27/02/2026
200 साल पुराने मठ की Property हड़पने Mahant पर करवाया Muslim महिला से हमला?| Swami Kaushalanand Giri
Shinde
200 साल पुराने मठ की अस्मिता पर संकट? स्वामी कौशलानंद गिरि जी महाराज के समर्थन में उठा संत समाज
राघवानंद मठ विवाद | हिंदुत्व बनाम साज़िश? | निष्पक्ष जांच की मांग
आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे मुद्दे की, जो केवल एक मठ या एक संत तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, परंपरा और सनातन संस्कृति से जुड़ा हुआ है।
करीब 200 वर्षों का गौरवशाली इतिहास समेटे स्वामी राघवानंद मठ शिव मंदिर सन्यास आश्रम… एक ऐसा पवित्र स्थल, जहां दशकों नहीं बल्कि सदियों से साधना, सेवा और सनातन धर्म की अखंड ज्योति प्रज्वलित होती रही है। यह मठ केवल एक धार्मिक परिसर नहीं, बल्कि हिंदू समाज की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रहा है—जहां से संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रधर्म का संदेश प्रसारित होता रहा है।
साल 2018 में जब मठ के पूज्य स्वामी प्रेमानंद गिरि जी महाराज ब्रह्मलीन हुए, तब परंपरा के अनुसार इस पवित्र धरोहर की जिम्मेदारी संत समाज और विधिवत नियुक्त मठाधीश्वर के हाथों में जानी थी। लेकिन आरोप है कि इसी दौर में नितिन शाह और प्रियेन शाह नामक व्यक्तियों ने मठ पर जबरन कब्जा कर लिया।
मठाधीश्वर स्वामी कौशलानंद गिरि जी महाराज का कहना है कि जब उन्हें विधिवत रूप से मठाधीश्वर नियुक्त किया गया, तब उन्होंने मठ की गरिमा को पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया। उनके अनुसार, मठ परिसर में ऐसे तत्व सक्रिय थे जिनकी गतिविधियां सनातन मूल्यों के विपरीत थीं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने मठ की पवित्रता की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाए और बाहरी हस्तक्षेप को समाप्त किया।
स्वामी कौशलानंद गिरि जी महाराज का आरोप है कि जब उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम का विरोध किया और संत समाज को सच्चाई से अवगत कराया, तो उनके खिलाफ लगातार झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। उन्हें मानसिक, सामाजिक और कानूनी रूप से प्रताड़ित करने की कोशिश की गई।
जब यह मामला संत समाज के संज्ञान में आया, तो व्यापक स्तर पर आंदोलन भी हुआ। कुछ समय के लिए स्थिति सामान्य दिखाई दी, लेकिन अब मठाधीश्वर का दावा है कि उनके खिलाफ गंभीर षड्यंत्र रचा जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें जान से मारने तक की साजिश की जानकारी मिली है।
इस पूरे प्रकरण में मेहुल शाह का नाम भी सामने आया है, जिन पर एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया गया है।
अब सवाल केवल मठ की संपत्ति का नहीं, बल्कि हिंदुत्व की अस्मिता का है। संत समाज का स्पष्ट कहना है कि यदि आज मठों और आश्रमों की पवित्रता पर आंच आती है, तो यह पूरे सनातन तंत्र पर आघात होगा।
इतना ही नहीं, स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जोन 2 के डीसीपी मोहित गर्ग पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि कथित रूप से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है, और बी.पी. रोड पुलिस थाने को भी सक्रिय रूप से कदम उठाने से रोका जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि सत्य सामने आ सके।
हिंदू समाज के लिए यह समय सजग रहने का है। आस्था के प्रतीकों की रक्षा केवल संतों की नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु की जिम्मेदारी है। प्रशासन से अपेक्षा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या षड्यंत्र पाया जाता है तो कठोर कार्रवाई की जाए, और 200 वर्षों की इस आध्यात्मिक परंपरा को सुरक्षित रखा जाए।
सनातन धर्म संघर्षों से गुजरकर और अधिक प्रखर हुआ है।
अब देश देख रहा है—क्या सत्य और धर्म की विजय होगी?
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