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तू पास है मेरे....
13/06/2026

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ताजमहल भारत के Taj Mahal शहर में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध स्मारक है। इसे मुगल सम्राट Shah Jahan ने अपनी प्रिय पत्नी Mumta...
12/06/2026

ताजमहल भारत के Taj Mahal शहर में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध स्मारक है। इसे मुगल सम्राट Shah Jahan ने अपनी प्रिय पत्नी Mumtaz Mahal की स्मृति में बनवाया था।

प्रमुख तथ्य
स्थान: Agra, उत्तर प्रदेश
निर्माण काल: 1632 से 1653 ईस्वी
निर्माता: शाहजहाँ
वास्तुकला शैली: मुगल वास्तुकला
निर्माण सामग्री: सफेद संगमरमर
विश्व धरोहर: 1983 में UNESCO द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित
ताजमहल का महत्व

ताजमहल प्रेम, समर्पण और उत्कृष्ट वास्तुकला का प्रतीक माना जाता है। इसकी सुंदर नक्काशी, विशाल गुंबद और संगमरमर की कलाकारी दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती है।

रोचक तथ्य
ताजमहल को दुनिया के सात अजूबों में शामिल किया जाता है।
इसके निर्माण में लगभग 20,000 कारीगरों ने काम किया था।
यमुना नदी के किनारे स्थित होने के कारण इसका दृश्य अत्यंत आकर्षक दिखाई देता है।

संक्षेप में: ताजमहल भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का अनमोल रत्न है तथा प्रेम का विश्वप्रसिद्ध प्रतीक माना जाता है।
ताजमहल के निर्माण पर उस समय लगभग 3.2 करोड़ मुगल रुपये खर्च होने का अनुमान है।

आज के समय में इसकी सटीक कीमत बताना मुश्किल है, लेकिन इतिहासकारों के अनुसार यदि ताजमहल जैसा स्मारक आज बनाया जाए तो इसकी लागत हजारों करोड़ रुपये (कई अरब रुपये) हो सकती है।

Taj Mahal का निर्माण 1632 से 1653 के बीच Shah Jahan के शासनकाल में हुआ था।

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09/06/2026

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07/06/2026

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ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म 1141 ई. के आसपास फारस (वर्तमान ईरान क्षेत्र) में हुआ था।वे लगभग 1191–1192 ई. में भारत आ...
03/06/2026

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म 1141 ई. के आसपास फारस (वर्तमान ईरान क्षेत्र) में हुआ था।
वे लगभग 1191–1192 ई. में भारत आए और अंततः अजमेर में बस गए। उन्होंने प्रेम, मानवता, सेवा और भाईचारे का संदेश दिया।
उनका निधन 1236 ई. में अजमेर में हुआ और वहीं उनकी मजार बनाई गई। बाद में यह स्थान एक बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ।
दरगाह के वर्तमान परिसर का विकास विभिन्न शासकों, विशेषकर Humayun, Akbar और Shah Jahan के समय में हुआ। अकबर हर वर्ष यहाँ पैदल यात्रा करके आते थे और उन्होंने दरगाह में कई निर्माण कार्य करवाए।

उर्स (वार्षिक मेला)
ख्वाजा साहब की पुण्यतिथि को हर वर्ष उर्स मनाया जाता है। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अजमेर शरीफ पहुँचते हैं।

महत्व
अजमेर शरीफ दरगाह को हिंदू-मुस्लिम एकता और सूफी परंपरा का प्रतीक माना जाता है। यहाँ लोग चादर चढ़ाकर और दुआ करके अपनी मनोकामनाएँ व्यक्त करते हैं।
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