07/03/2026
बीजेपी और Nitish Kumar को लेकर इन दिनों एक नई राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। कहा जा रहा है कि उन्हें धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूर करने की तैयारी चल रही है। खबरें यह भी सामने आ रही हैं कि उन्हें राज्यसभा भेजने की योजना बनाई जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो इससे Janata Dal (United) पर पूरी तरह से Bharatiya Janata Party का नियंत्रण मजबूत हो सकता है। वैसे भी राजनीतिक हलकों में अक्सर यह कहा जाता रहा है कि जेडीयू के कई अहम फैसलों पर बीजेपी का प्रभाव पहले से ही बढ़ चुका है।
इसी के साथ एक और चर्चा यह भी है कि बीजेपी, नीतीश कुमार के बेटे को सक्रिय राजनीति में लाने की तैयारी कर रही है। कुछ खबरों में यह तक कहा जा रहा है कि भविष्य में उन्हें राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। भारतीय राजनीति में अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब किसी बड़े नेता को धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से अलग करना होता है, तो उन्हें राष्ट्रपति या राज्यपाल जैसे पदों पर भेज दिया जाता है।
हालांकि नीतीश कुमार जैसे बड़े कद के नेता के मामले में ऐसा करना आसान नहीं माना जाता। इसलिए यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें केंद्र की राजनीति में भूमिका दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो बिहार में सरकार चलाना बीजेपी के लिए और आसान हो जाएगा। दरअसल, इस तरह की रणनीति केवल सहयोगी दलों के साथ ही नहीं, बल्कि कई बार पार्टी अपने नेताओं के साथ भी अपनाती रही है।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चा उस समय और तेज हो गई जब बिहार सरकार के नए मंत्रिमंडल का गठन हुआ। पिछले लगभग 25 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ कि मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार के पास गृह मंत्रालय नहीं रहा। जब से वे बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, तब से गृह मंत्रालय आमतौर पर उनके ही पास रहता था। यही वजह थी कि उनके समर्थक उन्हें “सुशासन बाबू” कहकर संबोधित करते रहे।
लेकिन इस बार मंत्रिमंडल गठन के दौरान गृह मंत्रालय बीजेपी के पास चला गया। इस मंत्रालय की जिम्मेदारी Samrat Choudhary को दी गई, जो राज्य के उपमुख्यमंत्री भी हैं। माना जाता है कि गृह मंत्रालय जैसे अहम विभाग को अपने पास रखने से सरकार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों और फैसलों पर सीधा नियंत्रण बना रहता है।
सम्राट चौधरी को गृह मंत्री बनाए जाने के फैसले पर भी सवाल उठे। बिहार विधानसभा चुनाव 2024 से पहले उनके ऊपर हत्या, अपहरण और अपनी शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी गलत जानकारी देने जैसे गंभीर आरोपों की चर्चा भी सामने आई थी।
ऐसे में अब बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर नीतीश कुमार को गृह मंत्रालय क्यों नहीं दिया गया और क्या उन्हें राज्यसभा भेजने की चर्चा सच में किसी बड़ी राजनीतिक योजना का हिस्सा है। क्या यह पूरा घटनाक्रम पहले से तय रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है, या फिर यह सिर्फ राजनीतिक अटकलें हैं?