09/03/2026
# # तरुण बोस — वह अभिनेता जो हर किरदार में इतना घुल जाते थे कि पहचान ही मिट जाती थी
1960 के दशक की कई मशहूर फिल्मों में एक ऐसा चेहरा दिखाई देता है जिसे देखते ही लगता है कि यह कलाकार किसी भी किरदार को पूरी सच्चाई के साथ जी सकता है। 1965 की फिल्म **“गुमनाम”** में निर्दयी तस्कर मदनलाल, **“मुझे जीने दो”** में चंबल के डकैतों से टकराता एक संवेदनशील पुलिस अधिकारी और **“अनुपमा”** में अपनी ही बेटी से जूझता एक जटिल पिता — इन तीनों किरदारों को निभाने वाला अभिनेता एक ही था, **तरुण बोस**। उनकी सबसे बड़ी खासियत यही थी कि वे किरदार में इतने घुल जाते थे कि पर्दे पर अभिनेता नहीं, सिर्फ चरित्र दिखाई देता था।
28 सितंबर 1928 को कलकत्ता में जन्मे तरुण बोस की परवरिश नागपुर में हुई। वहां हिंदी और उर्दू आम बोलचाल की भाषा थी, इसलिए उन्होंने दोनों भाषाओं पर अद्भुत पकड़ बना ली। दिलचस्प बात यह रही कि शुरुआत में उन्हें अपनी मातृभाषा बंगाली में ही आलोचना का सामना करना पड़ा। पहले बंगाली नाटक के बाद समीक्षकों ने यहां तक कह दिया कि “गैर-बंगाली लोग बंगाली नाटक क्यों करते हैं?” यह टिप्पणी उन्हें भीतर तक चुभ गई और उन्होंने अपनी बंगाली भाषा को सुधारने के लिए लगातार मेहनत की।
सिर्फ पंद्रह साल की उम्र में उन्होंने **ऑल इंडिया रेडियो, नागपुर** के लिए ऑडिशन दिया और रेडियो नाटकों में काम करना शुरू कर दिया। मंच, रेडियो और अभिनय उनके जीवन का हिस्सा बन चुके थे। हालांकि परिवार की जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने **पोस्ट एंड टेलीग्राफ विभाग** में नौकरी भी शुरू कर दी ताकि स्थिर आय बनी रहे और साथ-साथ अभिनय भी जारी रखा जा सके।
उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ तब आया जब नागपुर के **सेंट फ्रांसिस स्कूल** में एक नाटक के दौरान महान फिल्मकार **बिमल रॉय** मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे। नाटक देखने के बाद बिमल रॉय उनके अभिनय से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें बॉम्बे बुला लिया। 1957 में असित सेन की फिल्म **“अपराधी कौन”** से तरुण बोस ने फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद **मधुमती, सुजाता, बंदिनी, मेरी सूरत तेरी आंखें, गुमनाम, अनुपमा, ऊंचे लोग, देवर, सत्यकाम और आन मिलो सजना** जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।
करीब 15 साल के करियर में उन्होंने लगभग 40 फिल्मों में काम किया। उनकी एक खासियत यह भी थी कि वे किरदार के अनुसार अपना हाव-भाव पूरी तरह बदल लेते थे। शायद यही वजह थी कि वे किसी एक छवि में बंधे नहीं, लेकिन बड़े स्टार भी नहीं बन पाए।
8 मार्च 1972 को मात्र 43 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।