Baalloons

Baalloons baalloons is a film production house in mumbai, incorporated in the year 2006 under the name of SIF... We take things to the next level and challenge to face.

baalloons is a film production house in mumbai, incorporated in the year 2006 under the name of SIF.. We plan, create and implement solutions within an infinite range of celluloid communications. From feature films, tv shows, commercial short films, ad film, corporate films to documentaries, we harness diverse media and grab audience attention. We provide communication solutions that are original

and effective. We cater to all stages of creative process, from concept to pre-production, production & post-production work to final delivery. We believe in the power of your story more than you can possibly imagine. Once our minds get a handle on what you want to accomplish, your story moves from our head to our heart; where the creating really begins. We understand the value of good creativity so we produce solution of celluloid that have longevity and work across all media. We strive to be uncomplicated; to be concise, convenient and straightforward in all our interactions with you. We move forward and we don't look back. we’re friendly and approachable and we listen – really listen – to make sure the end product is what you want. We pride ourselves of a vivacious work culture with in our team, hence delivering the product effectively with cutting edge technology. We are experienced enough to understand that time scales and budgets are paramount and we always communicate regularly with you throughout a project to ensure clarity in this regard. Our Team Comprises

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जानेमाने लेखक और पद्मश्री से सम्मानित अभिनेता TomAlter  का मुंबई में निधन, कैंसर से जूझ रहे थे टॉम अल्टर...RIP...
30/09/2017

जानेमाने लेखक और पद्मश्री से सम्मानित अभिनेता TomAlter का मुंबई में निधन, कैंसर से जूझ रहे थे टॉम अल्टर...

RIP...

29/09/2017
29/09/2017

'सारे मुसलमान सबीन के साथ मर क्यों न गए'
(लल्लनटॉप से साभार...)

मोहम्मद हनीफ ने 17 दिसंबर 2015 को अमेरिकी अखबार द न्यू यॉर्क टाइम्स के लिए एक आर्टिकल लिखा. टाइटल था, मैं मुसलमानों के लिए फिक्रमंद क्यों होता हूं. आर्टिकल अंग्रेजी में था. मैंने उसे अपनी समझ भर हिंदी में पेश किया है. क्यों किया है. क्योंकि इसे कई तरक्कीपसंद लोग फेसबुक पर शेयर कर रहे थे. क्योंकि ये आर्टिकल आईएस, जिहाद, आतंक और डोनाल्ड ट्रंप और टॉलरेंस डिबेट के वक्त पढ़ना मौजू है. क्योंकि मोहम्मद हनीफ जब कुछ लिखते हैं, तो पूरी दुनिया गौर करती है. और सबसे बड़ी वजह. हिंदुस्तान के हिंदुओं को इसके जरिए मुसलमानों को समझने का एक और मौका मिलेगा. तो अब शुरू हो जाइए भाईजान.

मैं मुसलमानों के बारे में परेशान होता हूं. इस्लाम सिखाता है कि सब इंसानों की चिंता करो. जानवरों की भी. लेकिन जिंदगी बहुत छोटी है. और मुझे तो सब मुसलमानों की फिक्र करने के लिए भी पूरा टाइम नहीं मिल पाता.
वैसे मैं उन मुसलमानों को लेकर परेशान नहीं होता हूं जिन्हें यूरोप या अमेरिका में नस्ल के मुताबिक होने वाले भेदभाव को झेलना पड़ता है. जिन पर ये शक होता है कि कहीं ये दफ्तर में सबका कत्ल करने के इरादे से तो नहीं आए. या फिर वो जिन्हें एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन चेक से पहले पुलिस वाले पकड़ ले जाते हैं और घंटों पूछताछ के बाद छोड़ देते हैं. क्योंकि तब मैं खुद से ये कह लेता हूं कि आखिर इतनी बेइज्जती के बाद भी सफर के आखिर में उन्हें पानी, बिजली और तमाम नागरिक सुविधाएं तो मिल रही हैं न. और जहां वे हैं, वहां कहने को ही सही, बराबरा का नारा तो लगातार उछाला जाता है.

मैं उन मुसलमानों के लिए जरूर परेशान होता हूं, जिन्हें मुसलमान ही परेशान करते हैं. उनकी अपनी मादरी जमीं पर. ये ऐसी जगहें होती हैं, जहां मेजॉरिटी मुसलमानों की ही होती है. अब पाकिस्तान को ही देख लीजिए. मेरी कराची में कैफे चलाने वाली दोस्त सबीन महमूद का कत्ल कर दिया गया. इस साल की शुरुआत में. क्योंकि कट्टरपंथियों को लगा कि सबीन अच्छी मुसलमान नहीं है. और ये सब कहां हुआ. प्यारे पाकिस्तान में. जो इस्लाम को मानने वालों के लिए बनाया गया था. ताकि उन्हें शायद अपनी जिंदगी में किसी गैरमुसलमान से हाथ भी न मिलाने पड़ें.

पर इससे भी ज्यादा चिंता मैं अपने जैसे मुसलमानों के लिए करता हूं. वो जिनसे ये उम्मीद की जाती है कि वे दुनिया को बताएं कि आखिर असली इस्लाम क्या है. हम उदारवादी यानी मॉडरेट मुस्लिम कहलाते हैं. हमसे कहा जाता है कि ये सारी जो बहस चल रही है आप सब उसमें आगे बढ़कर हिस्सा लो. आप लोग तय करो कि इस्लाम पर क्या बात है. मुल्लाओं और कट्टर लोगों के हाथ से ये डिबेट छीन लो. ऐसा लगता है कि जैसे हमें एमए की क्लास में टर्म पेपर लिखने के लिए कहा जा रहा हो. मगर जनाब, यहां तो 1.6 अरब और निहायत ही अलग अलग सोच वाले मुसलमानों के लिए टर्म्स और कंडिशंस तय करने पर बात हो रही है.

मैं उन टीवी पंडितों के बारे में भी फिक्रमंद होता हूं. जो कहीं भी कुछ भी आतंकी घटना होने के चंद घंटों के भीतर स्क्रीन पर नजर आने लगते हैं. उन्हें हम मुसलमानों के बदले हर कांड की निंदा करनी होती है, बचाव करना होता है या फिर सफाई देनी पड़ती है. या फिर ऐसे सफेदपोश लोग, जिन्हें बार बार दुनिया को समझाना पढ़ता है कि हे डूड, इस्लाम तो बहुत पीसफुल रिलीजन है.

हां, ये सही बात है. इस्लाम वर्ड का मतलब शांति होता है. डिक्शनरी में ऐसे ही दर्द है. मगर जब किसी आतंकी हमले में किसी की बेटी, बेटा या पार्टनर मर जाए तो क्या हम उनके सामने डिक्शनरी लहराएं. और क्या कहें. देखो, यहां देखो. यहां लिखा है इस्लाम मतलब पीस.
ये कहना वैसा ही है, जैसे ये कहना कि हिंदुत्व मतलब गाय की इज्जत. बौद्ध मतलब कमल मुद्रा वाली सिटिंग पोजिशन. यहूदी और ज्यू मतलब जमीन का झगड़ा. और इसाई, क्या वो हमेशा नफरत के बदले दया ही दिखाते हैं. दूसरा गाल आगे बढ़ाते हैं.

जब भी कोई कहता है कि इस्लाम शांति पसंद मजहब है, मेरा दिल करता है कि जोर से चीखूं. उन्हें डराऊं और कहूं, जरा पीछे पलट देखो.
इस्लाम क्या है, ये समझाना एक नामुमकिन सा काम है. कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप किस किस्म के मुसलमान हैं. वैसा जो बहुत पाबंदी है, शराब नहीं पीता, हराम का गोश्त नहीं खाता, जिहाद नहीं करता. या फिर वैसा, जो इत्तफाकन मुसलमान है, सब कुछ थोड़ा थोड़ा करता है, मगर जिहाद से तो कोसों दूर है. या फिर इन दोनों के बीच का कोई. हम अगर ये सब नहीं बताते समझाते तो कहा जाता है, अच्छा कम से कम निंदा ही कर दो. ऐसा लगता है कि मुसलमान मुंह पर निंदा करने में, निंदा का शोऑफ करने में कुछ पीछे रह गए हैं.

पर अगर मैं एक अच्छे मुसलमान के तौर पर उन सारी बुरी चीजों की निंदा करने लगूं, जिन्हें मुसलमानों ने अंजाम दिया है. तो मेरे पास तो पांच वक्त की नमाज पढ़ने तक की फुरसत न रहेगी. नमाज तो दूर मैं अपने बच्चों को चीज और मैकरोनी भी बनाकर नहीं खिला पाऊंगा. और उन्हें पार्क ले जाकर घुमाना. भूल ही जाइए जनाब. और तब, मैं और बुरा मुसलमान हो जाऊंगा.

हमें बार बार बताया जाता है कि कुछ मुसलमान हैं, जो पूरे इस्लाम को, हम जैसे लोगों को बदनाम कर रहे हैं. मुझे लगता है कि इन कुछ बुरे मुसलमानों में मीडिया के वे लोग भी शामिल हैं, जो बम फटते ही सफाई देने के लिए स्क्रीन पर नजर आने लगते हैं. उन्हें ये गलतफहमी है कि वे अपने लॉजिक पेश कर इस्लाम की इज्जत बचा लेंगे. उन्हें ये खुशफहमी है कि वे अखबारों में लंबे लंबे एडिटोरियल पीस लिखकर ये तसल्ली करवा देंगे कि हम मुसलमान तो सुकून से ही रहना चाहते हैं.

और इन लोगों की दलीलें क्या होती हैं. ये कहते हैं कि देखिए ये जो जिहाद के नाम पर बंदूक और बम उठाए घूम रहे हैं. जिन्होंने सैकड़ों को मार दिया है, वे जो कुरान पढ़ रहे हैं, उनकी समझ कमजोर है. कुछ हिम्मतवाले तो फिर इस बहस को यहां ले जा पटकते हैं कि हमसे क्या पूछते हैं जनाब. आपके जो सेकुलर जिहादी हैं, जो स्कूलों में गन लेकर धांय धांय कर देते हैं. उनका क्या. उनकी तफरीह सुनकर लगता है कि ये कहा जा रहा है कि मुसलमान आतंकवादी के साथ भी वैसा ही सुलूक होना चाहिए, जैसा गैरमुसलमान के साथ हो. जैसे अमेरिका में कॉलेज कैंपस में गोलियां बरसाने वालों के साथ होता है. या फिर जैसा इराक पर कब्जा करने वालों के साथ होता है.

ओह ये क्या. क्या हम कातिलों को समानता के नजरिए से देखने की वकालत कर रहे हैं. ओहो, लगता है शांति की बात हो रही है.
वे बार बार हमें बताते हैं कि इस्लाम हम धर्म की इज्जत करना सिखाया है. और ये बताने के लिए एक बार फिर से धार्मिक किताबों की तरफ इशारा किया जाता है. देखो, ये ईसा मसीह हैं. ये भी हमारे ही पैगंबर हैं. मुहम्मद साहब से पहले आए हुए. पर वो ये नहीं समझा पाते कि कोई मजहब या खुदा क्यों है और कैसे बेहतर है और किससे बेहतर है. आखिर भगवानों को नापने की ताकत का पैमाना क्या है.

हमें बार बार हौसला दिया जाता है. कहा जाता है कि इस्लाम में भी उदारता है. सूफी धारा की तरफ देखो. मगर क्या वाकई. रूमी और ऐसे ही कुछ कवियों की कविताओं पर झूमकर इस मुश्किल का हल मिल सकता है. वो तो इस तरह का कोई नाटक भी करने को तैयार नहीं कि हमारे पास हल है. पूछिए उनसे. क्या है मुसलमान होना. वो कहेंगे. आओ, कुछ संगीत सुनते हैं. झूमते हैं.

पर शुक्र है. कम अज कम वो इस्लाम के टीवी प्रवक्ताओं के मुकाबले ईमानदार तो हैं. पूछने पर कुछ भी अटरम पटरम बोलना तो शुरू नहीं कर देते.
इसलिए मैं इस्लाम के तमाम स्पोक्सपर्सन को, पीआर वालों को थैंक्यू बोलना चाहता हूं. वो बार बार दुनिया को ये बताते हैं कि इस्लाम सिर्फ एक नस्ल भर नहीं है. हममें से कुछ लोग चीनी जबान बोलते हैं. कोई स्वाहिली बोलता है. कोई गे है, कोई पेंटर है. कोई वकील है. कोई रंडी है. कोई दल्ला है. कोई ड्रम बजाता है. और कोई बंदूक उठाकर अंधाधुंध गोलियां चलाता है. मुसलमान आपस में ज्यादातर चीजों पर अलग अलग राय रखते हैं. इस जिंदगी को कैसे जिया जाए. अल्लाह को कैसे पूजा जाए. मौत के बाद क्या होगा, इन सवालों पर भी हजार अलग अलग किस्म के जवाब हाजिर हैं. बाहर का छोड़िए, मेरे अपने घर में कुल छह लोग हैं. और हम शायद ही एक बात पर मानते हों. और ये तब है सरकार, जब छह में एक बच्चा है और दो कुत्ते. यानी दुनिया के हिसाब से समझदार सिर्फ तीन.

वैसे अच्छा मुसलमान कौन है. वो जो इबादत करता है और बाकी के मसले अल्लाह पर छोड़ देता है. या फिर वो जो पूजा पाठ के चक्कर में ही नहीं पड़ता और बिना इस ठठ करम के सब अल्लाह पर छोड़ देता है. या फिर वो जो सोचता है कि अल्लाह तो बहुत बिजी है. तो दुनिया के कुछ मसले मैं ही निपटाए देता हूं. और फिर शॉर्टकट लेकर जहान्नुम और जन्नत के टिकट बांटने लगता है.
अरे नहीं नहीं, ये वाला नहीं हो सकता. अभी बताया था न. इस्लाम तो शांति वाला रिलीजन है.

वैसे एक बात कहने की खुजली और मच रही है. ये मुसलमानों के नुमाइंदे कविता के अंदाज में आंख मूंद जो बोलते हैं, कि इस्लाम कहता है कि एक इंसान को मारना पूरी इंसानियत की कौम को मारने के बराबर है. तो फिर सबीन महमूद जो मर गई, फिर भी पूरा पाकिस्तान, पूरी इंसानियत कैसे जिंदा है. उनके कातिल कैसे जिंदा हैं..?

दूरदर्शन पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन क्या उतनी कामयाबी मिली ?
14/09/2017

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दूरदर्शन ने अकेले हमें इतना कुछ दिया है कि आज के सौ चैनल मिलकर भी नहीं दे सकते...
14/09/2017

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Jessica Simpson Steps Out Amid Pregnancy Rumors....Is Jessica Simpson hiding something under that baggy sweater? Just on...
30/11/2012

Jessica Simpson Steps Out Amid Pregnancy Rumors....

Is Jessica Simpson hiding something under that baggy sweater? Just one day after Us Weeklyreported that the singer-turned-fashion mogul is 9 weeks pregnant with her second child, she arrived at Los Angeles International on Thursday bundled up in a loose-fitting gray sweater, black blazer, and leggings with a large purse on her shoulder and 7-month-old daughter Maxwell in her arms, ensuring that no one could get a good look at her belly. It should be noted that Simpson's fiancé Eric Johnson walked behind her empty-handed … making it seem like a conscious decision for the maybe-pregnant star to carry adorable little Maxwell.

Simpson, 32, has remained mum on the rumored pregnancy and her publicist denied Us' request for a comment. But her silence could obviously be because like most expectant moms, she wants to wait until she's past her first trimester. Before she announced her first pregnancy on Halloween last year dressed as a "mummy," it was obvious for weeks that Simpson was with child, even though she would not confirm nor deny it.
As for getting pregnant again so soon after welcoming Maxwell, a source told Us, "It definitely wasn't planned." It certainly seemed like a second child was not on Simpson's agenda in May when she toldPeople, "I don't want to have another baby right away but I do want to have more kids. Having babies back to back has to be so hard."

Manisha diagnosed with cancer.......?Manisha Koirala was admitted to our hospital yesterday," Jaslok Hospital spokespers...
29/11/2012

Manisha diagnosed with cancer.......?

Manisha Koirala was admitted to our hospital yesterday," Jaslok Hospital spokesperson Krishnakant Dasyam told agencies,"She is undergoing some medical tests and will be in the hospital for some time," Dasyam, who is also Head Marketing at Jaslok Hospital & Research Centre, said. however the Times of India report claims that the doctors have diagnosed cancer and she has taken the news calmly. Manisha's brother Sidharth has rushed to her aid.
Manisha's mother Sushma and her father have also joined her at Jaslok Hospital…Manisha, according to reports was in Nepal when she became ill. She fainted and she was flown in to Mumbai for more tests.
Earlier this year, there were reports that Manisha has ended her two year old marriage with husband Samrat Dahl…Soon after there was a status update on a social networking website in which she said she is not happy with the marriage…Family and friends have tried to talk things over with the couple, but if the latest reports are true, Manisha is all set to divorce Samrat… A couple of months before she spotted in a really sad state walking out of a party in Mumbai…

28/11/2012
Gujrat election .....
26/11/2012

Gujrat election .....

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