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सिद्धांतों से समझौता नहीं करूंगा, ज़रूरत पड़ी तो इस्तीफ़ा दे दूंगा। मैं इरपोक जज नहीं हूं- रवि कुमार दिवाकर जजअपर जिला ए...
10/09/2026

सिद्धांतों से समझौता नहीं करूंगा, ज़रूरत पड़ी तो इस्तीफ़ा दे दूंगा। मैं इरपोक जज नहीं हूं- रवि कुमार दिवाकर जज

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट रवि कुमार दिवाकर ने सोमवार को हत्या के एक और मामले में दोषी को फांसी की सजा सुनाने के दौरान इस्तीफा देने की चेतावनी दी है। न्यायाधीश ने अपने 77 पन्ने के आदेश में उनके न्यायालय से लूट व हत्या की 100 पत्रावलियां वापस करने पर दुख प्रकट किया है।

उन्होंने निर्णय में लिखा कि वर्तमान समय में वे कुछ व्यवहार से बहुत आहत और दुखी हैं। वे अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि पत्रावलियां वापस होने पर पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के माफिया ने उन्हें संदेश भिजवाया था कि अभी तो सिर्फ पत्रावलियां वापस हुई हैं, अगर हमारे पीछे पड़े या कोई टिप्पणी की तो वह उनकी कोर्ट चेंज करवा देंगे या उनका जिले से बाहर ट्रांसफर करा देंगे।

न्यायाधीश ने लिखा कि यदि मैं माफिया, बाहुबलियों, अपराधियों से भयग्रस्त हुआ तो मेरे लिए यह उचित होगा कि मैं इस पवित्र न्यायिक संस्था से त्यागपत्र दे दूं। मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नहीं। जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चल सकता हूं, तब तक सर्विस करूंगा अन्यथा त्यागपत्र दे दूंगा। जब तक जज की कुर्सी पर हूं तो निर्णय लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा ही होगा।

जनपद में लगभग नौ माह में हत्या के 10 मामलों में एक महिला समेत 23 लोगों को फांसी की सजा सुनाने वाले अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर से 18 अगस्त को तत्कालीन जिला जज बीरेन्द्र कुमार सिंह ने लूट व हत्या की विचाराधीन 100 पत्रावलियां वापस ले ली थीं। इन पत्रावलियों की सुनवाई सत्र न्यायालय में करने के आदेश दिए थे। इनमें रुड़की के कुख्यात बदमाश चैनू पंडित की पत्रावली भी शामिल थी।

बरेली से जनपद में 29 नवंबर 2025 को न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर स्थानांतरित होकर आए थे, जिन्हें अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर हत्याकांड की लगभग 10 वर्ष पुरानी पत्रावलियों (मुकदमों) की सुनवाई कर रहे हैं।

न्यायाधीश ने अपनी सुरक्षा पर उठाए सवाल
सोमवार को मृत्युदंड का निर्णय सुनाते हुए जज दिवाकर ने एक बार फिर अपनी सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने निर्णय में लिखा कि पूरे उत्तर प्रदेश में अपराधियों द्वारा अपराध करने का तरीका एक सा नहीं है। पूर्वांचल में अपराध करने का तरीका अलग है, बुंदेलखंड में अलग और पश्चिमी उप्र में अपराध करने का तरीका बिल्कुल ही अलग है।

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