26/08/2026
आज फिर सोचा —
तुझसे वो कहना था जो कहा न गया,
वो सुबह थी जो कभी न आई,
वो चुप्पी थी जो बोल न पाई,
और मैं —
बस उसी चुप्पी का साया हूँ
जो अब तक तेरा इंतज़ार कर रहा है…
हर दिन गुज़रता है,
पर तेरी वो बात
जो अधूरी रह गई,
अब मेरे सवालों की आखिरी मंज़िल है।
#वोबातेंजोकहीनगईं
#अधूरीसुबह
#चुप्पीऔरइंतज़ार
#तेरीआखिरीबात
#हस्ताक्षरशायरी