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इंसान इतनी जल्दी अपना वजूद को भूल जाता हैं।यार व्यापार इंसान को कहां से कहां लाकर रख दिया, रोशन आनंद सर ने खान मास्टर जब...
06/06/2026

इंसान इतनी जल्दी अपना वजूद को भूल जाता हैं।यार व्यापार इंसान को कहां से कहां लाकर रख दिया, रोशन आनंद सर ने खान मास्टर जब बीमार थे तो उनसे मिलने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। आधुनिक युग में 'कृष्ण' के रूप में खान मास्टर के साथ खड़े हुए थें। लेकिन खान मास्टर ने अपना वह दोस्ती को भुला दिया सिर्फ चंद सिक्कों व सोशल मीडिया लोकप्रियता के लिए, लानत हैं,ऐसे मास्टर पर,जिन्हें छात्र छात्रों अपना आइकॉन (Icon) मान चुके हैं।💔😐

नीतीश कुमार सरकार का बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस...
11/04/2026

नीतीश कुमार सरकार का बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगा दी है। अब सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में सरकार ने आधिकारिक संकल्प जारी कर दिया है। साथ ही, जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे।

Munger Tops in cleanest AirPatna: Bihar witnessed aremarkable air quality mo-ment on Saturday as Munger recorded the low...
31/03/2026

Munger Tops in cleanest Air

Patna: Bihar witnessed a

remarkable air quality mo-ment on Saturday as Munger recorded the lowest air quality index (AQI) in the entire country, according to the Central Pollution Control Board (CPCB) bul-letin.

Munger posted an im-pressive AQI of 29, placing it at the top of the cleanest cities list nationwide owing to favourable clima-tic conditions.

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08/03/2026

20/02/2026

Civic Sense सीखने के लिए किताबों की जरूरत नहीं होती बल्कि अपने आस पास ही देखा जा सकता हैं ..

Video Credit:- Abhinav Oxygen


17/02/2026

क्या अपलोगों ने इस महाशिवरात्रि पर मुंगेर के जिन्न को देखा ??

अगर देखा तो कैसा लगा कमेंट्स में बताएं और शेयर करें..

29/01/2026

क्या सचमुच यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा लाया गया बिल सवर्ण समाज के युवाओं के विरुध्द है ! इसको समझने के लिए इसकी पृष्ठभूमि को समझ लेना आवश्यक है. केंद्र सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में आईआईटी, आईआईएम तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 100 छात्रों ने आत्महत्या की है। चिंताजनक तथ्य यह है कि इनमें से प्रायः सभी छात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों से थे।
हम दलित समाज से आने वाले हैदराबाद के रोहित वेमुला और मुंबई की आदिवासी डॉक्टर पायल तड़वी की आत्महत्या की घटनाओं को कैसे भूल सकते हैं ! इन मामलों में पीड़ित परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसके बाद माननीय न्यायालय ने केंद्र सरकार को सख़्त निर्देश दिया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए प्रभावी नियम बनाए जाएँ।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में संसद की समिति गठित की गई, जिसके अध्यक्ष वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह जी थे। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने समता (इक्विटी) समिति का गठन किया, ताकि दलित, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, महिलाएँ और दिव्यांग छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव की तत्काल सुनवाई हो और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस व्यवस्था को अब “सवर्ण विरोधी” बताकर इसके खिलाफ़ प्रदर्शन किए जा रहे हैं। जब भी वंचित वर्गों के हित में या उनकी सुरक्षा के लिए कोई क़दम उठाया जाता है तो उसका इस प्रकार विरोध किया जाना न समाज हित में है और न ही देश हित में.
उच्च शिक्षण संस्थानों में लगातार हो रहे भेदभाव और उसके कारण छात्रों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पूरे समाज के लिए चेतावनी है। क्या हम चाहते हैं कि ऐसे छात्र सुरक्षा के अभाव में अपनी जान देते रहें?
हम सभी से अपील करते हैं कि यूजीसी के इस प्रावधान को पूर्वाग्रह के बिना पढ़ा और समझा जाए. अगर प्रस्तावित बिल के किसी अंश से किसी प्रकार का भ्रम पैदा होता है तो उसके लिए न्यायालय का दरवाज़ा खुला है. लेकिन बेवजह भ्रम का शिकार हो कर समाज में तनाव फैलाने से देश आगे नहीं बढ़ सकता। न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के बिना न हमारा देश मज़बूत होगा न ही लोकतंत्र।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में🔹 प्रोफेसर पदों पर — ST के 83%, OBC के 80%, SC के 64% पद खाली🔹 एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर — ST...
28/01/2026

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में
🔹 प्रोफेसर पदों पर — ST के 83%, OBC के 80%, SC के 64% पद खाली
🔹 एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर — ST के 65%, OBC के 69%, SC के 51% पद खाली
सवाल यह नहीं है कि योग्य लोग नहीं हैं,
सवाल यह है कि योग्यता की परिभाषा कौन तय कर रहा है?
जब OBC-SC-ST अभ्यर्थी चुने नहीं जाते, तो कहा जाता है — NFS (Not Found Suitable)
लेकिन हकीकत में यह अक्सर “Not Found Savarna” बनकर रह जाता है।
शिक्षा के मंदिरों में अगर सामाजिक न्याय के दरवाज़े ही बंद रहेंगे,
तो समान अवसर का सपना सिर्फ़ भाषणों तक सीमित रह जाएगा।
यह मुद्दा किसी एक जाति का नहीं,
यह संविधान, प्रतिनिधित्व और लोकतंत्र का सवाल है।

18/01/2026

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