02/03/2026
जीवन में किसी भी चीज़ को हासिल करने के लिए मेहनत के साथ-साथ सब्र की भी ज़रूरत होती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण संजू सैमसन हैं। पिछले एक साल में संजू के साथ क्या कुछ नहीं हुआ। शुभमन गिल के लिए उन्होंने अपनी बैटिंग पोज़िशन छोड़ी। एशिया कप में फिनिशर की भूमिका निभाई, फिर प्लेइंग-11 से ड्रॉप कर दिए गए। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ जब मौका मिला, तब फॉर्म ने साथ नहीं दिया। धीरे-धीरे सब मानने लगे कि अब शायद संजू का खेल खत्म हो चुका है।
संजू को डगआउट में बैठा देखकर दुख होता था, लेकिन किया भी क्या जा सकता था? अभिषेक शर्मा का साथ देने के लिए टीम में विस्फोटक बल्लेबाज़ ईशान किशन की वापसी हो चुकी थी। उनके आने के बाद टीम संयोजन में संजू के लिए जगह बन ही नहीं पा रही थी।
लेकिन जिस पर ऊपरवाले का आशीर्वाद हो, उसे कौन रोक सकता है। अभिषेक शर्मा की फॉर्म बिगड़ी और संजू को टीम में शामिल करना मजबूरी बन गया। कुछ मैचों में उन्हें अच्छी शुरुआत मिली, लेकिन वे उसे बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पाए। यह सिलसिला पिछले कई महीनों से संजू के साथ चलता आ रहा था।
इसके बावजूद संजू ने हार नहीं मानी। अंदर से वह दुखी ज़रूर थे, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य बनाए रखा। फिर वह शाम आई, जिसने संजू को रातों-रात हीरो बना दिया। सेमीफाइनल में वेस्ट इंडीज के खिलाफ मुकाबला जीतना बेहद ज़रूरी था। रन चेज़ बड़ा था, इसलिए उम्मीदें अभिषेक, ईशान और सूर्यकुमार यादव से थीं, लेकिन इस अहम मुकाबले में भारत के ये तीनों सूरमा जल्दी ढेर हो गए।
जीत की मशाल लेकर जो खिलाड़ी आखिर तक मैदान में डटा रहा, वह थे संजू सैमसन।
संजू ने पूरे धैर्य के साथ बल्लेबाज़ी की। न कोई जल्दबाज़ी दिखाई, न कोई गलत शॉट खेला। मानो उन्हें पहले से पता हो कि यह दिन उनका है और टीम इंडिया को जीत दिलाने वाला वही खिलाड़ी होंगे।