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10/10/2025

🔥 गाजीपुर में सनसनी — भाजपा नेता अमितेश मिश्रा पर हमला, मुठभेड़ में बदमाश ढेर

गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र के ब्राह्मणपुरा गांव में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब बाइक सवार बदमाशों ने भाजपा नेता और स्वाभिमान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अमितेश मिश्रा पर फायरिंग कर दी।

हमले के दौरान अमितेश मिश्रा बाल-बाल बच गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए एक हमलावर को पकड़ लिया, जबकि दो अन्य मौके से फरार हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है।

हमले की सूचना मिलते ही गाजीपुर पुलिस ने इलाके में नाकेबंदी कर दी। इसी बीच फरार बदमाशों की तलाश में की गई कार्रवाई के दौरान पुलिस की बदमाशों से मुठभेड़ हुई, जिसमें एक अपराधी ढेर हो गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह हमला स्व. राजेश मिश्रा हत्याकांड से जुड़ी पुरानी रंजिश का नतीजा बताया जा रहा है। अमितेश मिश्रा उस केस के गवाह हैं, और लंबे समय से उन्हें धमकियां मिल रही थीं।

09/09/2025

एनडीए उम्मीदवार श्री C. P. राधाकृष्णन को 452 वोटों से भारी बहुमत के साथ भारत का नया उपराष्ट्रपति चुना गया है

22 सितंबर से शुरू होगा चकिया की रामलीला
01/09/2025

22 सितंबर से शुरू होगा चकिया की रामलीला

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22 सितंबर से शुरू होगा चकिया की रामलीला, तैयारियां जोरों पर
01/09/2025

22 सितंबर से शुरू होगा चकिया की रामलीला, तैयारियां जोरों पर

Ghazipur News - गाजीपुर की चकिया में रामलीला 22 सितंबर से शुरू होगी और यह दशहरा के साथ समाप्त होगी। समिति के सदस्यों ने आयोजन .....

22 सितंबर से शुरू होगा चकिया की रामलीला, तैयारियां जोरों परकरण्डा, गाज़ीपुर — वर्षो से आस्था और परंपरा की धरोहर बनी चकिय...
01/09/2025

22 सितंबर से शुरू होगा चकिया की रामलीला, तैयारियां जोरों पर

करण्डा, गाज़ीपुर — वर्षो से आस्था और परंपरा की धरोहर बनी चकिया की रामलीला इस वर्ष भी भव्य रूप में 22 सितंबर से आरंभ होने जा रही है, जो 2 अक्टूबर को दशहरा के साथ संपन्न होगी। रावण वध के साथ इस धार्मिक आयोजन का समापन होगा, जिसका इंतज़ार पूरे क्षेत्र के श्रद्धालु पूरे वर्ष करते हैं।

समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बताया कि तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। मंच सजावट, ध्वनि व्यवस्था, और कलाकारों के परिधानों को लेकर अंतिम तैयारियां की जा रही हैं। रामलीला के पात्रों का नियमित अभ्यास भी जारी है ताकि मंचन में कोई कमी न रह सके।

हाल ही में आयोजित बैठक में समिति के अध्यक्ष यशवंत पांडेय, उपाध्यक्ष राकेश पांडेय, कोषाध्यक्ष राधेश्याम पांडेय, प्रबंधक राजेश पांडेय, व्यास शिव बच्चन पांडेय, और संचालक शिवाजी पांडेय मौजूद रहे। बैठक में सभी ने आयोजन को और अधिक भव्य बनाने के लिए आवश्यक सुझाव और योजनाओं पर विचार किया।

समिति के मीडिया प्रभारी आशीष पांडेय ने कहा, "चकिया की रामलीला सिर्फ एक नाट्य मंचन नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, आस्था और एकता का प्रतीक है। हर वर्ष की तरह इस बार भी हम एक बेहतरीन प्रस्तुति देंगे, जिसमें धार्मिकता और मनोरंजन दोनों का संतुलन रहेगा।

हर साल की तरह इस बार भी दशहरा के दिन रावण वध का आयोजन बड़े उत्साह और भव्यता के साथ होगा, जिसमें आसपास के गांवों से श्रद्धालु शामिल होंगे। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि लोगों को समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी देता है।
चकिया की रामलीला का इतिहास पुराना और गौरवशाली है। यहां की रामलीला ने वर्षों से न केवल स्थानीय बल्कि दूर-दराज़ के क्षेत्रों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई है। इस आयोजन के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों और संस्कृति का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाता रहा है।

भारत की अर्थव्यवस्था बहुत ज़िंदा है! 😉वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही, जबकि RBI का अनुमान सिर्फ...
29/08/2025

भारत की अर्थव्यवस्था बहुत ज़िंदा है! 😉
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही, जबकि RBI का अनुमान सिर्फ 6.5% था।
सेवाएं, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि क्षेत्र ने जबरदस्त प्रदर्शन किया।
चीन को पीछे छोड़कर, भारत एक बार फिर सबसे तेज़ बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।
नई ऊँचाइयाँ छू रही है इंडिया! 🇮🇳

23/08/2025

लखीमपुर से मानवता को शर्मसार करने वाली ख़बर! 😢

लखीमपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। एक मजबूर पिता अपने नवजात बच्चे का शव झोले में डालकर कलक्ट्रेट पहुंच गया। पिता का आरोप है कि प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने ₹25,000 की डिमांड की थी, लेकिन उसके पास सिर्फ ₹5,000 ही थे, जो उसने जमा भी कर दिए। इसके बावजूद इलाज नहीं किया गया, और गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। अब उसकी 28 साल की पत्नी की जान भी खतरे में है।

ये घटना केवल प्राइवेट अस्पतालों की लालच की नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को भी उजागर करती है। अगर सरकारी अस्पतालों की सुविधाएं बेहतर होतीं, तो शायद एक मासूम की जान बच सकती थी।

क्या अब भी सरकार जागेगी?
क्या गरीबों की जान इतनी सस्ती है?

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