20/09/2026
संस्कृति शिक्षा केंद्र में गूँजी ज्ञान और संस्कार की पुकार, विद्यार्थियों से रूबरू हुए युवा साहित्यकार कुमार संदीप
रिपोर्ट- लक्ष्मण कुमार, चीफ एडिटर, जीवन तक न्यूज़
20 सितंबर 2026 की प्रातः बेला मुरौल प्रखंड के कोरिगामा स्थित संस्कृति शिक्षा केंद्र के लिए एक ऐसी स्मरणीय सुबह लेकर आई, जिसमें शिक्षा केवल पुस्तकों के पन्नों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जीवन के अनुभवों, संस्कारों और सपनों से जुड़कर विद्यार्थियों के अंतर्मन तक पहुँची। ज्ञान और संस्कार की इस शैक्षणिक भूमि पर गुरु दीक्षा शैक्षणिक परिवार के संचालक, युवा साहित्यकार-सह-शिक्षक कुमार संदीप एवं संस्थापक नवीन कुमार मिश्र ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद कर उन्हें जीवन की राह में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
संस्कृति शिक्षा केंद्र के संस्थापक सुदीश ठाकुर कुमार ठाकुर के आत्मीय आमंत्रण पर पहुँचे कुमार संदीप ने विद्यार्थियों के बीच शिक्षा, अनुशासन, परिश्रम, संस्कार, समय के सदुपयोग, माता-पिता के त्याग तथा जीवन के लक्ष्य के प्रति समर्पण जैसे विषयों पर सारगर्भित संवाद किया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कुमार संदीप ने कहा कि विद्यार्थी के भीतर यदि सीखने की जिज्ञासा, लक्ष्य के प्रति निष्ठा, निरंतर परिश्रम और सही मार्गदर्शन का दीप जलता रहे, तो साधारण परिवेश से निकलने वाला विद्यार्थी भी अपने कर्म और प्रतिभा के बल पर असाधारण पहचान स्थापित कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को माता-पिता के संघर्ष और त्याग का स्मरण कराते हुए कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए जीवन के हर मौसम में स्वयं को समर्पित कर देते हैं। उनके माथे का पसीना और आँखों के सपने संतान की सफलता से जुड़े होते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों का भी दायित्व है कि वे अपने लक्ष्य से भटकें नहीं, समय का सम्मान करें, ईमानदारी और लगन के साथ अध्ययन करें तथा अपनी सफलता को माता-पिता के जीवन में प्रसन्नता और गौरव का कारण बनाएं।
कुमार संदीप ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का दीप प्रज्वलित करते हुए कहा कि “आज भले ही आप एक ‘Simple विद्यार्थी’ हैं, लेकिन आपकी मेहनत, त्याग और समर्पण आपको एक दिन ‘Special व्यक्ति’ बना सकता है।” उन्होंने कहा कि मंजिल उन्हीं कदमों का स्वागत करती है, जो कठिन रास्तों से घबराकर रुकते नहीं हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य को पहचानकर समय का सम्मान करना चाहिए और विपरीत परिस्थितियों के सामने अपने संकल्प को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए।
इस दौरान विद्यार्थियों की अनुशासनप्रियता, एकाग्रता और आत्मीय सहभागिता विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही। संस्कृति शिक्षा केंद्र के संस्थापक सुदीश ठाकुर तथा सहायक शिक्षक रौशन सर का विद्यार्थियों के बीच बैठकर संवाद का हिस्सा बनना गुरु-शिष्य परंपरा की उस सुंदर तस्वीर को जीवंत कर रहा था, जहाँ ज्ञान केवल किसी मंच से दिया नहीं जाता, बल्कि साथ बैठकर, साथ समझकर और साथ चलकर भी अर्जित किया जाता है।
लगभग दो से ढाई घंटे तक चले इस आत्मीय शैक्षणिक संवाद में विद्यार्थियों ने शिक्षा और जीवन से जुड़े विभिन्न पक्षों को समझा। संवाद के उपरांत कुमार संदीप ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि वे विद्यार्थियों को प्रेरित करने के उद्देश्य से संस्कृति शिक्षा केंद्र पहुँचे थे, किंतु लौटते समय उन्हें ऐसा अनुभव हुआ कि प्रेरणा देने से कहीं अधिक वे स्वयं विद्यार्थियों की एकाग्रता, सरलता और सीखने की ललक से बहुत कुछ सीखकर लौट रहे हैं।
वहीं नवीन कुमार मिश्र ने विद्यार्थियों को केवल सफल विद्यार्थी बनने के बजाय एक अच्छा, संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए नकारात्मक विचारों और गलत प्रवृत्तियों से दूर रहना आवश्यक है। विद्यार्थी व्यवहारिक, संस्कारी और जिम्मेदार नागरिक बनने का प्रयास करें, सभी का सम्मान करें, प्रत्येक व्यक्ति के प्रति संवेदनशीलता रखें और समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करें।
उन्होंने संस्कृति शिक्षा केंद्र की ज्ञान एवं संस्कार से जुड़ी इस शैक्षणिक यात्रा के निरंतर उन्नयन की कामना करते हुए माँ सरस्वती भगवती से सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य, ज्ञान, विवेक, संस्कार और सफलता के लिए प्रार्थना की।
कुल मिलाकर, संस्कृति शिक्षा केंद्र में आयोजित यह संवाद महज कुछ घंटों का शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के अंतर्मन में मेहनत, संस्कार, संवेदना और सपनों की लौ प्रज्वलित करने वाला एक आत्मीय प्रेरणासत्र बन गया। संस्कृति कला केंद्र के संचालक संस्थापक सुदीश कुमार ठाकुर ने आंगुतक कुमार संदीप नवीन मिश्र का उचित आतिथ्य सत्कार कर धन्यवाद ज्ञापित किया।
#कुमार_संदीप