01/03/2026
भाई साहब एक बात कहना चाहता हूं आप सब से, गुस्ताखियां माफ हों मेरी, मैं एक आधुनिक युग के राजा हरिश्चन्द्र को जानता हूं, जी हां सच में एक राजा ही तो हैं दिनेश निषाद जी। चारपानी काली मां के लाल दिनेश निषाद यूं तो प्रसिद्ध हो चुके हैं लेकिन अभी भी उन्हें वास्तविक रूप में बहुत से लोग नहीं जानते होंगे शायद। तो आप सबको बता दूं कि हो सकता है आपको यदि पूरी तरह से ना जानते हों दिनेश भाई तो आपकी बहुत ज्यादा मदद ना कर सकें, मतलब थोड़ा बहुत ही कर पावें , लेकिन भाई साब, यदि आपका परिचय एक बार ठीक से उनसे हो गया है ना तो फिर समझ लीजिए कि उनका जो कुछ भी प्रत्यक्ष रूप से है, वह आपका भी है ऐसा आप महसूस करेंगे कभी ना कभी। जैसे कि गाड़ी, आफिस, घर दुआर, चारपानी काली मां का धाम आदि। अपने किसी परिचित का आगमन होता है यदि मुंबई महानगर में तो समझ लीजिए कि वे अपनी गाड़ी में तेल पेट्रोल डलवा कर, विथ ड्राईवर भेज देते हैं। लोग आगे उनके लिए एक भी कदम चलें या ना चलें, वे ऐसे एक व्यक्ति हैं जो कभी भी अपनी तरफ से पीछे नहीं रहते। भईया बहुत व्यक्तिगत बात बोल रहा हूं मैं, कुछ लोग कहेंगे कि इसमें कौन सी बड़ी बात है ? अरे भाई बड़ी बात है, आप में से भी बहुत से लोग गाड़ी, ड्राईवर डिजल पेट्रोल डालकर किसी के सेवा में भेज देते होंगे, कुछ लोग तो इतने महान हैं कि खुद ही गाड़ी लेकर पहुंच जाते होंगे! ये तो बड़ी बात है! लेकिन सच बताना कि आपने अपनी 25 लाख की नई चमचमाती हुई एस यू वी गाड़ी, अपने कितने जानने वालों को चलाने को दिया होगा ? 🫢😂🤣 हंसी आ रही होगी इस सवाल पर ना, या फिर गुस्सा भी आ रहा होगा ! भाई मैंने तो मेरे फुफ्फा, चाचा, लगे सगे वालों को मुंह मोड़ते देखा है गाड़ी देने के नाम पर, लेकिन आज भाई ने उनका ड्राइवर कहीं बीजी था तो, भरोसा देखो चाभी दिलवा दिया है यार और तो और उनके बेटे ने जो, उस गाड़ी को कितना प्यार करता होगा, उसके ही हाथों से। कमाल तो तब हो गया जब उस युवा बच्चे के चेहरे पर एक सिकन तक नहीं देखा मैंने 🙏🏻🫢 मान गये यार भाई, कमाल के इंसान हैं आप। मां काली आपको ऐसे ही जस प्रदान करें 🙏🏻💐 आप और धनवान होते चले जाएं।
एक बात बोल रहा हूं दिनेश भईया, "आप इस बेरहम दुनियां में जो फसल बो रहे हो ना, वह आपको कभी भी अकेले नहीं पड़ने देगी, कोई भी आपके साथ हो या ना हो, लेकिन कुछ तो लोग हर हाल में होंगे जो कभी भी आपको भूल नहीं पायेंगे 🙏🏻 भाई धन हो, शक्ति हो, शोहरत हो तो यदि वह किसी और के भी काम ना आये तो वह सब बेकार है यार। अपने लिए तो सब करते हैं, असली राजा वो है जो औरों के लिए करे, गैरों के लिए करे। धन्यवाद 🙏🏻💐 मेरे भाई।
स्पष्टीकरण:- दरअसल, इन दिनों मुंबई में हूं और मेरी वैगन-आर गोरखपुर में , तो आज एक परिजन मेरे गांव से इमर्जेंसी में मुंबई आयें हैं, सुबह पता चला है तो मैंने सोचा दिनेश निषाद भईया की मदद ली जाए, आगंतुक को सही समय से , सही गंतव्य तक पहुंचाया जाए, इनके ड्राइवर ने असमर्थता जताई है, ये उदास हुए हैं, मैंने विकल्प सुझाया, बात बिगड़ सकती थी, क्योंकि मैंने तो इनकी कार ही मांग लिया है, अब वो मेरा सम्मान था या मेरे प्रसिद्ध व प्रतिष्ठित आगंतुक मेहमान का लिहाज कुछ समझ नहीं आया है। बस अपनी महंगी गाड़ी सौ किलोमीटर जाने के लिए थमा दिए हैं। अच्छा लगा है, बिल्कुल बड़हरा वाले जोगिंदर निषाद जी की याद दिला दिए हैं, जिन्होंने विगत वर्ष कुछ ऐसी ही दिलेरी दिखाया था। धन्यवाद 🙏🏻 आपको भाई जी 🙏🏻💐🪷❤️ हृदय से आभार 🙏🏻💐❤️