25/03/2026
**एक छोटी सी घटना, लेकिन दिल को छू जाने वाली ❤️**
मेरा नाम गौतम सिंह है, मैं उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले के कस्बा चरथावल का रहने वाला हूं।
आज दोपहर करीब 12 बजे मैं चरथावल से बस में बैठकर मुज़फ्फरनगर जा रहा था। बस स्टैंड पर उतरने के बाद मुझे सरकारी अस्पताल जाना था, इसलिए मैं एक ई-रिक्शा का इंतज़ार करने लगा। थोड़ी देर बाद रिक्शा मिला और मैं उसमें बैठ गया।
जैसे ही रिक्शा आगे बढ़ा, मेरी नज़र एक छोटे से बच्चे पर पड़ी — उम्र करीब 3-4 साल। वो रिक्शा के आगे-आगे भाग रहा था। पहले तो मैंने सोचा कि शायद वो अपने किसी के साथ होगा, लेकिन करीब 100 मीटर तक उसे ऐसे ही अकेले भागते देखकर मन में शक हुआ।
मैंने तुरंत रिक्शा रुकवाया और उस बच्चे के पास गया। मैंने उससे प्यार से पूछा, "बेटा, तुम कहां जा रहे हो? तुम्हारे मम्मी-पापा कहां हैं?"
लेकिन वो कुछ बता नहीं पा रहा था, बस बार-बार यही कह रहा था —
*"मुझे मेरी मम्मी के पास जाना है..."* 😢
उसके माथे पर तिलक लगा हुआ था, तो मुझे लगा शायद वो किसी मंदिर या माता के दरबार से आया होगा, क्योंकि इन दिनों नवरात्रि भी चल रही है।
मैं उसे लेकर उसी दिशा में चलने लगा, जिधर वो रहा था, और आसपास के लोगों से पूछता रहा कि ये बच्चा किसका है। कुछ देर के लिए मैंने सोचा कि इसे पुलिस स्टेशन ले जाऊं, क्योंकि बच्चा साफ़ तौर पर अपने परिवार से बिछड़ गया था।
तभी दूर से मैंने देखा — एक महिला, शायद उसकी मां और साथ में उसकी दादी, घबराई हुई खड़ी थीं। जैसे ही उन्होंने बच्चे को मेरे साथ देखा, उनकी आंखों में राहत आ गई। उन्होंने बताया कि बच्चा अपने पिता के साथ था और उनके पापा कुछ खाने (छोले-भटूरे) लेने गए थे, तभी ये इधर-उधर निकल गया।
मैंने तुरंत बच्चे को उसकी मां के हवाले कर दिया।
उस पल जो सुकून मिला, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है 🙏
**सीख:**
आज के समय में हमें सिर्फ अपने काम से मतलब नहीं रखना चाहिए, बल्कि इंसानियत भी ज़िंदा रखनी चाहिए।
एक छोटी सी कोशिश किसी के लिए बहुत बड़ी खुशी बन सकती है।
👉 अपने बच्चों का खास ध्यान रखें, खासकर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर।
यह एक सच्ची घटना