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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद बड़ी आशा व उम्मीद के साथ भारतीय शेयर बाज़ार म...
07/06/2026

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद बड़ी आशा व उम्मीद के साथ भारतीय शेयर बाज़ार में वित्त वर्ष 2015-16 से 2023-24 तक शुद्ध रूप से 50.5 अरब डॉलर का निवेश किया। इसमें से अकेले 37.03 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान वित्त वर्ष 2020-21 में किया। उसके बाद धीरे-धीरे उनकी आशा निराशा में बदलती गई। वो भी तब, जब 2022-23 को आधार वर्ष बनाने के बाद जीडीपी की रीयल विकास दर वित्त वर्ष 2023-24 में 7.2%, वित्त वर्ष 2024-25 में 7.1% और अभी 2025-26 में7.7% निकाली गई है। सरकारी डेटा बताता है कि अप्रैल 2024 से अब तक एफपीआई हमारे बाज़ार से शुद्ध रूप से 48.74 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। यानी, आठ साल में उन्होंने जितना लगाया था, करीब-करीब उतना दो साल में निकाल चुके हैं। अब हाथी की पूंछ के रूप में 1.76 अरब डॉलर ही बचे हैं। सरकार को लगता है कि यह तात्कालिक मसला है। ईरान युद्ध खत्म होते ही सब सामान्य हो जाएगा। साथ ही उसने एफपीआई निवेश पर 12.5% लॉन्ग टर्म और 30% शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स खत्म कर दिया है। हम देंगे पूरा टैक्स, विदेशी कुछ नहीं! अब तथास्तु में आज की कंपनी…

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05/06/2026

रूमाल को खींचकर धोती बना दिया रिजर्व बैंक ने!
सरकार को खुश करने और माहौल बनाने के लिए रिजर्व बैंक भी झांसा देने में माहिर हो गया है। रिजर्व बैंक की आकस्मिक निधि या कन्टेंजेंसी फंड (सीएफ) 2023-24 से 2024-25 के बीच ₹1,13,805.93 करोड़ बढ़ाकर ₹4,28,621.03 करोड़ से ₹5,42,426.96 करोड़ कर दी गई। इस बार इसे मात्र ₹25,096.23 करोड़ बढ़ाकर 5,68,333.19 करोड़ किया गया है। फिर भी रिजर्व बैंक की विज्ञप्ति में बताया गया है कि ‘वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्य’ के मद्देनज़र इस बार सीआरबी में ₹1,09,379.64 करोड़ ट्रांसफर किए गए हैं, जबकि पिछले साल ₹44,861.70 करोड़ ही ट्रांसफर किए थे। रिजर्व बैंक की 2025-26 की सालाना रिपोर्ट के एक फुटनोट में भी यही बात कही गई है। बता दें कि रिजर्व बैंक की पूंजी, रिजर्व फंड, आकस्मिक निधि (सीएफ) और ऐसेट डेवलपमेंट फंड (एडीएफ) को मिलाकर उसकी एवेलेबल रीयलाइज्ड इक्विटी (एआरई) या कंटिन्जेंट रिस्क बफर (सीआरबी) बनता है। पांच साल से रिजर्व की पूंजी (₹5 करोड़), रिजर्व फंड (₹6500 करोड़) और एडीएफ ₹22,974.68 करोड़ पर जस का तस स्थिर है। केवल सीएफ बढ़ाया जा रहा है जिसके आधार पर सीआरबी की रकम बढ़ती है। अभी 2025-26 में एआरई या सीआरबी की रकम ₹5,97,812.87 करोड़ है। यह 2024-25 की रकम ₹5,71,906.64 करोड़ से ₹25,906.23 करोड़ ही ज्यादा है। रिजर्व बैंक कैसे इसे ₹1,09,379.64 करोड़ की वृद्धि बता रहा है, यह समझ से परे है। अब शुक्रवार का अभ्यास…

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में रिजर्व बैंक बैंक की बैलेंस शीट ₹76,25,421.93 करोड़ थी। तब उसने इसका 7.5% हिस्सा कंटिन्जेंट ...
04/06/2026

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में रिजर्व बैंक बैंक की बैलेंस शीट ₹76,25,421.93 करोड़ थी। तब उसने इसका 7.5% हिस्सा कंटिन्जेंट रिस्क बफर (सीआरबी) में डाला था। यह रकम 5,71,906.64 करोड़ रुपए थी। बीते वित्त वर्ष 2025-26 में रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट 20.6% बढ़कर ₹91,97,121.08 करोड़ हो गई। पश्चिम एशिया संकट के चलते अर्थव्यवस्था जिस तरह दबाव में है और रुपया लगातार कमज़ोर हो रहा है, उसमें सीआरबी को घटाने का कोई तुक नहीं था। फिर भी सरकार को ज्यादा लाभांश देने लिए इसे घटाकर 6.5% कर दिया गया। रिजर्व बैंक बोर्ड ने पांच साल मेें पहली बार सीआरबी का अनुपात घटाया है। यह 2020-21 में 5.5%, 2021-22 में 6%, 2022-23 में 6.5% और 2024-25 में 7.5% रखा गया था। अगर घटाने के बजाय 2025-26 में इसे 7.5% रखा गया होता तो सीआरबी की रकम 6,89,784.08 करोड़ होती। लेकिन सीआरबी को 6.5% रखने से यह रकम ₹5,97,812.87 करोड़ रह गई। इस तरह सीआरबी से चुराए गए ₹91,971.21 करोड़ मोदी सरकार को दिए गए ₹2,86,588.46 करोड़ लाभांश का हिस्सा बन गए। देश की शीर्ष मौद्रिक संस्था, रिजर्व बैंक के साथ यह धूर्तता न की गई होती तो मोदी सरकार को इस साल मिला लाभांश ₹1,94,617.25 करोड ही रहता, पिछले साल के ₹2,68,590.07 से कम। अब गुरुवार की दशा-दिशा…

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में रिजर्व बैंक बैंक की बैलेंस शीट ₹76,25,421.93 करोड़ थी। तब उसने इसका 7.5% हिस्सा कंटिन्जेंट रिस्क बफर ...

इस बार रिजर्व बैंक से ₹2,86,588 करोड़ का रिकॉर्ड लाभांश वसूल करने में मोदी सरकार ने हद दर्जे की चालाकी बरतते हुए देश की ...
03/06/2026

इस बार रिजर्व बैंक से ₹2,86,588 करोड़ का रिकॉर्ड लाभांश वसूल करने में मोदी सरकार ने हद दर्जे की चालाकी बरतते हुए देश की आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। यह फैसला वैसे तो रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में उसके केंद्रीय बोर्ड ने लिया है। लेकिन सारा देश जानता है कि मोदी सरकार ने रिजर्व बैंक से लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक में शीर्ष पदों पर अपने पिट्ठू बैठा रखे हैं। बता दें कि रिजर्व बैंक आरबीआई एक्ट, 1934 के सेक्शन-47 के तहत रिस्क के लिए सही प्रावधान और उचित लाभांश का फैसला करता है। मोदी सरकार ने दिसंबर 2018 में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति बनाई थी। अगस्त 2019 में इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद से ही रिजर्व बैंक के खजाने की सरकारी लूट शुरू हो गई। समिति ने कहा था कि रिजर्व बैंक बराबर एक कंटिन्जेंट रिस्क बफर (सीआरबी) बनाए रखे जिसकी रकम उसकी बैलेंस शीट के 5.5% से 6.5% तक रहे। रिजर्व बैंक ने पिछले साल यह रेंज बदलकर 4.5% से 7.5% कर दी। वित्त वर्ष 2024-25 में रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट का 7.50% हिस्सा सीआरबी में डाला गया। लेकिन इस साल पश्चिम एशिया संकट और रुपए पर दबाब की आपदा के बीच भी सरकार को ज्यादा लाभांश देने के लिए इसे घटाकर 6.5% कर दिया गया। अब बुधवार की बुद्धि…

इस बार रिजर्व बैंक से ₹2,86,588 करोड़ का रिकॉर्ड लाभांश वसूल करने में मोदी सरकार ने हद दर्जे की चालाकी बरतते हुए देश की आ....

02/06/2026

अर्थव्यवस्था टूटी, मगर वसूली धुआंधार!
भाजपा अपनी विभाजक राजनीति के दम पर केंद्र से लेकर राज्यों तक, पूरब से लेकर पश्चिम तक सत्ता पर कब्जा करती गई। लेकिन उसकी राजनीति का मूल मकसद है जनधन या टैक्स के अकूत खजाने को खर्च करने का अबाधित अधिकार हासिल करना। टैक्स का खज़ाना तब तक नहीं बढ़ सकता, जब तक अर्थव्यवस्था नहीं बढ़ती। मगर राजनीतिक सत्ता ही नहीं रही तो टैक्स का खजाना मिल नहीं सकता। इन दो विपरीत तत्वों को साधने के लिए भाजपा ने तीन रास्ते अपनाए। एक तो उसने सत्ता तंत्र के दम पर येनकेन-प्रकारेण अपनी राजनीतिक विजय सुनिश्चित कर ली। दूसरे, उसने टैक्स वसूलने का कोई बिंदु नहीं छोड़ा। बचत को प्रोत्साहित करनेवाली सारी टैक्स रियायतें खत्म कर दीं। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स शून्य से बढ़ाकर 12.5% कर दिया। बिना किसी सामाजिक सुरक्षा वाले देश में पेंशन तक पर टैक्स लगा दिया। पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और सेस लगाकर उसने 12 साल में ₹43 लाख करोड़ वसूले हैं। जीएसटी जैसे परोक्ष टैक्स से सरकार को 28% कर राजस्व मिलता है। लेकिन इतना सारे टैक्स से सरकार संतुष्ट नहीं हुई। उसने सरकारी उद्यमों से लाभांश वसूली बढ़ा दी। इसके ऊपर से वो रिजर्व बैंक से अब तक ₹14,41,127 करोड़ वसूल चुकी है। इसमें से ₹2,86,588 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली तो उसने इसी साल की है। अब मंगलवार की दृष्टि…

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