08/09/2026
बाज़ार में मूल्य समय के साथ बाद में घट-बढ़ सकते हैं। लेकिन एक बार बाज़ार के किसी मूल्य पर समय का ठप्पा लग गया तो उसे बाद की किसी तारीख में संशोधित करके घटाया-बढ़ाया नहीं जा सकता। मान लीजिए कि आपने जून 2025 में एक किलो घी 500 रुपए में खरीदा। जून 2026 में उसी घी के दाम 550 रुपए हो गए तो 10% की बढ़ोतरी हो गई। ऐसा हो नहीं सकता कि घी का जो बाज़ार मूल्य 500 रुपए प्रति किलो था, उसे आज आप जबरन घटाकर 485 रुपए बता दें और कह दें कि पिछले साल के मुकाबले बाज़ार मूल्य में बढ़ोतरी 10% नहीं, 13.40% हुई है। लेकिन मोदी सरकार के अर्थशास्त्री भारतीय अवाम को यही घुट्टी पिलाने में लगे हैं। उनका कहना है कि जीडीपी की पुरानी सीरीज़ में 2025-26 की पहली तिमाही में बाज़ार मूल्य पर देश का जो जीडीपी था, वो असल में ₹86.05 लाख करोड़ नहीं, बल्कि ₹80 लाख करोड़ था। ऐसा कैसे हो सकता है कि पिछले साल का बाज़ार मूल्य आप टाइम-मशीन पर पीछे जाकर बदल दें? आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने पर रीयल जीडीपी और रीयल विकास दर ज़रूर बदल जाएगी। लेकिन कल के बाज़ार मूल्य को कोई आज कैसे बदल सकता है? मगर, मोदी सरकार 2022-23 से ही नॉमिनल या बाज़ार मूल्य पर पहले निकाले गए जीडीपी को बाद में घटाती रही है। आखिर क्यों? अब मंगलवार की दृष्टि…
बाज़ार में मूल्य समय के साथ बाद में घट-बढ़ सकते हैं। लेकिन एक बार बाज़ार के किसी मूल्य पर समय का ठप्पा लग गया तो उसे ब...