31/07/2026
"मलाड पूर्व कुरार विलेज
मंदसौर को ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के सामने ओपन प्लॉट पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है"
मुंबई। मलाड पूर्व के त्रिवेणी नगर, कुरार विलेज स्थित एक विवादित भूखंड पर पुनः कथित रूप से अवैध कब्जा करने का प्रयास किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि न्यायालय द्वारा जारी स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) प्रभावी होने के बावजूद कुछ लोग विवादित भूमि पर कंपाउंड वॉल का निर्माण कराकर उस पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदसौर कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के सामने स्थित 111.63 वर्गमीटर क्षेत्रफल का खुला भूखंड सी.टी.एस. नंबर 774/B का हिस्सा है। उक्त सी.टी.एस. नंबर का कुल क्षेत्रफल 1423.90 वर्गमीटर बताया गया है। यह भूमि पिछले कई वर्षों से न्यायिक विवाद का विषय बनी हुई है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, वर्ष 2010 से ही इस भूमि पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कब्जा करने के प्रयास किए जाते रहे हैं। आरोप है कि भूमि की मूल स्वामिनी स्वर्गीय जुबेदा खातून यावर हुसैन के कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर एक पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई। इसके पश्चात वर्ष 2020 में भी कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूमि पर अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया गया।
जब भूमि के वैध उत्तराधिकारियों को इसकी जानकारी प्राप्त हुई, तब उन्होंने संबंधित शासकीय विभागों एवं पुलिस प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। साथ ही कथित फर्जी दस्तावेजों को निरस्त कराने के लिए सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों का संज्ञान लेते हुए संबंधित भूमि पर स्थगन आदेश (Stay Order) जारी किया, जो वर्तमान में प्रभावी है।
आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद कुछ समय पूर्व उक्त भूखंड पर एक फुट स्टॉल स्थापित कर दिया गया था। बाद में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एमआरटीपी अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किया और अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया।
वर्तमान में यह पूरा प्रकरण मुंबई सिटी सिविल कोर्ट में विचाराधीन है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ कथित भू-माफिया इस विवादित भूमि पर अवैध कब्जा करने की साजिश रच रहे हैं। शिकायत में कुछ व्यक्तियों के नाम भी शामिल किए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है तथा संबंधित व्यक्तियों का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि मंदसौर कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी, जिसने अपनी इमारत के पुनर्विकास (री-डेवलपमेंट) के लिए एक बिल्डर को नियुक्त किया है, के कुछ सदस्य भी कथित रूप से विवादित भूमि के चारों ओर कंपाउंड वॉल का निर्माण कराने में सहयोग कर रहे हैं। यदि यह कार्य न्यायालय के स्थगन आदेश के प्रभावी रहते हुए किया जा रहा है, तो यह न्यायालय के आदेश की अवमानना का विषय हो सकता है।
शिकायतकर्ताओं ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, न्यायालय के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण या अतिक्रमण को तत्काल रोका जाए।