05/06/2026
भूमिहार–यादव एकता, या कहें सवर्ण–यादव एकता, के लिए इससे बेहतर समीकरण शायद ही कोई हो सकता है।
आइए समझते हैं कैसे ?
बीते कुछ दिनों से भाजपा में विजय सिन्हा जिस तरह स्वयं को उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, और उनकी इस पीड़ा के प्रति यादव समाज जिस तरह सहानुभूति दिखा रहा है—यह कहते हुए कि उनसे बेहतर बिहार का मुख्यमंत्री बनने के लिए कोई दूसरा योग्य उम्मीदवार नहीं है—उसे वास्तविकता में बदलने का एक संभावित समीकरण हो सकता है।
विजय सिन्हा को भाजपा छोड़कर राजद में शामिल हो जाना चाहिए, क्योंकि जहाँ सम्मान न मिले, वहाँ बने रहना उचित नहीं माना जाता।
वहीं, राजद को भी उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करना चाहिए।
इससे यह होगा कि विजय सिन्हा के समर्थक, विशेषकर उनकी जाति भूमिहार तथा कुछ अन्य सवर्ण समुदाय, उनके नेतृत्व में राजद का समर्थन कर सकते हैं।
दूसरी ओर, यादव और मुस्लिम समुदाय पहले से ही राजद के पारंपरिक मतदाता रहे हैं। साथ ही, यादव समाज के एक वर्ग में विजय सिन्हा के प्रति जो सकारात्मक स्वीकार्यता दिखाई दे रही है, वह भी उनके समर्थन को और मजबूत कर सकती है।
इस प्रकार चुनावी लाभ मिलने की संभावना बनेगी, भूमिहार–यादव अथवा सवर्ण–यादव एकता को भी ज़मीनी आधार मिल सकता है, और ये लोग अपने पसंदीदा मुख्यमंत्री उम्मीदवार के पक्ष में मतदान भी कर सकेंगे।
VK Singh ..✍🏻
VIJAY KUMAR SINHAR.J.D - राष्ट्रीय जनता दल