31/07/2026
दैनिक भास्कर की एक अंडरकवर पड़ताल ने उत्तर प्रदेश के आटा उद्योग से जुड़ी एक बेहद गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है।
रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार ने आगरा और फिरोजाबाद की आटा मिलों में मजदूर बनकर काम किया और पाया कि कुछ मिल संचालक राजस्थान से आने वाले पत्थर के पाउडर (कैल्शियम कार्बोनेट) को आटे में मिलाकर बेच रहे हैं। ऐसा करके वे प्रति किलो लगभग 70–80 पैसे का अतिरिक्त मुनाफा कमा रहे हैं, यानी रोज़ाना लगभग ₹7,000–₹8,000 तक की अतिरिक्त कमाई।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ऐसा मिलावटी आटा कुछ ब्रांडों के नाम से बाज़ार में बिक रहा है और यहां तक कि स्कूलों के मिड-डे मील तक भी पहुंच रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बड़ी मात्रा में या लंबे समय तक ऐसा मिलावटी पदार्थ भोजन में शामिल हो, तो यह स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इससे पाचन तंत्र, लीवर और किडनी पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।
मैं स्वयं D2C इंडस्ट्री से जुड़ा हूं और जानता हूं कि कुछ कंपनियां केवल अधिक मुनाफे के लिए गुणवत्ता से समझौता करती हैं। हम ऐसे मामलों को लगातार उजागर करने की कोशिश करते हैं, लेकिन यदि यह रिपोर्ट सही है तो यह मामला कहीं अधिक बड़ा और चिंताजनक है।
यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो सरकार और FSSAI को तत्काल निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। किसी भी कंपनी या व्यापारी को मुनाफे के लिए लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
एक जागरूक उपभोक्ता बनें। खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनकी गुणवत्ता, स्रोत और विश्वसनीयता पर ध्यान दें।
स्वास्थ्य से बढ़कर कोई मुनाफा नहीं होता।
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