अवाई ननदा अवनं सुनी जिया घबराल ननदा अवनं सुनी जिया घबराला,नथीया दियाई कि टिकवा देआई सलाह करा ये राजा का का देआई सलाह करा ये राजा का का दियाई तु चुप रहा ये धनीयां कुछ नां दियाई तु चुप रहा ये धनीयां कुछ नां दियाई सुनत हंई ये राजा ननदा अवाई ननदा अवनं सुनी जिया घबराला सलाह करा ये राजा का का देआई हरवा दीयाई या कंगना दियाई तु चुप रहा ये धनीयां कुछ नां दियाई सुनत हंई ये राजा ननदा अवाई ननदा अवनं सुनी जिया घबराला सलाह करा ये राजा का का देआई बिछुआ दिआई कि पायल दिआई तु चुप रहा ये धनीयां कुछ नां दियाई सुनत हंई ये राजा ननदा अवाई धन्यवाद ज्योती सिंह महाराष्ट्र

भईया बहीनी आप सब को मेरी तरफ से नमस्कार मैं आप लोगों के लिए  लिए विवाह समारोह में नाचने वाला संगीत देने जा रही हुं बहीनी...
10/12/2025

भईया बहीनी आप सब को मेरी तरफ से नमस्कार मैं आप लोगों के लिए लिए विवाह समारोह में नाचने वाला संगीत देने जा रही हुं बहीनी लोग कैसा है कमेंट में बताना मैं ससुराल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों मैं ससुराल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों पहला संदेशा, मेरे ससुर जी का आया,पहला संदेशा मेरे ससुर जी का आया इस बुड्ढे के संग नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों साल दो साल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों मैं ससुराल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों दुसरा संदेशा,जेठ जी का आया जेठ जी के संग नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों मैं ससुराल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों साल दो साल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों तीसरा संदेशा देवरजी का आया देवर जी के संग नहीं, जाउंगी डोली रख दो कहारों मैं ससुराल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों चउथा संदेसा सासु जी का आया, इस बुढीया के कहने से नहीं आउंगी ईसने मुझे बहुत,सताया है साल दो साल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों मैं ससुराल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों पांच वां संदेशा मेरे पिया जी का आया पांचवा संदेशा मेरे राजा,जी का आया नंगी पांव दौड़ी चली जाउंगी उनके बिस्तर से बिछी जाउंगी
डोली ले चलो कहारों धन्यवाद,

✨ प्रेरणादायक शायरी ✨दिल धड़का नहीं था, पर हिम्मत जगानी पड़ी,हम चले तो राहों को भी नई कहानी बनानी पड़ी।फटे हुए वक़्त को ...
10/12/2025

✨ प्रेरणादायक शायरी ✨

दिल धड़का नहीं था, पर हिम्मत जगानी पड़ी,
हम चले तो राहों को भी नई कहानी बनानी पड़ी।
फटे हुए वक़्त को सिलना कोई आसान काम नहीं,
पर हमने हर दर्द पर मुस्कान की रजाई बिछानी पड़ी।

थक कर बैठ जाते तो मंज़िल रूठ जाती,
हिम्मत छोड़ देते तो किस्मत टूट जाती।
हम हारने वाले होते तो कब के रुक जाते,
पर असली जीत तो तब मिली… जब दुनिया चौंक जाती।

जो गिरकर भी उठे, वही ज़िंदगी की असल तासीर है,
हर चोट के पीछे छुपा एक अनमोल ताबीर है।
धागे कम थे, पर इरादे बहुत थे हमारे,
इसलिए वक़्त ने भी कहा— “तू चल, मैं तेरे साथ हूँ जैसे कोई डॉक्टर पांच मिनट देखेंगा तो उसको पैसा भी मिलता है लेकिन जब बात काउंसिलिंग कि आती है तो वह फि्री में चाहिए, जैसे हमारे समय का कोई मोल नहीं है वैसे काउंसिलिंग के लिए परामर्श मिलते रहते हैं कहां तक सच है परिवर्तन हो तो समझ में आये ओम नमः शिवाय जय श्रीराम

09/12/2025

सादी विवाह समारोह में नाचने वाला, गीत ््संगीत कोठे उपर कोठरी मैं उस पर रेल चला दुंगी कोठे उपर कोठरी मैं उसपर रेल चला दुंगी जो मेरी सासु प्यार करें तो उसको गले से लगा लुंगी जो मेरी सासु करें लड़ाई रोटी बिन तरसा दुंगी कोठे उपर कोठरी मैं उसपर रेल चला दुंगी जो मेरी ननद प्यार करे तो उसको सबकुछ समझा दुंगी जो मेरी ननद करे लड़ाई डन्टे से पिटवा दुंगी कोठे उपर कोठरी मैं उसपर रेल चला दुंगी कोठे उपर कोठरी जो मेरी जेठानी प्यार करें तो दिदी दिदी कहकर बुला लुंगी जो मेरी जेठानी करे लड़ाई घर से बाहर करवा दूंगी कोठे उपर कोठरी मैं उसपर रेल चला दुंगी कोठे उपर कोठरी मैं उसपर रेल चला दुंगी धन्यवाद

आपसभी को नमस्कार सुभ संध्या आपसभी को मां का भक्ति गीत,निबीया कि डरिया मईया डालेनी झुलनवां, हो कि झुली झुली नां मईया मोरी...
09/12/2025

आपसभी को नमस्कार सुभ संध्या आपसभी को मां का भक्ति गीत,निबीया कि डरिया मईया डालेनी झुलनवां, हो कि झुली झुली नां मईया मोरी गावेलीं गितीया हो कि झुली झुली नां मईया मोरी गावेलीं गितीया हो कि झुली झुली नां झुलत झुलत मईया के लागेला पिअसिया, हो कि चलीं भईनी नां मईया मोरी मलीनी दुअरियां, हों कि चलीभईनीं नां जागत बाडु कि सुतत,मालीन हो कि,बुन्द ऐक नां हमके पनीया पियाहु मालीन बुन्द, ऐक नां कईसे, के,पनीयां पिआंहु सातों बहीनी हो कि मोरे गोंदिया नां बांटे सेवका तोहार हों कि मोरे गोंदिया नां बलका सुताहु मालीन सोने के खटोलवां हों कि,बुन्द ऐक नां, हमके पनीया पियाहु मालीन बुन्द ऐक नां सोने के खटोलवां ई
मईया टुटी फाटी जईहें, हो कि सेवका तोहरो नां हे भुईवां, लोटें लगीहे,हो कि, सेवका तोहरो नां बलका के झारी झुरी देहु मोरी,गोदीयां हो कि बुन्द ऐक नां हमके पनीया पियाहु मालीन बुन्द ऐक नां हमके पनीया पियाहु मालीन बुन्द ऐक नां,

“खाली पड़ा क़िला और भूली हुई राजकुमारी”(एक रहस्य और कल्पना से भरी सुंदर कहानी)रिया उस दिन जंगल में रास्ता भटक गई थी।चलते...
08/12/2025

“खाली पड़ा क़िला और भूली हुई राजकुमारी”

(एक रहस्य और कल्पना से भरी सुंदर कहानी)

रिया उस दिन जंगल में रास्ता भटक गई थी।
चलते-चलते वह एक जगह रुकी, जहाँ पेड़ों के पीछे से कुछ पत्थर चमक रहे थे।
करीब गई तो उसकी आँखें फैल गईं—

सामने एक बहुत बड़ा, पर खाली पड़ा पुराना क़िला था।

ना दरवाज़ों पर ताले,
ना किसी की आवाज़,
सिर्फ हवा और खामोशी।

रिया ने महल को पहली बार देखा था,
फिर भी उसके दिल में एक अजीब-सा एहसास आया—

“मैं… यहाँ पहले भी आई हूँ।”

पर यह कैसे हो सकता है?

वह धीरे-धीरे क़िले के अंदर गई।
दीवारों पर पुराने दीपक,
सीढ़ियों पर धूल,
और बीच में बड़ा सा खाली दरबार हॉल।

जैसे ही वह आगे बढ़ी,
एक बूढ़ी आवाज़ सुनाई दी—

“आख़िर तुम लौट ही आई, राजकुमारी…”

रिया चौंक गई।
उसके सामने एक बहुत बूढ़े चौकीदार जैसे कपड़ों में खड़ा आदमी था।
चेहरा शांत, और आँखों में एक गहरी पहचान।

रिया बोली,
“राजकुमारी? मैं? नहीं… मैं तो बस रास्ता भटक गई हूँ।”

बूढ़ा मुस्कुराया—

“नहीं बिटिया… तुम भूले हो।

यह क़िला कभी तुम्हारा ही था।”

रिया हैरान होकर बोली,
“पर मुझे कुछ याद क्यों नहीं?”

चौकीदार ने कहा—

“बहुत साल पहले, यहाँ एक बहुत प्यारी राजकुमारी रहती थी।

क़िले में एक परंपरा थी—
जब भी राज्य पर खतरा आता,
राजकुमारी को दूर भेज दिया जाता,
ताकि वह सुरक्षित रहे।

वक़्त के साथ उसकी यादें भी मिटा दी जाती थीं,
ताकि वह डर या दर्द महसूस न करे।”

रिया धीरे-धीरे चौकीदार के पास बैठ गई।
उसे अपने सीने में अजीब-सी गर्मी महसूस होने लगी—
जैसे कोई भूली बात वापस लौट रही हो।

चौकीदार ने आगे कहा—

“वो राजकुमारी…

हमेशा कहा करती थी कि वह एक दिन लौटकर आएगी
और इस खाली पड़े क़िले को फिर से जगाएगी।
आज… तुम्हें देखकर वही चिंगारी दिख रही है।”

रिया बोली,
“लेकिन अगर मैं वही हूँ… तो यह जगह अब खाली क्यों है?”

बूढ़े ने सिर झुकाया—

“समय के साथ क़िला खाली हो गया।

लोग नए गाँवों में चले गए।
पर मैं…
मैं यहीं रुका रहा।
क्योंकि मुझे विश्वास था—
राजकुमारी एक दिन वापस आएगी।”

रिया की आँखें भर आईं।
उसे डर नहीं लगा…
बस एक अपनापन महसूस हुआ।

चौकीदार ने उसकी ओर देखते हुए कहा—

“तुम्हें सब याद नहीं है,

पर पहचान अभी भी तुम्हारे दिल में है।
क़िला वापस जी उठेगा,
जब तुम इसे फिर से अपने रूप में अपनाओगी।”

रिया ने महल के चारों ओर देखा—
धूल, टूटी चीज़ें, पर हर जगह एक अजीब परिचित शांति।

जैसे यह क़िला अब भी
उसी का इंतज़ार कर रहा था।

वह धीरे से बोली—

“शायद… मैं सच में यहाँ की राजकुमारी थी।”

चौकीदार मुस्कुराया—

“नहीं बिटिया…

तुम हो।
बस तुम्हें अपनी पहचान फिर से याद करनी है।”

रिया ने उस दिन क़िले की हर जगह को देखा।
सीढ़ियाँ, कमरा, दरबार, बगीचा…
और कोई भी जगह उसे अजनबी नहीं लगी।

सूरज ढलने लगा।
चौकीदार बोला—

“जाओ… अभी घर लौट जाओ।
पर याद रखना, यह क़िला तुम्हारा है।
जब भी चाहो… लौट आना।”

रिया ने पीछे मुड़कर आखिरी बार क़िले को देखा।
इस बार उसे लगा—
यह सिर्फ एक पुरानी इमारत नहीं…
उसकी भूली हुई कहानी ठीक है!
अब मैं आपको क़िले की परंपरा, उसका रहस्य, उसका मालिक, और राजकुमारी कौन थी—सब कुछ साफ, आसान और पूरी तरह समझ आने वाली कहानी रूप में बताता हूँ।

कोई डर नहीं, कोई उलझन नहीं—
बस साफ, सुंदर और रहस्यमयी इतिहास।

---

🏰 क़िले का रहस्य और परंपरा

(पूरी कहानी अब स्पष्ट)

🌟 क़िले का नाम

“अमरेश्वर क़िला”
यह क़िला “अमरेश्वर राज्य” का सबसे बड़ा और सबसे पुराना क़िला था।

🌟 क़िले का मालिक कौन था?

राज्य पर शासन करने वाले राजा का नाम था—

राजा आदित्य वीर सिंह

वे बेहद न्यायप्रिय, शांत और विद्वान राजा थे।
लोग उन्हें “अमरेश्वर का सूर्य” कहते थे,
क्योंकि वह राज्य पर सूरज जैसी रोशनी फैलाते थे।

---

👑 राजकुमारी कौन थी?

राजकुमारी का पूरा नाम था—

राजकुमारी रियान्विका आदित्यसिंह (संक्षेप में ‘रिया’)

यानि रिया राजा आदित्य वीर सिंह और रानी चारुदेवी की बेटी थी।

वह पूरे राज्य की लाड़ली थी।
उसमें एक खासियत भी थी—
वह जन्म से ही क़िले के रहस्य से जुड़ी हुई थी, पर उसे इसका पता नहीं था।

---

🔱 अब सबसे बड़ा सवाल — क़िले की परंपरा क्या थी?

क़िले में एक बहुत पुरानी परंपरा थी जिसे “संरक्षण-विधान” कहते थे।

🌿 संरक्षण-विधान क्या था?

यह एक नियम था कि:

✔ जब भी राज्य पर खतरा आए,

✔ या दुश्मन हमला करे,
✔ या चारों ओर परेशानी फैले,

तो राजकुमारी को राज्य से दूर किसी सुरक्षित जगह भेज दिया जाता था।

लेकिन सिर्फ भेजा नहीं जाता था—

🔐 **उसकी यादों को भी कुछ समय के लिए बंद कर दिया जाता था,

ताकि वह डर, दर्द या आघात महसूस न करे।**

यह परंपरा इसलिए थी क्योंकि—

राजकुमारी की सुरक्षा = राज्य की सुरक्षा
क्योंकि राजा की अगली वारिस वही थी।

इस “याद के बंद होने” को
राज्य में कहा जाता था—

“मस्तिष्क-रक्षा संस्कार”

(यानी दिमाग की सुरक्षा की परंपरा)

---

💠 क़िले का सबसे बड़ा रहस्य क्या था?

अमरेश्वर क़िला साधारण क़िला नहीं था।
उसकी नींव में एक प्राचीन मंत्र था—

“आत्म-जागृति स्रोत”

ये एक ऐसी शक्ति थी जो क़िले को राजपरिवार की भावनाओं से जोड़ देती थी।

इसी वजह से—

✔ राजकुमारी जहाँ भी होती
✔ क़िले को वो महसूस कर सकता था
✔ और क़िला उसे महसूस कर सकता था।

इसलिए रिया को अचानक क़िले का एहसास हुआ था—
क्योंकि वह उसी की असली वारिस थी।

---

🧓 चौकीदार कौन था?

उस बूढ़े चौकीदार का नाम था—

“भानुदास”

वह राजा आदित्य वीर सिंह के समय से
क़िले की रक्षा कर रहा था।
राजा ने जाते-जाते उससे वादा करवाया था—

“जब तक रियान्विका न लौट आए,

अमरेश्वर क़िला किसी और को न सौंपना।”

इसीलिए वह बूढ़ा आदमी
कई सालों से अकेले उस क़िले की रखवाली कर रहा था।

---

🌟 तो असली सच क्या है?

✔ रिया वही राजकुमारी है

✔ राजा आदित्य वीर सिंह उसका पिता था

✔ क़िला अमरेश्वर उसका अपना घर था

✔ चौकीदार भानुदास उसका संरक्षणकर्ता

✔ और उसकी यादें इसलिए गई थीं

क्योंकि राज्य की परंपरा ने उसकी सुरक्षा के लिए ऐसा किया था।

इसलिए रिया को क़िला देखकर ऐसा लगा—
“जैसे मैं यहाँ रहती थी…”

क्योंकि वह सच में वहीं रहती थी,

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