Sadak chhap

Sadak chhap सामाजिक मुद्दा

26/08/2026


11/08/2026

बधाई हो पड़ोसी को बच्चा हुआ है,
पाकिस्तान फिर दो टुकड़ों में बट चुका हैं , बलूचिस्तान ने खुद को स्वतंत्र देश घोषित किया
#बलूचिस्तान #पाकिस्तान
doval

09/08/2026

जय भवानी, जय शिवाजी
#हिंदूसंस्कृती #सनातनसमाचार
#शिवाजी

09/08/2026

मथुरा की मस्जिद से गुंबद का हिस्सा गिर गया
समय का चक्र घूम चुका है और प्रकृति खुद सत्य का मार्ग प्रशस्त कर रही है माधव की लीला अपरंपार है🙏🏻
जो कारसेवा सनातनी नहीं कर पाए
वो कारसेवा स्वयं प्रकृति कर रही है
मंदिर बनाने के साफ संकेत प्रकृति ने दे दिये है
9 अगस्त साधू संतो की कारसेवा से पहले ही सेवा हो गई,,, अद्भुत ❤️🔥🔥
मंदिर वही बनायेंगे !! जय श्री कृष्ण !!
#कारसेवा

07/08/2026

#जयभीम जय मीम का नारा अपने घर पर देना ,
यहां सिर्फ अ@ल्ला का नाम चलेगा समझे नीलांदुओं

07/08/2026

अमेरिका का दोगलापना

07/08/2026

परम पूज्यनीय आदरणीय डॉ मोहन भागवत जी सरसंघचालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

इस देश में गंगा केवल एक नदी का नाम नहीं है, हर बहती धारा गंगा है, बहता जल गंगाजल है... आप सरजू जी से जल भरते काँवरियों स...
06/08/2026

इस देश में गंगा केवल एक नदी का नाम नहीं है, हर बहती धारा गंगा है, बहता जल गंगाजल है... आप सरजू जी से जल भरते काँवरियों से पूछिए, वे कहेंगे कि गंगाजल लेकर जा रहे हैं। नारायणी के तट पर स्नान करने जा रहे किसी तीर्थ यात्री से पूछिए, वे कहेंगे कि गंगा नहाने जा रहे। गंडक के कटाव में घर गँवा चुके व्यक्ति से पूछिए, वह कहेगा कि गंगा जी काट ले गयीं... सब गंगा मईया ही हैं... जमुना, नारायणी, सरजू, सोन, कोसी, कमला सब गंगाजी... सत्यनारायण की कथा कहते पंडितजी चार अंगुल रक्षासूत्र तोड़ कर नारायण को अर्पित करते हैं और पढ़ते हैं - वस्त्र अभावे शुकतम समर्पयामि... वस्त्र नहीं है देवता, सूत को ही वस्त्र मान कर कृपा कीजिये... अब यजमान के पास वस्त्र खरीदने की सामर्थ्य नहीं तो क्या वाह कथा नहीं सुनेगा? गंगा जी दूर हैं तो क्या वह अपने गाँव के भोले बाबा को जल नहीं चढ़ाएगा? गंड़की के जल को ही गंगाजल मानिये और कृपा का प्रसाद दीजिए बाबा...
लोक के लिए गंगा मईया भी कम 'जगता' देवी नहीं रहीं। जगता बोले तो जागृत... जो भक्त की आर्त पुकार शीघ्र सुन ले... संतानहीन देवियों को सबसे अधिक भरोसा गंगा मईया पर ही रहा है... गंगा माँ हैं न, माँ होने का सुख उनसे अधिक कौन जानेगा भला? और फिर जिसके पास जो सम्पत्ति होगी वही न देगा... कमर भर जल में खड़े हो कर घंटों गोहराती देवियां अब भी दिखती हैं... गंगा मईया न सुनती हों, ऐसा तो नहीं हो सकता।
भोजपुरिया जवार में एक बड़ा पुराना सोहर( बच्चों के जनम के समय गाया जाने वाला गीत) है जिसमें अयोध्या की महारानी कौशल्या गंगा में खड़ी हो कर उनसे संतान मांग रही हैं... उनके अश्रुओं से द्रवित होती गंगा उन्हें आशीष देती हैं और फिर संसार को मिलते हैं राम। शास्त्रों में ऐसी कथा हो न हो, लोक में है... लोक कथाओं को हँस कर ख़ारिज कर देने वाला मन भी उस गीत को सुन कर भीज जाता है... गंगा माँ हैं, सचमुच माँगा होगा कौशल्या मईया ने... हमारी माएं गलत थोड़ो कहेंगी...
लोक में कहावत है सब तीरथ बार बार, गंगा सागर एक बार... गंगासागर मतलब वह स्थान जहां गंगा सागर से मिलती हैं। तबतक बूढ़ी हो चुकी होती हैं गंगा मईया... अब उनके स्वभाव में क्रोध नहीं होता, शान्ति होती है... अपनी यात्रा पूरी कर चुकी माता के पास अपने बच्चों के लिए केवल और केवल आशीर्वाद होता है... जैसे बूढ़ी दादियाँ अपने बच्चों को दिन भर आशीषती रहतीं हैं न, वैसे ही... इसी नदी के तट पर पली बढ़ी सभ्यता अपनी इस बुजुर्ग माता पर इतना भरोसा कैसे न करे? उसका आशीष पा लेने के लिए कैसे लालायित न हो?
सावन में गंगाजल ले कर महादेव को चढ़ाने चली भीड़ एक साथ दो देवताओं को प्रसन्न करती है। गंगा स्नान कर के मईया से आशीष पा लिए, जल चढ़ा कर बाबा को प्रसन्न कर लेंगे... सावन का आनंद यही तो है...

शिव भक्त
rivar

  prant baithak
02/08/2026

prant baithak

01/08/2026

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