13/04/2026
जानिए उस बहादुर हेड कॉन्स्टेबल S. Revathi की पूरी कहानी, जिसकी गवाही की बदौलत 9 पुलिसकर्मी को फांसी की सजा मिली।…
👉 जब सिस्टम खामोश हो जाए, जब सच दबाया जाने लगे, जब ताकत के सामने इंसाफ कमजोर दिखे, तब कोई न कोई खड़ा होता है, और ऐसी ही एक हिम्मत की मिसाल हैं एस. रेवती, तमिलनाडु पुलिस की हेड कॉन्स्टेबल, जो साथनकुलम थाना, तूतीकोरिन में तैनात थीं। साल 2020 के चर्चित साथनकुलम custodial deaths केस में, जहां पी. जयराज और उनके बेटे जे .बेनिक्स को लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया और हिरासत में बेरहमी से पीटे जाने के बाद उनकी मौत हो गई, पूरा देश गुस्से में था लेकिन सच सामने लाना आसान नहीं था। ऐसे में रेवती ने अपनी आँखों से देखी सच्चाई को छुपाया नहीं, अपने ही विभाग के खिलाफ जाकर कोर्ट में गवाही दी और जांच एजेंसियों को सच तक पहुंचने में मदद की, उनकी गवाही इस केस की सबसे मजबूत कड़ी बनी। आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में केस चला और अदालत ने मामले को बेहद गंभीर माना, और “9 पुलिसकर्मियों को फांसी” की सजा सुनाई रेवती ने अपनी नौकरी, करियर और सुरक्षा को दांव पर लगाकर सच बोला, जो असली बहादुरी है। यही वजह है कि आज उन्हें उनकी बहादुरी के लिए याद किया जा रहा है। हमारी मांग है कि केंद्र सरकार हर साल “रेवती ब्रेवरी अवॉर्ड” शुरू करे और ऐसे ईमानदार और निष्पक्ष पुलिसकर्मियों को सम्मानित करे। एक सच्ची गवाही हजार झूठों पर भारी होती है। 🙏 सलाम है इस बहादुर महिला को। all in one Sweet Sona