31/12/2025
यूट्यूब और फेसबुक ने भारत में सांप्रदायिक सद्भाव को कैसे नष्ट किया: विस्तृत विश्लेषणभारत एक विविधतापूर्ण देश है जहाँ विभिन्न धर्म, जाति और संस्कृतियाँ सदियों से सह-अस्तित्व में रही हैं। लेकिन पिछले दशक में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विशेष रूप से फेसबुक और यूट्यूब, ने इस सद्भाव को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ये प्लेटफॉर्म्स, जो मूल रूप से जुड़ाव और सूचना साझा करने के लिए बने थे, अब नफरत फैलाने, अफवाहें उड़ाने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के उपकरण बन चुके हैं। इस विश्लेषण में हम देखेंगे कि कैसे ये प्लेटफॉर्म्स ने भारत की सामाजिक संरचना को क्षति पहुँचाई है, वास्तविक उदाहरणों, रिपोर्ट्स और प्रभावों के साथ।
1. फेक न्यूज और अफवाहों का प्रसार: सांप्रदायिक हिंसा का मुख्य कारकफेसबुक और यूट्यूब पर फेक न्यूज और अफवाहें तेजी से फैलती हैं, जो अक्सर सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देती हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम उपयोगकर्ताओं को वैसा ही कंटेंट दिखाते हैं जो उनकी पूर्व धारणाओं को मजबूत करता है, जिससे ध्रुवीकरण बढ़ता है। उदाहरण के लिए, 2020 में दिल्ली दंगों में फेसबुक पर फैली नफरती पोस्ट्स ने हिंसा को भड़काया, जिसमें 53 लोग मारे गए। रिपोर्ट्स बताती हैं कि फेसबुक ने इन पोस्ट्स को हटाने में देरी की, जिससे स्थिति बिगड़ी।
इसी तरह, यूट्यूब पर "हिंदुत्व पॉप एंथम्स" जैसे वीडियोज़, जो मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देते हैं, लाखों व्यूज पाते हैं और एल्गोरिदम उन्हें और अधिक प्रमोट करता है।
2014 के बाद से सांप्रदायिक हिंसा में वृद्धि देखी गई है, जहाँ सोशल मीडिया ने अफवाहों को हिंसा में बदल दिया। जैसे, दादरी मॉब लिंचिंग (2015) में व्हाट्सऐप और फेसबुक पर फैली अफवाहों ने एक मुस्लिम व्यक्ति की हत्या कराई।
एक अध्ययन के अनुसार, सोशल मीडिया ने ध्रुवीकरण बढ़ाया है, जहाँ उपयोगकर्ता केवल अपनी विचारधारा वाले कंटेंट देखते हैं, जिससे अन्य समुदायों के प्रति नफरत बढ़ती है।
2. एल्गोरिदम और कंटेंट प्रमोशन: ध्रुवीकरण का इंजनफेसबुक और यूट्यूब के एल्गोरिदम लाभ कमाने के लिए विवादास्पद कंटेंट को प्रमोट करते हैं, क्योंकि ऐसे पोस्ट्स अधिक इंगेजमेंट (लाइक, शेयर, कमेंट) लाते हैं। इससे नफरती भाषण (हेट स्पीच) फैलता है, जो सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करता है। 2024 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि 1,165 हेट स्पीच इवेंट्स में से 995 वीडियोज़ सोशल मीडिया पर ट्रेस किए गए, जो मुख्य रूप से मुस्लिम और ईसाई अल्पसंख्यकों को टारगेट करते थे।
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