31/08/2026
बिहार के ऐतिहासिक वैशाली जिले में स्थित श्री चतुर्मुख महादेव मंदिर आस्था और धार्मिक श्रद्धा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां बिहार के अलग-अलग जिलों के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु महादेव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। खासकर सावन के पवित्र महीने में मंदिर परिसर में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है आज भीषण गर्मी के बीच इस ऐतिहासिक स्थल पर जाने का मौका मिला। मंदिर परिसर में पहुंचते ही एक अलग तरह की शांति और आध्यात्मिक अनुभूति होती है। श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर से गहराई से जुड़ी हुई है और सावन के दौरान यहां का नजारा देखते ही बनता है इस मंदिर की एक खास बात यहां के प्रधान पुजारी हैं, जिनकी उम्र करीब 105 वर्ष है। इतनी अधिक उम्र होने के बावजूद वे आज भी नियमित रूप से महादेव की सेवा और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि वे आज तक महादेव की कृपा और आशीर्वाद से स्वस्थ हैं और सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है हालांकि इतनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता होने के बावजूद यह स्थल आज भी अपेक्षित विकास की बाट जोह रहा है स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी बल्कि बिहार के धार्मिक पर्यटन को भी नई पहचान मिल सकती है मंदिर परिसर में बना पांडव संगीत महल भी ऐतिहासिक महत्व रखता है, लेकिन वर्तमान में यह काफी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। बताया जाता है कि जब बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव थे उस समय इस स्थल का कायाकल्प कराया गया था। इसके बाद से उचित रखरखाव और विकास के अभाव में यह स्थान धीरे-धीरे वीरान और जर्जर होता चला गया वैशाली जिले के कई जनप्रतिनिधि वर्तमान में एनडीए सरकार का हिस्सा हैं लेकिन इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और विकास को लेकर अब तक कोई ठोस पहल या स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है आज जरूरत है कि बिहार सरकार और केंद्र सरकार इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल की ओर गंभीरता से ध्यान दें मंदिर और पांडव संगीत महल का जीर्णोद्धार कराया जाए, श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाए और इसे पर्यटन के मानचित्र पर उचित स्थान दिया जाए क्योंकि ऐसी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें केवल आज की पीढ़ी की संपत्ति नहीं हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी संस्कृति, आस्था और इतिहास की पहचान हैं। इनका संरक्षण और विकास करना हम सभी की जिम्मेदारी है।