MM News muzaffarnagar

MM News muzaffarnagar Mera Muzaffarnagar News has been dedicated to disemminate knowledge of current affairs and day to

पे कमीशन के फ़ायदे अतिरिक्त शर्तें लगाकर नहीं रोके जा सकते: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल को यह टिप्पणी की कि स...
05/04/2026

पे कमीशन के फ़ायदे अतिरिक्त शर्तें लगाकर नहीं रोके जा सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल को यह टिप्पणी की कि सेंट्रल पे कमीशन की सिफ़ारिशों की मनमानी व्याख्या करके किसी कर्मचारी को पे कमीशन के फ़ायदों से वंचित करने के लिए कोई अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती।

जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। यह मामला उन याचिकाकर्ताओं से जुड़ा था, जिन्होंने शुरू में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन में जूनियर इंजीनियरिंग कैडर में नौकरी शुरू की थी। बाद में कैडर के विलय के बाद उन्हें 'जूनियर इंजीनियर' के तौर पर नया पदनाम दिया गया।

लेवल 8 पर ₹4,800 के ग्रेड पे के साथ 4 साल की लगातार सेवा पूरी करने के बाद वे सातवें सेंट्रल पे कमीशन की सिफ़ारिशों के अनुसार, लेवल 9 (ग्रेड पे ₹5,400) में 'नॉन-फ़ंक्शनल अपग्रेडेशन' (NFU) के लिए पात्र हो गए।

हालांकि, सरकार ने यह कहते हुए उन्हें इस फ़ायदे से वंचित कर दिया कि NFU का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिनकी सीधी भर्ती (Direct Recruitment) लेवल 8 पर हुई थी, जबकि पे कमीशन ने न तो ऐसी कोई पाबंदी लगाई थी और न ही यह अनिवार्य किया था कि यह लाभ केवल सीधी भर्ती वालों तक ही सीमित रहेगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलील स्वीकार करते हुए उन्हें लेवल 9 के लाभ देने का निर्देश दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।

केंद्र सरकार की अपील ख़ारिज करते हुए जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी द्वारा लिखे गए फ़ैसले में यह टिप्पणी की गई कि सरकार ने एक अतिरिक्त शर्त—कि केवल लेवल 8 पर सीधी भर्ती वाले ही पात्र होंगे—लगाकर याचिकाकर्ताओं को NFU के लाभ से अनुचित रूप से वंचित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सातवें पे कमीशन की सिफ़ारिशों में ऐसी किसी शर्त का कोई ज़िक्र नहीं है। इस तरह की शर्त लगाकर किसी को भी लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा,

"NFU का लाभ इस आधार पर रोकना कि याचिकाकर्ताओं ने ₹4,800 के ग्रेड पे के साथ सेवा शुरू नहीं की थी—और इस तरह सातवें पे कमीशन की सिफ़ारिशों के संबंधित पैराग्राफ़ में 'एंट्री-लेवल' (शुरुआती स्तर) की शर्त जोड़ना—NFU का लाभ देने के लिए अतिरिक्त शर्तें लगाने जैसा ही है।"

कोर्ट ने आगे कहा,

“सीधी-सादी रीडिंग से यह लगता है कि लेवल 8 में चार साल की सर्विस पूरी होने पर और सीनियरिटी-कम-उपयुक्तता के आधार पर एक जूनियर इंजीनियर NFU का हकदार है। 4,800/- रुपये के एंट्री-लेवल जूनियर ग्रेड के साथ ऑप्शन पर ज़ोर देने से रिट याचिकाकर्ताओं को सातवें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा सुझाया गया फ़ायदा नहीं मिल पाएगा।”

कोर्ट ने आदेश दिया,

“यह मनाही सही वजहों से नहीं है। इसलिए हमें अपील के तहत दिए गए आदेश में दखल देने का कोई कारण नज़र नहीं आता। सिविल अपील खारिज की जाती है।”

तदनुसार, अपील खारिज कर दी गई।

Cause Title: UNION OF INDIA & OTHERS VERSUS SUNIL KUMAR RAI & OTHERS
साभार

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, CJI बोले- हम पीछे जा रहे? जानें कोर्ट में क्या-क्या हुआ? यूनिवर्सिटी ग...
29/01/2026

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, CJI बोले- हम पीछे जा रहे? जानें कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन(UGC) के नए नियमों पर रोक लग गई है. सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों पर बड़ा फैसला सुनाया और यूजीसी की नई गाइडलाइन्स पर तत्काल रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने UGC के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ को अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला बताते हुए स्थगित कर दिया. चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि इस नियम को स्पष्ट करने की जरूरत है. तब तक 2012 के पुराने UGC नियम लागू रहेंगे. कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की.

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, CJI बोले- हम पीछे जा रहे
सीजेआई सूर्यकांत ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है.
विज्ञापन

यूजीसी के नए नियमों पर बीते कुछ दिनों से बवाल जारी है. सवर्ण तबके के स्टूडेंट्स इन नियमों का विरोध कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले यानी बुधवार को ही यूजीसी नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए हामी भरी ती. याचिका में कहा गया है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ भेदभाव पैदा कर सकते हैं. मामला राहुल देवन और अन्य बनाम केंद्र सरकार है. सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका को सुनवाई के लिए आज लिस्ट किया था.

दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने UGC प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026 पर रोक लगा दी है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच कहा कि ये प्रावधान पहली नज़र में अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया. सीजेआई सूर्यकांत ने केंद्र सरकार को रेगुलेशंस को फिर से बनाने के लिए कहा है, तब तक इनका संचालन रोक दिया गया है. अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर 19 मार्च तक जवाब देने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जाति आधारित भेदभाव क्या है, इस बारे में 2026 के UGC नियमों को अभी लागू न किया जाए. 2012 के नियम तब तक लागू रहेंगे, जब तक SC नए नियमों की संवैधानिकता की जांच नहीं कर लेता.

‘हम अब भी जातिगत भेदभाव से जूझ रहे’

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एसजी, कृपया इस मामले की जांच के लिए कुछ प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति गठित करने के बारे में सोचें ताकि समाज बिना किसी भेदभाव के एक साथ विकास कर सके. हमें आज़ादी मिले 75 साल गुज़र चुके हैं और हम जातिगत भेदभाव से अभी भी जूझ रहे हैं. सीजेआई ने आगे कहा कि अंतरजातीय विवाह हो रहे हैं और विश्विद्यालयों में छात्र पढ़ते हैं साथ रहते हैं.

यूजीसी नियमों के खिलाफ सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट में किसने क्या कहा?

CJI: क्या रैगिंग की शिकायत इस नियम के तहत सुनी जाएगी?

वकील: नियमों में रैगिंग की परिभाषा ही नहीं, फ्रेशर पहले महीने में ही जेल जा सकता है.

वकील: यह नियम सिर्फ जाति के मुद्दों तक सीमित, रिग्रेसिव और सीनियर-जूनियर का बंटवारा करता है.

CJI: उत्तर या पूर्वोत्तर से आए छात्र के खिलाफ क्षेत्रीय/सांस्कृतिक तंज पर क्या यह नियम लागू होगा?

CJI: अगर SC समुदाय के भीतर ही एक समूह दूसरे का अपमान करे तो क्या कोई उपाय है?

CJI: casteless समाज की दिशा में जो हासिल किया, क्या हम पीछे जा रहे हैं?

CJI: रैगिंग सबसे बड़ी बुराई.

CJI: अलग-अलग हॉस्टल बनाने जैसे सुझाव न दें.

वकील: पूरी UGC रेगुलेशन रद्द होनी चाहिए, बेहतर ड्राफ्ट का सुझाव दे सकते हैं.

वकील विष्णु जैन: UGC नियमों की धारा 3(c) पूरी तरह एक्सक्लूसिव है.

विष्णु शंकर जैन: यह मान लिया गया है कि भेदभाव सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ होता है.

याचिकाकर्ता का तर्क- यह परिभाषा जनरल कैटेगरी को बाहर करती है.

विष्णु शंकर जैन: धारा 3(c) का उद्देश्य से कोई तार्किक संबंध नहीं

सीजेआई: कोर्ट सिर्फ संवैधानिकता और वैधता की शुरुआती जांच कर रही है

विष्णु शंकर जैन ने अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए धारा 3(c) पर रोक की मांग की.

CJI ने उदाहरण देकर पूछा क्या यह नियम क्षेत्रीय या सांस्कृतिक भेदभाव को कवर करेगा?

किसकी याचिका और क्या दलील?

यूजीसी इक्विटी नियमों के खिलाफ याचिकाएं मृतुंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल देवान ने दायर की थीं. उनका कहना था कि नए नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं. याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि जाति आधारित भेदभाव की कोई भी कानूनी परिभाषा समझदारी पर आधारित होनी चाहिए. एक अन्य वकील ने रैगिंग को लेकर चिंता जताई और कहा कि सामान्य वर्ग के छात्र को उसकी पहचान के आधार पर अलग तरीके से देखा जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ये नियम सिर्फ जाति आधारित मुद्दों पर ध्यान देते हैं, जबकि कैंपस की असल स्थिति को नजरअंदाज करते हैं.

सीजेआई सूर्यकांत ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि कुछ समुदायों को दूसरों की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिल रही हैं. अब ज्यादातर राज्यों में यहां तक कि विधायिका ने भी माना है कि आरक्षित समितियों में भी लोग ‘हैव्स’ और ‘हैव नॉट्स’ बन गए हैं.’ सीजेआई ने कहा कि 75 साल (आजादी के) बाद, जो भी हमने जातिविहीन समाज की ओर बढ़ने में हासिल किया है… क्या हम पीछे की ओर जा रहे हैं?. जस्टिस बागची ने कहा कि अनुच्छेद 15(4) राज्यों को अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए विशेष कानून बनाने का अधिकार देता है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा कोई ढांचा नहीं होना चाहिए जिससे शैक्षणिक संस्थानों में सामाजिक विभाजन हो.

उन्होंने आगे कहा, ‘भारत की एकता शैक्षणिक संस्थानों में दिखनी चाहिए. उम्मीद है कि हम अमेरिका की तरह अलग-अलग स्कूलों में न पहुंच जाएं, जहां अश्वेत और श्वेत अलग-अलग स्कूलों में जाते थे.’

UGC नियमों के खिलाफ याचिका में क्या है?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2021’ को चुनौती दी गई है. यूजीसी के मुताबिक, ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए बने हैं, मगर याचिका में आरोप लगाया गया है कि जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा सिर्फ एससी/एसटी/ओबीसी तक सीमित है. इससे जनरल कैटेगरी के छात्र शिकायत निवारण तंत्र से वंचित रह सकते हैं. यूजीसी नियमों के खिलाफ कई याचिकाएं और एप्लीकेशन कोर्ट में दाखिल हो चुकी हैं.

यूजीसी के नए नियम क्या हैं

यूजीसी की ओर से देश भर के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व अन्य सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं को रैगिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाने का स्पष्ट निर्देश है. यूजीसी के मुताबिक, देशभर के इन सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को सख्ती से एंटी रैगिंग गाइडलाइंस लागू करना अनिवार्य है. तय नियमों के दायरे में यूजीसी ने रैगिंग रोकने के लिए कड़े नियम बनाए हैं. यूजीसी के अनुसार देशभर के जो भी उच्च शिक्षण संस्थान इन नियमों को लागू करने में असफल रहे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. यूजीसी का कहना है कि किसी उच्च शिक्षा संस्थान में रैगिंग और आत्महत्या जैसा मामला सामने आना बेहद गंभीर है. ऐसे मामले में गहन जांच की जाएगी और संबंधित विश्वविद्यालय को इसके लिए समन किया जाएगा.

यूजीसी का नियमों पर क्या है यूजीसी का तर्क

यूजीसी का कहना है कि ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं. नियमों के मुताबिक हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी. ये कमेटी एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी. कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना जरूरी है. कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाना और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाएं लागू करना है.

आखिर यूजीसी के नियमों का क्यों हो रहा है विरोध

यूजीसी के नए नियमों का विरोध सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी के छात्र कर रहे हैं. उनका आरोप है कि ये नियम सवर्णों के खिलाफ हैं. नियमों में सिर्फ SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव की बात है. जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव का शिकार माना ही नहीं गया है जिसको लेकर विरोध हो रहा है. सवर्ण समाज के लोगों का कहना है कि इन नियमों का फायदा उठाकर कोई भी छात्र सवर्णों को फंसाने के लिए झूठी शिकायत कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ याचिका दायर हो चुकी है. याचिका में कहा गया है कि ये UGC एक्ट और उच्च शिक्षा में समान अवसर की भावना के खिलाफ है. विरोध करने वाले कहते हैं कि इससे भेदभाव कम नहीं, बल्कि ज्यादा हो सकता है.
साभार

एक बार कोटे का लाभ ले लिया तो सामान्य सीट पर हक नहीं, आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसलासुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को क...
07/01/2026

एक बार कोटे का लाभ ले लिया तो सामान्य सीट पर हक नहीं, आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में आवेदक ने यदि एक बार आरक्षण का लाभ ले लिया है तो वह सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्ति पाने का हकदार नहीं है। भले ही उसका कुल अंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से अधिक हो। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया है।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की पीठ ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अनारक्षित कैडर में एक अनुसूचित जाति के उम्मीदवार की नियुक्ति की मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उक्त आवेदक ने आरंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ उठाया था। पीठ ने फैसले में कहा कि एक बार जब किसी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने आरक्षण का लाभ ले लिया है तो उसे सामान्य श्रेणी के रिक्तियों/सीटों पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट ने आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को सिर्फ इसलिए सामान्य श्रेणी में नियुक्त करने का आदेश दिया था क्योंकि उसने सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से ऊंची फाइनल रैंक हासिल की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने आरंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ उठाया है, इसलिए, उन्हें सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

पीठ ने कहा कि अगर कोई उम्मीदवार परीक्षा के किसी भी स्टेज पर छूट का सहारा लेता है, तो वह परीक्षा नियम, 2013 के नियम 14(ii) के प्रोविजो के दायरे में नहीं आएगा और उस स्थिति में, कैडर आवंटन के लिए लागू पॉलिसी के मकसद से, वह जनरल स्टैंडर्ड पर चुने गए उम्मीदवारों की लिस्ट में नहीं आएगा, जो अपने होम स्टेट कैडर की जनरल इनसाइडर वैकेंसी पर इनसाइडर उम्मीदवार के तौर पर दावा कर रहा हो।

दरअसल, यूपीएससी द्वारा 2013 में भारतीय वन सेवा परीक्षा से मामले में विवाद शुरू हुआ। यह परीक्षाा दो चरणों में हुई थी, प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य और साक्षात्कार। प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य श्रेणी का कट-ऑफ 267 अंक था, जबकि अनुसूचित जाति (एससी) उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ 233 था। इस परीक्षा में आरक्षित श्रेणी के आवेदक जी. किरण ने रियायती कट-ऑफ का फायदा उठाकर 247.18 अंक के साथ क्वालिफाई किया, जबकि सामान्य श्रेणी के आवेदक एंटनी एस. मारियप्पा ने जनरल कट-ऑफ पर 270.68 अंक के के साथ क्वालिफाई किया।

हालांकि, अंतिम मेरिट लिस्ट में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार जी. किरण की रैंक 19 थी और एंटनी की रैंक 37 थी। लेकिन, कैडर आवंटन के दौरान, कर्नाटक में केवल एक जनरल इनसाइडर वैकेंसी थी और कोई एससी इनसाइडर वैकेंसी नहीं थी। केंद्र सरकार ने जनरल इनसाइडर पोस्ट एंटनी को दी और किरण को तमिलनाडु कैडर में भेजा।
साभार

चकबंदी प्रक्रिया में योगी सरकार ने किया बड़ा बदलाव, पैमाइश में नहीं होगी धांधली, ऐसे बनेंगे नक्शेउत्तर प्रदेश सरकार चकबं...
30/11/2025

चकबंदी प्रक्रिया में योगी सरकार ने किया बड़ा बदलाव, पैमाइश में नहीं होगी धांधली, ऐसे बनेंगे नक्शे

उत्तर प्रदेश सरकार चकबंदी प्रक्रिया में बदलाव करने जा रही है। सरकार की कोशिश इसे पारदर्शी बनाना है। इसको लेकर आए दिन होने वाली धांधली की शिकायतों को खत्म करने के लिए चकबंदी से पहले गाटावार रोवर मशीन से ई-नक्शा तैयार कराया जाएगा। इसे पुराने नक्शे से मिलान करते हुए चकबंदी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नक्शा तैयार करने के लिए उच्च तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

प्रदेश में मौजूदा समय अभी पुराने नक्शों के आधार पर ही चकबंदी की जा रही है। इससे यह नहीं पता चल पा रहा है कि मौजूदा समय भूमि की क्या स्थिति है। प्रभाशाली लोग अपने हिसाब से जमीनों की पैमाइश करा लेते हैं और छोटे लोगों को हमेशा यह शिकायत रहती है कि उनका हक मारा जा रहा है। इसीलिए उच्च स्तर पर तय किया गया है कि चकबंदी कराने से पहले प्रत्येक गाटे का नया नक्शा तैयार कराया जाएगा। नक्शा तैयार करने के लिए रोवर प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए भूमि के चारों कोने पर रिफ्लेक्टर रॉड लगाए जाते हैं और इससे सटीक नक्शा तैयार हो जाता है। इस नक्शे को पुराने नक्शे से मिलान कराया जाएगा। नए सिरे से चकबंदी कराने के बाद काफी हद तक सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटेंगे।

हर गाटे का नए सिरे से बन रहा है नक्शा
चकबंदी आयुक्त हृषिकेश भास्कर याशोद कहते हैं कि चकबंदी को लेकर आने वाली समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रत्येक गाटे का नए सिरे से नक्शा तैयार कराया जाएगा। इसे लिए रोवर मशीन का सहारा लिया जाएगा। इससे चकबंदी को लेकर होने वाले विवाद तो खत्म होंगे ही और साथ में किसी कितनी भूमि कहां है उसका वास्तिक रूप से पता चल जाएगा।

पायलेट प्रोजेक्ट सफल रहा तो प्रदेश में लागू होगा
पहले चरण में इसे कुछ गांवों में माडल के तौर पर कराया जाएगा और इसकी सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसके साथ ही चकबंदी के सभी नक्शों को डिजिटाइज किया जाएगा।
साभार

ईसाई ऑफिसर ने गुरुद्वारा जाने से किया इनकार; सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, 'सेना में जगह नहीं'सुप्रीम कोर्ट ने एक ईसाई आर्म...
27/11/2025

ईसाई ऑफिसर ने गुरुद्वारा जाने से किया इनकार; सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, 'सेना में जगह नहीं'

सुप्रीम कोर्ट ने एक ईसाई आर्मी ऑफिसर की याचिका खारिज कर दी, जिसे गुरुद्वारे में पूजा करने से मना करने पर नौकरी से निकाल दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि वह सेना में रहने के लायक नहीं है, क्योंकि उसने सीनियर के आदेश की अवहेलना की थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे झगड़ालू लोग सेना में रहने लायक नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

अनुशासनहीनता का संदेश: कोर्ट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की शीर्ष अदालत ने मंगलवार को एक ईसाई आर्मी ऑफिसर की याचिका पर सुनवाई की। ऑफिसर को गुरुद्वारे में पूजा करने से जाने के लिए मना करने पर नौकरी से निकाल दिया गया था। याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मिलिट्री में रहने के लायक नहीं है।

नए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने नौकरी से बर्खास्त हुए सैमुअल कमलेसन को खारिज करते हुए कहा, '"वह कैसा मैसेज दे रहा है? एक आर्मी ऑफिसर की बड़ी अनुशासनहीनता। उसे नौकरी से निकाल देना चाहिए था। इस तरह के झगड़ालू लोग मिलिट्री में रहने के लायक नही हैं?'

सीनियर के आदेश को किया था मना

सैमुअल कमलेसन तीसरी कैवलरी रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट थे। लेकिन उन्होंने गुरुद्वारे में पूजा करने के लिए जाने से अपने सीनियर के आदेश को मना कर दिया था। उसने कहा था कि उसका एकेश्वरवादी ईसाई धर्म इसकी इजाजत नहीं देता। इसके बाद उसे मिलिट्री डिसिप्लिन तोड़ने के लिए निकाल दिया गया था।

मई में उसने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन अदालत ने आर्मी के फैसले को सही ठहराया था। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'वह एक शानदार ऑफिसर हो सकता है लेकिन वह इंडियन आर्मी के लिए मिसफिट है। इस समय हमारी फोर्सेज़ पर जितनी ज़िम्मेदारियाँ हैं... हम यह नहीं देखना चाहते।'

सैमुअल कमलेसन की तरफ से सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क रखे। उन्होंने कहा कि कमलेसन ने होली और दीवाली जैसे त्योहारों में हिस्सा लेकर दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान दिखाया, लेकिन एक ही गलती के लिए उसे नौकरी से निकाल दिया गया। शंकरनारायणन ने संविधान में धर्म को मानने के अधिकार का भी हवाला दिया, लेकिन पीठ इससे सहमत नहीं था।
साभार

ज्वालामुखी फटने के बाद भारत पहुंचा राख का विशाल गुबार, कई उड़ानें रद्दपूर्वी अफ्रीकी देश इथियोपिया में हजारों सालों से ब...
25/11/2025

ज्वालामुखी फटने के बाद भारत पहुंचा राख का विशाल गुबार, कई उड़ानें रद्द

पूर्वी अफ्रीकी देश इथियोपिया में हजारों सालों से बंद एक ज्वालामुखी के फटने से खलबली मची हुई है। हेली गुब्बी नाम के इस ज्वालामुखी फटने के बाद राख का एक विशाल गुबार उबला है और अब यह भारत पहुंच गया है। राख का गुबार लगभग 100-120 किमी प्रति घंटा की गति से बढ़ रहा है और सोमवार रात करीब 11 बजे दिल्ली में दस्तक दे चुका है। मौसम विशेषज्ञों ने बताया है कि राख का गुबार गुजरात से प्रवेश करते हुए राजस्थान, दिल्ली-NCR और पंजाब की ओर बढ़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इस रूट की कई विमानों को भी रद्द कर दिया गया है।

मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि राख के इस इलाके की ओर बढ़ने से भारतीय हवाई क्षेत्र में और उसके आसपास के हवाई जहाजों के ऑपरेशन पर असर पड़ना शुरू हो गया है और अगले कुछ घंटों में दिक्कतें बढ़ सकती हैं। वहीं भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने कहा है कि ज्वालामुखी की राख, सल्फर डाइऑक्साइड और यहां तक ​​कि चट्टान के छोटे कणों से बने ये गुबार सतह से लगभग 10-15 किलोमीटर की ऊंचाई पर हैं और इसीलिए फ्लाइट्स पर काफी असर पड़ने की संभावनाएं हैं।

10 हजार साल फटा ज्वालामुखी
अफ्रीकी देश का यह ज्वालामुखी 10 हजार साल से भी ज्यादा समय के बाद सक्रिय हुआ है। सैटेलाइट तस्वीरों से इसकी पुष्टि हुई है। ज्वालामुखी फटने के बाद राख का एक मोटा गुबार लाल सागर से होते हुए यमन और ओमान की ओर बढ़ गया। यह बादल अब उत्तरी अरब सागर के ऊपर फैल रहा है। राख के मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया की ओर बढ़ने के बाद, एयरलाइंस ने दोपहर के बाद से ही फ्लाइट्स कैंसिल करना शुरू कर दिया था।

कई उड़ानें रद्द
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वे राख से प्रभावित इलाकों से सख्ती से बचें, नई एडवाइजरी के आधार पर फ्लाइट प्लानिंग, रूटिंग और फ़्यूल से जुड़ी बातों को एडजस्ट करें। एयरलाइंस से यह भी कहा गया है कि वे इंजन की परफॉर्मेंस में गड़बड़ी या केबिन के धुएं या बदबू सहित किसी भी संदिग्ध राख के मिलने की तुरंत रिपोर्ट करें।
साभार

यूपी में 3000 करोड़ की लागत से इस हाईवे को बनाया जाएगा सिक्स लेन, हर चौराहे पर बनेंगे 20 नए अंडरपासमेरठ-देहरादून हाईवे प...
13/11/2025

यूपी में 3000 करोड़ की लागत से इस हाईवे को बनाया जाएगा सिक्स लेन, हर चौराहे पर बनेंगे 20 नए अंडरपास

मेरठ-देहरादून हाईवे पर जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए परतापुर से मुजफ्फरनगर तक सिक्स लेन चौड़ीकरण का काम शुरू होगा। एनएचएआई ने डीपीआर तैयार करने के लिए ड्रोन सर्वे शुरू कर दिया है। सर्वे के अनुसार, 20 नए अंडरपास बनेंगे और मंसूरपुर में एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। मार्च 2026 तक डीपीआर मंत्रालय को सौंपी जाएगी और डेढ़ साल में काम पूरा होने की उम्मीद है

परतापुर से हरिद्वार होते हुए देहरादून जाने वाले हाईवे (पुराना एनएच 58) पर यातायात का बेतहाशा दबाव है। प्रत्येक सप्ताह शनिवार और रविवार को तो वाहनों की संख्या इतनी बढ़ जाती है कि हाईवे पर वाहनों का चल पाना दूभर हो जाता है। बार बार यहां जाम लगता रहता है। लोगों को जाम की इस समस्या से अब जल्द छुटकारा मिल जाएगा।

केंद्रीय मंत्रालय के आदेश पर एनएचएआइ ने इस मार्ग के परतापुर से मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा तक सिक्स लेन चौड़ीकरण की डीपीआर तैयार करानी शुरू कर दी है। इसके लिए कंसलटेंट एजेंसी का ड्रोन सर्वे अंतिम चरण में है।

मार्च 2026 तक डीपीआर तैयार करके मंत्रालय को सौंपी जानी है। अभी तक के सर्वे के मुताबिक इस हिस्से में लगभग 20 नए अंडरपास बनाने होंगे। मंसूरपुर में हाईवे को लगभग डेढ़ किमी तक एलीवेटेड गुजारा जाएगा।

हर समय रहती है वाहनों की भीड़, साप्ताहिक छुट्टी पर जाम की स्थिति

दिल्ली से मेरठ होते हुए देहरादून तक जाने वाले पुराने एनएच 58 को अब मेरठ में परतापुर तिराहे से देहरादून तक राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा प्राप्त है। इस मार्ग पर रोजाना गुजरने वाले वाहनों का दबाव बेतहाशा बढ़ गया है।

इसके बाद दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से हजारों की संख्या में लोग शनिवार और रविवार की छुट्टी में पहाड़ी क्षेत्रों पर घूमने के लिए इसी मार्ग से जाते हैं। जिसके चलते शुक्रवार शाम से ही वाहनों की मारामारी मचती है जो कि सोमवार सुबह तक जारी रहती है। इन हालात में इस मार्ग पर बार बार जाम लगता रहता है और वाहनों का यहां से निकल पाना मुश्किल हो जाता है।

होगा सिक्स लेन चौड़ीकरण, खत्म होगी समस्या

केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्रालय ने इस समस्या के समाधान के लिए इस हाईवे को परतापुर से मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा तक (लगभग 80 किमी) के हिस्से को सिक्स लेन चौड़ा करने का आदेश दिया है। जिसके बाद एनएचएआइ कंसलटेंट एजेंसी तैनात करके मानव रहित ड्रोन सर्वे करा रही है।

मैसर्स एफपी इंडिया प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड यह काम कर रही है। अब इस हाईवे को कुल 130 मीटर चौड़ा करने के लिए ड्रोन हो रहा है। कंसलटेंट एजेंसी के परियोजना प्रमुख रामपाल सिंह सैनी ने बताया कि सर्वे अब अंतिम चरण में है। इसी सर्वे के आंकड़ों के आधार पर डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार होगी।

हर चौराहे पर बनेगा अंडरपास, नहीं रहेगी कोई अड़चन
इस मार्ग पर अभी भी फ्लाईओवर और अंडरपास की संख्या कम नहीं है लेकिन सिक्स लेन चौड़ा करने के लिए अब प्रत्येक चौराहा बंद करके अंडरपास से गुजारा जाएगा। अभी तक 20 नए अंडरपास बनाए जाने का अनुमान है। अधिकांश मार्ग पर सर्विस रोड बनाई जाएगी।

मंसूरपुर में दोनों ओर मार्केट, चीनी मिल, मेडिकल कालेज के कारण जाम की स्थिति बनी रहती है। यहां डेढ़ किमी की दूरी में एलीवेटेड सड़क बनाई जाएगी। पुराने फ्लाईओवर को चौड़ा करके डबल किया जाएगा। इस चौड़ीकरण कार्य के लिए कुछ जमीन भी खरीदनी होगी। इस कार्य में लगभग तीन हजार करोड़ का खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

सर्वे कार्य लगभग पूरा हो गया है। मार्च 2026 तक डीपीआर तैयार कर ली जाएगी। अगले सप्ताह जिलाधिकारी ने इसके लिए बैठक बुलाई है। -अमित प्रणव, परियोजना निदेशक एनएचएआइ

जाम से आम जनता को निजात दिलाने के लिए देहरादून हाईवे सिक्स लेन चौड़ा किया जाएगा। इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। डीपीआर बनने के बाद डेढ़ साल में इस काम को पूरा कराया जाएगा। -डा. वी के सिंह, जिलाधिकारी
साभार

दिल्ली धमाका : कई बार बिक चुकी थी धमाके वाली कार, कश्मीर तक पहुंची जांच, अमित शाह ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग दिल्ली के लाल ...
11/11/2025

दिल्ली धमाका : कई बार बिक चुकी थी धमाके वाली कार, कश्मीर तक पहुंची जांच, अमित शाह ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग

दिल्ली के लाल किला के पास एक कार में भीषण धमाका हुआ है. इस धमाके में अभी तक 8 लोगों की मौत हो गई है. इसमें 16 लोग घायल बताए जा रहे हैं. ब्लास्ट से जुड़ी जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए है, उसे देखकर यह सामान्य धमाका नजर नहीं आ रहा है

फरीदाबाद में मिले 2900 किलो विस्फोटक की जांच अभी चल रही थी कि सोमवार शाम देश की राजधानी दिल्ली एक भीषण धमाके से दहल उठी. रविवार शाम दिल्ली में लाल किला के पास एक कार में भीषण धमाका हुआ. धमाका इतना तेज था कि आस-पास की कई गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए. शाम का समय यहां काफी भीड़ होती है. इस धमाके की जद में आकर कई लोग बुरी तरह से घायल हो गए. धमाके के बाद घायलों को नजदीकी अस्पताल में लाया गया. अभी तक इस धमाके में 8 व्यक्ति की मौत हो गई है.

अमित शाह बोले- धमाके में 8 लोगों की हुई मौत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने LNJP में घायलों से मिलने के बाद बताया कि इस धमाके में 8 लोगों की मौत हुई है. फिलहाल धमाका कैसे हुआ, इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी. अमित शाह ने कहा कि कल गृह मंत्रालय में सभी जिम्मेदार अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई गई है.

धमाके में जुड़ी भयावह तस्वीरें और वीडियो आए सामने

धमाके में कई लोग घायल बताए जा रहे हैं. ब्लास्ट से जुड़ी जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए है, उसे देखकर यह सामान्य धमाका नजर नहीं आ रहा है. धमाके से आस-पास की कई गाड़ियों में भी आग लग गई है. धमाके के बाद रेस्क्यू-ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है.

बताया जाता है कि धमाका मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास सोमवार को पार्किंग में खड़ी एक कार में अचानक धमाका हो गया. धमाके के बाद आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास खड़ी तीन और गाड़ियां भी जल गईं. सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया.

पुलिस ने यूएपीए और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया

दिल्ली पुलिस ने शहर के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए विस्फोट के संबंध में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), विस्फोटक अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है

पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा

ताज़ा पूछताछ से पता चला है कि तस्वीर में दिख रहा व्यक्ति आमिर है. आमिर ने कार तारिक को दी थी। तारिक ने कार उमर मुहम्मद को दी थी. उमर, आदिल और मुज़म्मिल का मुख्य साथी है.

कार दक्षिण कश्मीर के पुलवामा निवासी डॉ. उमर मोहम्मद की थी

शीर्ष सूत्रों ने पुष्टि की है कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई कार दक्षिण कश्मीर के पुलवामा निवासी डॉ. उमर मोहम्मद की थी. वह उसी मॉड्यूल से जुड़ा है जिसका भंडाफोड़ जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद में किया था, जो डॉ. मुज़म्मिल और डॉ. आदिल से जुड़ा था. जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा पुलिस द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त करने के बाद, उमर और उसके साथी कथित तौर पर घबरा गए और लाल किले के पास विस्फोट कर दिया.

जांचकर्ताओं का सुझाव है कि निशाना मध्य दिल्ली में कहीं भी हो सकता था, क्योंकि कार लाल किले से शहर के केंद्र की ओर जाती देखी गई थी. पुलिस और खुफिया एजेंसियों का मानना ​​है कि लाल किले पर हुए आतंकी हमले में भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया था.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तारिक को पुलवामा में हिरासत में लिया

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तारिक को पुलवामा में हिरासत में लिया है. शुरुआती पूछताछ जारी है. उसे आगे की पूछताछ के लिए सुबह जल्दी श्रीनगर लाया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि शुरुआती पूछताछ में तारिक ने खुलासा किया है कि कार आमिर नाम के एक व्यक्ति को बेची गई थी और फिर तारिक को दी गई, जिसने इसे आगे उमर को दे दिया.

लिथियम को भूल जाइए, दुनिया के लिए नया 'खजाना' बना यह क्रिटिकल मिनरल, भारत में है विशाल भंडार, खत्‍म होगी चीनी दादागिरीदु...
30/10/2025

लिथियम को भूल जाइए, दुनिया के लिए नया 'खजाना' बना यह क्रिटिकल मिनरल, भारत में है विशाल भंडार, खत्‍म होगी चीनी दादागिरी

दुनियाभर में इन दिनों दुर्लभ खनिजों पर कब्‍जा करने की होड़ मची हुई है। चीन जहां दुनिया के दुर्लभ खनिजों पर लगभग 'कब्‍जा' कर चुका है, वहीं अमेरिका, जापान और भारत जैसे देश उसे लगातार चुनौती दे रहे हैं। पूरी दुनिया में इन दिनों इलेक्ट्रिक गाड़‍ियों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है जो ल‍िथियम आयन बैट्री से चलती हैं। इसके पीछे वजह है कि दुनिया अब स्‍वच्‍छ ऊर्जा की ओर कदम बढ़ा रही है। चीन ल‍िथियम को लेकर व‍िश्‍वभर के देशों को आंख दिखा रहा है। चीनी कंपनियों ने बैट्री की दुनिया में दबदबा कायम कर लिया है। चीन की इस चुनौती के बीच वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रेफाइट अब नया क्रिटिकल मिनरल बन गया है जो ल‍िथियम बैट्री उद्योग की रीढ़ है। वहीं ग्रेफाइट के भंडार की बात करें तो दुनिया का सबसे बड़ा ग्रेफाइट भंडार चीन के पास है लेकिन भारत की धरती भी इस खजाने से भरी हुई है।

भारत में ग्रेफाइट के हैं व‍िशाल भंडार

व‍िज्ञान पत्रिका नेचर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेफाइट ल‍िथियम आयन बैट्री की रीढ़ है। यह अब नया क्रिटिकल म‍िनरल बन गया है। इसी वजह से यह स्‍वच्‍छ ऊर्जा की ओर बढ़ती दुनिया के लिए एक महत्‍वपूर्ण खनिज बन गया है। प्राकृतिक ग्रेफाइट की आपूर्ति दुनिया के कुछ ही जगहों पर केंद्रित है और इसका उत्‍पादन भी बढ़ाना मुश्किल है। इससे दुनिया में सप्‍लाई में दिक्‍कत आ रही है। इसी को देखते हुए दुनिया में कृत्रिम ग्रेफाइट का इस्‍तेमाल काफी ज्‍यादा होता है जो ज्‍यादा शुद्ध होता है और उसका प्रदर्शन भी अच्‍छा होता है। हालांकि इसे बनाने में काफी ज्‍यादा ऊर्जा खर्च होती है जो जीवाश्‍म ईंधन से बनती है। यह पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है।

भारत में मौजूद है ग्रेफाइट का व‍िशाल भंडार

ग्रेफाइट का भविष्‍य अब दो बदलावों पर टिका हुआ है। पहला- नवीकरणीय कार्बन स्रोतों से 'ग्रीन' उत्‍पादन और पुरानी बैटरियों से ग्रेफाइट को रीसायकल करना। ग्रेफाइट लिथियम आयन बैट्री में एनोड के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है। एनोड बैट्री का वह हिस्‍सा होता है जो चार्जिंग और डिस्‍चार्जिंग के दौरान आयनों को स्‍टोर करता है। ग्रेफाइट स्‍वच्‍छ ऊर्जा की ओर दुनिया के बढ़ते कदम के लिए बहुत जरूरी है। वहीं प्राकृतिक ग्रेफाइट के भंडार की बात करें तो चीन जहां पहले नंबर पर है, वहीं भारत में भी इसका विशाल भंडार मिला है। भारत दुनिया में सातवें नंबर पर है।
साभार

मुजफ्फरनगर में चिकनगुनिया का प्रकोप, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार नहीं मिलने से लोगों में आक्रोशमुजफ्फरनगर जनपद के...
30/10/2025

मुजफ्फरनगर में चिकनगुनिया का प्रकोप, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार नहीं मिलने से लोगों में आक्रोश

मुजफ्फरनगर जनपद के गालिबपुर क्षेत्र में चिकनगुनिया और टाइफाइड का प्रकोप बढ़ गया है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर समुचित इलाज न मिलने के कारण सैकड़ों मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की कथित निष्क्रियता से लोगों में आक्रोश है।

गालिबपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले मोहद्दीनपुर, बहापुर, बिहारीपुर, गालिबपुर, पमनावली, चित्तौड़ा, छछरपुर, अती, गदनपुरा, मीरापुर और नंगली महासिंह सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में लोग चिकनगुनिया की चपेट में हैं। मौसम बदलने के साथ ही बुखार और अन्य बीमारियों ने तेजी से पैर पसारे हैं, जिससे पुरुष, महिलाएं और छोटे बच्चे प्रभावित हो रहे हैं।

जिले में एक जिला अस्पताल, खतौली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और गालिबपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। आरोप है कि विभागीय अधिकारी अपने कार्यालयों में निष्क्रिय बैठे हैं, जबकि ग्राम प्रधान भी फॉगिंग और साफ-सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रहे हैं।

मरीज अपने तीमारदारों के साथ छोटे-बड़े अस्पतालों और निजी चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। दो-तीन दिन के प्राथमिक उपचार के बाद भी जब सेहत में सुधार नहीं होता, तो डॉक्टर रक्त जांच की सलाह देते हैं। जांच रिपोर्ट में चिकनगुनिया और कुछ मामलों में टाइफाइड बुखार की पुष्टि हो रही है। चिकनगुनिया से पीड़ित मरीजों को जोड़ों में लंबे समय तक दर्द की शिकायत रहती है।

इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, खतौली के डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि मौसम बदलने के कारण वायरल का प्रकोप है। उन्होंने कहा कि रक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर ही उपचार दिया जाता है और मरीजों के इलाज के लिए जल्द ही गांवों में डॉक्टरों की टीम भेजी जाएगी।
साभार

Address

Muzaffarnagar
251001

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when MM News muzaffarnagar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share