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सोनिया और शारदा देवी की संघर्षपूर्ण कहानीरामगढ़ गांव के खेतों में फसल काटने के बाद सोनिया अपनी मां शारदा देवी के साथ ट्र...
31/10/2025

सोनिया और शारदा देवी की संघर्षपूर्ण कहानी

रामगढ़ गांव के खेतों में फसल काटने के बाद सोनिया अपनी मां शारदा देवी के साथ ट्रैक्टर से घर लौट रही थी। सोनिया कॉलेज की छात्रा थी, जो छुट्टियों में अपनी मां का हाथ बंटाने आई थी। उसकी बड़ी बहन, शालिनी, पुलिस विभाग में एक प्रतिष्ठित आईपीएस अफसर थी।

गांव से शहर की ओर जाते हुए सड़क पर पुलिस बैरियर लगा था। इंस्पेक्टर आलोक सिंह जीप के बोनट पर पैर फैलाए बैठे थे, और दो सिपाही आने-जाने वालों से जबरन पैसे वसूल रहे थे। जैसे ही सोनिया और उसकी मां वहां पहुंचीं, इंस्पेक्टर ने उन्हें रोकते हुए अभद्र भाषा में बात की। सोनिया ने विनम्रता से सारे कागजात दिखाए, लेकिन आलोक सिंह ने बिना देखे ही उन्हें फेंक दिया और सोनिया को थप्पड़ मार दिया। भीड़ तमाशा देख रही थी, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। एक युवक चुपचाप वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था।

आलोक सिंह ने दोनों को थाने ले जाकर बदबूदार कोठरी में बंद कर दिया। शारदा देवी को सांस की बीमारी थी, उनकी हालत बिगड़ने लगी। सोनिया ने मदद की गुहार लगाई, लेकिन इंस्पेक्टर ने बेरहमी दिखाई। जब शारदा देवी की हालत बहुत खराब हो गई, सोनिया ने गुस्से में इंस्पेक्टर को थप्पड़ मार दिया। आलोक सिंह ने उसे दूसरी कोठरी में बंद कर दिया।

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Chhath Mahaparv: A Celebration of Faith, Unity, and Cleanliness in LucknowLucknow, Uttar Pradesh – The auspicious festiv...
30/10/2025

Chhath Mahaparv: A Celebration of Faith, Unity, and Cleanliness in Lucknow

Lucknow, Uttar Pradesh – The auspicious festival of Chhath Mahaparv was celebrated with great devotion and enthusiasm across the state capital, Lucknow, as well as in various parts of India and the world where the Bhojpuri community resides. The event was marked not only by spiritual rituals but also by a strong message of social and national unity.

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विकास की सच्चाई: एक साधारण कर्मचारी से कंपनी के असली मालिक तकसुबह का नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। मुंबई के एक ...
30/10/2025

विकास की सच्चाई: एक साधारण कर्मचारी से कंपनी के असली मालिक तक

सुबह का नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। मुंबई के एक आलीशान ऑफिस के सामने लग्जरी कारों की कतारें थीं। दरवाजे खुले तो उनमें से सजे-धजे लोग बाहर निकले, सबकी आंखों में बस एक ही चमक थी – सपनों की ऊंचाइयों को छूने की तड़प। लेकिन उसी भीड़ में एक शख्स सबसे अलग दिखाई देता था – विकास। उसके कंधे पर पुराना बैग, कपड़े हल्के सिकुड़े हुए, और पैरों में घिसे हुए जूते। सबकी नजरों में वह बस एक साधारण कर्मचारी था, लेकिन सच यह था कि वह कंपनी का असली वारिस था।

अमेरिका में बिजनेस खड़ा करने के बाद विकास भारत लौटा था। उसने अपनी पहचान छिपा ली थी ताकि वह जान सके कि उसकी टीम में कौन ईमानदार है, कौन चापलूस है और कौन अपने पद के घमंड में इंसानियत भूल चुका है। इसी वजह से उसने एक सफाई कर्मचारी का भेष धारण किया।

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Chirag Paswan and Family Celebrate Chhath Mahaparv in PatnaPatna, Bihar – Beautiful scenes unfolded today as Union Minis...
30/10/2025

Chirag Paswan and Family Celebrate Chhath Mahaparv in Patna

Patna, Bihar – Beautiful scenes unfolded today as Union Minister and Lok Janshakti Party National President Chirag Paswan arrived to offer ‘Arghya’ to the rising sun with his family, marking the conclusion of the sacred Chhath Mahaparv. Carrying a decorated bamboo basket (‘daura’) on his head, Chirag Paswan joined his family members at a specially prepared ghat inside the LJP office in Patna.

The Chhath festival, a four-day event, begins with ‘Nahay Khay’ and progresses through ‘Kharna’, followed by the evening offering (‘arghya’) to the setting sun, and culminates with the morning offering to the rising sun. Devotees, especially women, observe a strict fast for almost three days, abstaining even from water, and break their fast only after the final rituals.

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कामाख्या एक्सप्रेस की कहानी: एक सफर, दो मासूम, और इंसानियत की मिसालशाम का वक्त था। बनारस स्टेशन पर कामाख्या एक्सप्रेस मु...
30/10/2025

कामाख्या एक्सप्रेस की कहानी: एक सफर, दो मासूम, और इंसानियत की मिसाल

शाम का वक्त था। बनारस स्टेशन पर कामाख्या एक्सप्रेस मुंबई के लिए तैयार थी। ट्रेन के डिब्बे में एक 23 साल की बेहद खूबसूरत लड़की, खुशी, अपनी सीट पर आराम से बैठी थी। उसके आसपास के यात्री शांत और सज्जन थे, जिससे माहौल सुखद था। लेकिन थोड़ी देर बाद एक व्यक्ति, राजू, अपने दो छोटे बच्चों—चार साल की बेटी पारुल (प्यारे नाम से परी) और दो साल के बेटे आशु—के साथ डिब्बे में चढ़ा।

राजू के आते ही लोगों की नजरें उस पर टिक गईं। सब हैरान थे कि इतना छोटा बच्चा और एक मासूम बेटी के साथ यह आदमी अकेला सफर क्यों कर रहा है? कुछ लोगों ने उससे पूछ भी लिया, "भैया, बच्चों के साथ कोई महिला नहीं है? अकेले कहाँ जा रहे हो?" राजू ने जवाब दिया, "इनकी मां मुंबई में है, मैं बच्चों को वहीं ले जा रहा हूँ।" लोगों को उसकी बातों पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन राजू शांत रहा।

कुछ घंटे बीते, आशु गहरी नींद में था। पारुल अपनी मासूमियत से सबका दिल जीत रही थी। लोग कह रहे थे, "बहुत प्यारे बच्चे हैं, छोटा वाला तो बहुत शांत लगता है।" लेकिन यह सन्नाटा तूफान से पहले का था। दो घंटे बाद आशु की नींद खुली और वह जोर-जोर से रोने लगा। उसकी चीखें पूरे डिब्बे में गूंजने लगीं। लोग परेशान हो गए, उनकी नींद टूट गई। राजू उसे चुप कराने की कोशिश करता रहा, लेकिन आशु का रोना बंद नहीं हुआ। कुछ यात्री बोले, "भैया, बच्चों को संभालना महिलाओं का काम है। आपको किसी लेडीज को साथ लाना चाहिए था।"

राजू सब सुनता रहा, किसी को पलटकर जवाब नहीं दिया। सामने वाली सीट पर बैठी खुशी यह सब देख रही थी। उसे पारुल बहुत प्यारी लगी। उसने पारुल को प्यार से बुलाया, "बेटी, आओ मेरे पास।" पारुल खुशी के पास आ गई। खुशी ने उससे पूछा, "तुम्हारी मम्मी कहाँ है?" पारुल ने मासूमियत से जवाब दिया, "मम्मी हमें छोड़कर चली गई है। अब हम डैडी के साथ रहते हैं।" खुशी ने पारुल को बिस्किट दिया, और दोनों में दोस्ती हो गई।

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कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसी जगह ले जाती है, जहाँ लोग हमारे कपड़ों से हमारी कीमत तय करते हैं। लेकिन जब किस्मत पलटती है, तो व...
30/10/2025

कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसी जगह ले जाती है, जहाँ लोग हमारे कपड़ों से हमारी कीमत तय करते हैं। लेकिन जब किस्मत पलटती है, तो वही लोग हमारी इज्जत को सलाम करते हैं।

मुंबई की एक सुबह थी। एयरपोर्ट रोड पर लग्ज़री गाड़ियों की भीड़ थी। हर तरफ सूट-बूट वाले लोग, फॉर्मल बैग और कानों में ब्लूटूथ लगाए एग्जीक्यूटिव्स। उसी भीड़ में एक सादा सा दिखने वाला लड़का धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था — नाम था आर्यन तिवारी, उम्र बस 30 साल। झोले में कुछ कागज, हाथ में पुराना फोन और चेहरे पर एक अजीब सी शांति।

वो सीधा गया ब्लू स्काई एयरलाइंस के मुख्य ऑफिस की ओर, जो देश की सबसे बड़ी कंपनियों में गिनी जाती है। गेट पर खड़े सिक्योरिटी गार्ड ने उसे ऊपर-नीचे देखा और रास्ता रोक लिया।

“भाई साहब, कहाँ जा रहे हो? ये ऑफिस किसी इंटरव्यू सेंटर की तरह नहीं है, ये एयरलाइन का हेड ऑफिस है।”

आर्यन मुस्कुराया, “मुझे अंदर जाना है, मेरी अपॉइंटमेंट है।”

गार्ड हँस पड़ा, “आपकी अपॉइंटमेंट? यहाँ बड़े-बड़े मिनिस्टर बिना अपॉइंटमेंट के नहीं घुस पाते। आप तो लग रहे हैं जैसे किसी डिलीवरी एजेंसी से आए हो।”

पीछे खड़े कुछ स्टाफ हँसने लगे।

तभी अंदर से एक महिला आई — रिया कपूर, कंपनी की पब्लिक रिलेशंस हेड। कपड़े, चश्मा और चाल में अहंकार। उसने गार्ड से पूछा, “क्या हुआ?”

गार्ड बोला, “मैम, ये कह रहे हैं कि इनकी अपॉइंटमेंट है।”

रिया ने आर्यन को सिर से पाँव तक देखा और हल्के ताने वाले लहजे में बोली, “सॉरी मिस्टर... क्या नाम बताया आपने?”

“आर्यन तिवारी,” उसने शांत स्वर में कहा।

रिया मुस्कुराई, “मिस्टर तिवारी, मुझे नहीं लगता कि आपकी अपॉइंटमेंट हमारे CEO से होगी। ये कंपनी बहुत हाई प्रोफाइल है, शायद आप गलत जगह आ गए हैं।”

आर्यन बस मुस्कुराया, “मैम, आप चाहें तो एक बार रजिस्टर चेक कर सकती हैं।”

रिया ने कंधे उचकाए, “ठीक है, लेकिन इसमें वक्त लगेगा। आप लॉबी में बैठिए।”

वो धीरे-धीरे चलकर लॉबी के कोने में बैठ गया। आसपास बैठे लोग उसे ऐसे देख रहे थे जैसे कोई भिखारी गलती से यहाँ आ गया हो। कोई कह रहा था, “लगता है नौकरी मांगने आया है।” कोई बोला, “शायद किसी ने इसे ट्रायल फ्लाइट में गलत भेज दिया।”

आर्यन सब सुन रहा था, पर उसके चेहरे पर शांति थी।

तभी रिया के साथी मैनेजर विवेक मल्होत्रा ने पूछा, “कौन है ये आदमी?”

रिया हँसते हुए बोली, “कोई फ्रीलांसर टाइप होगा, बोला है कि CEO से मिलना है।”

विवेक ने सिर हिलाया, “हमारे CEO कब से ऐसे लोगों से मिलने लगे?”

दोनों हँसते हुए अपने ऑफिस में चले गए।

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सच्चा सम्मान — आकाश एलायंस की नई शुरुआतआकाश एलायंस के कॉर्पोरेट टावर की 25वीं मंजिल पर सुबह का माहौल गरम था। एचआर मैनेजर...
30/10/2025

सच्चा सम्मान — आकाश एलायंस की नई शुरुआत

आकाश एलायंस के कॉर्पोरेट टावर की 25वीं मंजिल पर सुबह का माहौल गरम था। एचआर मैनेजर आरुषि अपने शानदार केबिन में बैठी थी। वह अपनी सफलता और पावर को लेकर बहुत अहंकारी हो चुकी थी। उसके लिए हर उम्मीदवार बस एक नंबर था—कोई भावना नहीं, कोई अपवाद नहीं। उसी दिन का इंटरव्यू शेड्यूल उसकी टेबल पर रखा था, लेकिन वह किसी दोस्त से फोन पर लंबी बात में व्यस्त थी। बाहर कई उम्मीदवार इंतजार कर रहे थे, उनमें से एक था नयन।

नयन का पहनावा सादा लेकिन साफ-सुथरा था। उसके चेहरे पर आत्मविश्वास था, ना उत्साहित, ना डरा हुआ। रिसेप्शनिस्ट ने बिना देखे उंगली से इशारा किया—बैठिए, आपको बुलाया जाएगा। नयन ने धन्यवाद कहा और चुपचाप बैठ गया। वक्त बीतता गया। आधे घंटे से ज्यादा हो गए। बाकी उम्मीदवार बेचैन हो रहे थे, कोई टाई ढीली कर रहा था, कोई बार-बार मोबाइल देख रहा था। सब झुंझला रहे थे, लेकिन नयन शांत बैठा रहा। उसके भीतर गुस्सा जरूर था, पर उसने कोई शिकायत नहीं की।

तभी वहां कंपनी की जूनियर स्टाफ रिया आई। उसकी उम्र करीब 25 साल थी, चेहरे पर हल्की मुस्कान और आंखों में दयालुता। वह एचआर की असिस्टेंट थी। उसने देखा कि नयन बहुत देर से बैठा है। वह उसके पास आई, नरम आवाज में बोली, “नमस्ते, माफ कीजिए, क्या आपको बुलाया नहीं गया?” नयन ने सिर उठाकर कहा, “नहीं, उन्होंने कहा है कि बुलाया जाएगा।” रिया ने उसकी फाइल उठाई, जो रिसेप्शनिस्ट ने एक किनारे रख दी थी और तुरंत एचआर तक पहुंचाई। फिर वह नयन के पास आई, पानी लाकर दिया और माफी मांगी। नयन ने मुस्कुरा कर कहा, “कोई बात नहीं, मुझे इंतजार करने की आदत है।” रिया उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी।

आरुषि ने फोन कॉल खत्म की, एक-एक कर उम्मीदवार अंदर गए और कुछ ही मिनट में लौट आए—चेहरे पर निराशा। नयन का नंबर आया, लेकिन उसे फिर भी रोक लिया गया। रिया ने फिर आकर कहा, “सर, थोड़ी देर और, मैडम किसी जरूरी काम में है।” 15 मिनट और बीत गए। अब पूरा हॉल खाली था, सिर्फ नयन, रिसेप्शनिस्ट और रिया। आरुषि ने जानबूझकर नयन को अंत में बुलाया।

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बर्फ की चादर में दफन इंसानियत — गुलमर्ग की एक अनसुनी कहानीजनवरी का महीना था। कश्मीर अपनी खूबसूरती के चरम पर था। गुलमर्ग ...
30/10/2025

बर्फ की चादर में दफन इंसानियत — गुलमर्ग की एक अनसुनी कहानी

जनवरी का महीना था। कश्मीर अपनी खूबसूरती के चरम पर था। गुलमर्ग की वादियों में बर्फ की मोटी, मुलायम चादर बिछी थी। देवदार के पेड़ों पर रुई जैसे फाहे जमे थे और सूरज की पहली किरणें बर्फ को हीरों सा चमका रही थीं। इसी धरती के स्वर्ग को देखने अमेरिका के कैलिफोर्निया से पाँच दोस्त आए — डेविड, सारा, उनकी बेटी, मार्क, एमली और डेनियल। वे सभी एक परिवार की तरह थे, हर किसी के दिल में रोमांच और प्रकृति से जुड़ने की ललक थी।

पहले कुछ दिन उन्होंने गुलमर्ग की आम ढलानों पर स्कीइंग की, स्थानीय बाजारों में घूमे, कश्मीरी कहवा का स्वाद चखा, और लोगों की मेहमाननवाज़ी का अनुभव लिया। मार्क अपने कैमरे से हर पल को कैद कर रहा था। सारा और डेविड अपनी शादी की 20वीं सालगिरह मना रहे थे। एमली, डॉक्टर होने के बावजूद, इन पहाड़ों की शांति में खो जाना चाहती थी। डेनियल, दो बच्चों का पिता, यहाँ अपनी रोज़मर्रा की भागदौड़ से दूर खुद को तलाशने आया था।

उनका सफर रोमांचक था, लेकिन जल्द ही एक बड़ा तूफान आने वाला था। डेविड और मार्क ने बैक-कंट्री स्कीइंग का फैसला किया — उन अनछुए दुर्गम पहाड़ी ढलानों पर जहाँ कोई मशीन से बनी पिच नहीं होती। स्थानीय गाइड बशीर ने उन्हें चेताया, "साहब, मौसम का कोई भरोसा नहीं। हिमस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है।" लेकिन रोमांच ने चेतावनियों पर भारी पड़ गया। सारा और एमली डर गईं, पर साथियों का उत्साह देख मान गईं। डेनियल ने मजाक में कहा, "अगर मौत आनी है तो जन्नत से बेहतर जगह कौन सी होगी?" उसे नहीं पता था, उसकी बात कितनी सच होने वाली है।

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Mahima Chaudhry’s "Second Marriage" with Sanjay Mishra? Here’s the Real Truth!Recently, social media has been buzzing wi...
30/10/2025

Mahima Chaudhry’s "Second Marriage" with Sanjay Mishra? Here’s the Real Truth!

Recently, social media has been buzzing with a viral video claiming that 52-year-old Bollywood actress Mahima Chaudhry has married actor Sanjay Mishra. The video shows Mahima telling Sanjay, “You couldn’t attend the wedding, but at least have some sweets.”

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"एक भेष, एक विरासत – मेहरा स्टील्स की सच्ची कहानी"लुधियाना, भारत का औद्योगिक हृदय। यहां की हवा में मेहनत की महक और मशीनो...
29/10/2025

"एक भेष, एक विरासत – मेहरा स्टील्स की सच्ची कहानी"

लुधियाना, भारत का औद्योगिक हृदय। यहां की हवा में मेहनत की महक और मशीनों का संगीत घुला हुआ है। इसी शहर के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में फैली थी – मेहरा स्टील्स। यह सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि एक विरासत थी। पचास साल पहले लाला अमरनाथ मेहरा ने अपने खून-पसीने से इसे सींचा था। उनके लिए फैक्ट्री परिवार थी, मजदूर भाई थे। समय बदलता गया, और अब तीसरी पीढ़ी के मालिक थे – अर्जुन मेहरा। लंदन से पढ़ा हुआ, युवा, नेकदिल और अपने दादा के उसूलों का सम्मान करने वाला अर्जुन।

लेकिन अर्जुन की दुनिया आलीशान दफ्तरों, लैपटॉप और बोर्डरूम मीटिंग्स तक सीमित थी। फैक्ट्री की असली जमीनी हकीकत से वह कोसों दूर था। उसने सारा काम अपने जनरल मैनेजर मिस्टर बत्रा और उनकी टीम पर छोड़ रखा था। पिछले दो सालों से अर्जुन को बेचैनी थी – कंपनी की बैलेंस शीट में मुनाफा दिखता था, लेकिन वह चमक नहीं थी जो पहले हुआ करती थी। क्वालिटी की शिकायतें बढ़ रही थीं, पुराने ग्राहक साथ छोड़ रहे थे, मजदूरों की नौकरी छोड़ने की दर बढ़ गई थी।

जब भी अर्जुन मिस्टर बत्रा से पूछता, बत्रा हर बार बाजार की मंदी और कंपटीशन का बहाना बनाते। अर्जुन कोशिश करता भरोसा करने की, लेकिन उसका दिल नहीं मानता। उसे अपने दादाजी की बातें याद आतीं – "किसी फैक्ट्री की असली सेहत उसकी बैलेंस शीट में नहीं, सबसे छोटे मजदूर की आंखों की चमक में दिखती है।" लेकिन अर्जुन को वह चमक कहीं नजर नहीं आती थी।

एक दिन मित्तल ग्रुप – जो 40 साल से सबसे बड़े ग्राहक थे – ने कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया, वजह – घटिया क्वालिटी और डिलीवरी में देरी। अर्जुन को एहसास हो गया कि उसकी सल्तनत में कोई गहरी गड़बड़ है। उसने फैसला किया – वह मालिक बनकर नहीं, मजदूर बनकर अपनी फैक्ट्री की सच्चाई जानेगा।

भेष बदलकर मजदूर बना मालिक

अर्जुन ने अपने दादाजी के पुराने दोस्त खान अंकल की मदद ली। दाढ़ी बढ़ाई, पुराने फटे कपड़े पहने, नाम रखा – राजू। खान अंकल ने राजू को फैक्ट्री में दिहाड़ी मजदूर की नौकरी दिलवा दी, सबसे निचले स्तर पर – स्क्रैपयार्ड में। पहली बार मजदूर के तौर पर फैक्ट्री के गेट के अंदर कदम रखते ही अर्जुन का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वह अब सैकड़ों मजदूरों की भीड़ में एक गुमनाम चेहरा था।

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असली औकातशादी का माहौल था। शहर के सबसे बड़े होटल में करोड़पति परिवार की भव्य बारात सज चुकी थी। हर तरफ चमक-धमक, रौनक, और ...
29/10/2025

असली औकात

शादी का माहौल था। शहर के सबसे बड़े होटल में करोड़पति परिवार की भव्य बारात सज चुकी थी। हर तरफ चमक-धमक, रौनक, और अमीरी का प्रदर्शन था। लेकिन इसी भीड़ में एक साधारण परिवार भी आया था – विजय और उसका बेटा आर्यन। विजय ने सादा कुर्ता-पायजामा पहना था, चेहरे पर मेहनत की लकीरें थीं। आर्यन भी साधारण कपड़ों में था। दोनों गेट की ओर बढ़े ही थे कि गेट पर खड़ा गार्ड उन्हें देखकर भौंहें चढ़ा लेता है।

"नाम बताइए, अगर गेस्ट लिस्ट में नाम होगा तभी एंट्री मिलेगी वरना नहीं।"

विजय थोड़े हिचकिचाते हुए बोले, "बेटा बुलावा आया था। दूल्हे के पापा हमारे पुराने रिश्तेदार हैं।"

गार्ड ने ऊपर से नीचे तक देखा, मुस्कुराया नहीं बल्कि तिरछे होठ करके बोला, "बुलावा सबको आता है साहब। लिस्ट में नाम होगा तो अंदर जाओगे, नहीं तो अपने घर जाओ।"

पास खड़े दो वेटर ने धीरे से हंसी दबाई। उनमें से एक ने दूसरे से कहा, "लगता है गांव के आदमी हैं। कपड़े पहनने का तरीका भी नहीं पता। इतनी वीआईपी शादी में आ गए। यार थोड़ा तो सोचना चाहिए।"

आर्यन ने गुस्से से वेटरों को देखा मगर कुछ बोला नहीं। तभी अंदर से एक रिश्तेदार पहचान कर दौड़ा आया, "अरे ये हमारे गेस्ट हैं, इन्हें आने दो।"

गार्ड किनारे हो गया।

अंदर घुसते ही वेलकम एरिया सजा था। बड़े-बड़े मेहमानों को फूल मालाएं पहनाई जा रही थीं, कैमरे तस्वीरें खींच रहे थे। लेकिन विजय और आर्यन पहुंचे तो किसी ने उन्हें देखना तक जरूरी नहीं समझा। वो एक तरफ खड़े रह गए।

उसी वक्त रिया का कजिन करण अपनी सहेली सोनिया से बोला, "इन जैसे लोगों को बुलाने से पूरी क्लास खराब लगती है। देखो ना कैसी शर्मिंदगी लग रही है।"

दोनों हल्की-हल्की हंसी दबाकर आगे बढ़ गईं। विजय ने सुन लिया। चेहरे पर हल्की उदासी छा गई, लेकिन कुछ नहीं बोले। विजय बहुत साधारण, गांव में पले-बढ़े थे। उन्हें लगता था कि सब आदमी गांव जैसे ही होते हैं – जहां कोई कपड़ों का मजाक नहीं उड़ाता।

लेकिन यहां चीजें अलग थीं। दोनों हॉल के अंदर पहुंचे। सामने की पंक्ति में खूबसूरती से सजाई गई वीआईपी सीटें थीं। विजय और आर्यन वहां जाकर बैठ गए। लेकिन कुछ ही देर में करण आकर बोला, "अरे यह वीआईपी सीट्स हैं, आपके लिए पीछे वाली चेयर्स लगी हैं। कृपया वहां बैठ जाइए।"

विजय चुपचाप उठे और पीछे जाकर बैठ गए।

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