sahil_malik_786s

sahil_malik_786s yᴇ ᴊɪɴᴅᴀɢɪ ᴅᴀyᴇʀᴇ ᴍᴇ ʀᴀʜᴋᴀʀ ᴍᴀꜱᴛɪ ꜱᴇ ᴊɪᴏ q ᴋɪ yᴇ ᴊɪɴᴅᴀɢɪ ɴᴀ ᴍɪʟᴇɢɪ ᴅᴏʙᴀʀᴀ

13/02/2026

होने थे जितने खेल मुक़द्दर के हो गए,
हम टूटी नाव लेकर समुंदर के हो गए,

_____🖤

31/01/2026
ग़ज़ल का क़द बढ़ाना चाहता हूंतुझे मतला बनाना चाहता हूं ज़माने भर से पर्दा कर रखा है तेरी नज़रों में आना चाहता हूं
24/01/2026

ग़ज़ल का क़द बढ़ाना चाहता हूं
तुझे मतला बनाना चाहता हूं

ज़माने भर से पर्दा कर रखा है
तेरी नज़रों में आना चाहता हूं

23/01/2026

तहाल्लुख कितना भी
गहरा क्यों ना हो

हम अपनी बे क़दरी
बर्दास्त नहीँ करते।।

'ख़ुद से मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता।।  क्या  मिले  आप  जो लोगों के  मिलाने से मिले।।
16/11/2025

'ख़ुद से मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता।।
क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले।।

उसे किसी से मोहब्बत ना थी मगर.. उसने गुलाब तोड़कर,, दुनिया को शक में डाल दिया।।
28/11/2024

उसे किसी से मोहब्बत ना थी मगर..
उसने गुलाब तोड़कर,,
दुनिया को शक में डाल दिया।।

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